तालिबान की धमकी के बीच काबुल में लोया जिरगा

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Image caption तालिबान की लोया जिरगा में भाग लेने वालों को निशाना बनाने की धमकी से करज़ई की परेशानी बढ़ी

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान चरमपंथियों की धमकियों और काबुल में 'हाई अलर्ट' के बीच बुधवार को क़बायली नेताओं के महासम्मेलन - लोया जिरगा का आयोजन किया गया है.

तालिबान चरमपंथियों ने धमकी दी है कि जो भी लोया जिरगा में भाग लेगा उस पर हमला किया जाएगा.

तालिबान के सत्ता से हटाए जाने के दस साल बाद

इससे पहले तालिबान ने सोमवार को दावा किया था कि उसे नेताओं की सुरक्षा की योजना की प्रति मिल गई है.

मीडिया को भेजे गए इस 27 पृष्ठों के दस्तावेज़ की प्रति में राष्ट्रपति हामिद करज़ई और मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी होने का दावा किया गया था.

लेकिन काबुल के पुलिस प्रमुख ने इसका खंडन करते हुए कहा था कि ये फ़र्ज़ी है.

सोमवार को ही काबुल में लोया जिरगा के स्थल पर एक हमला करने के प्रयास में एक आत्मघाती हमलावर को गोली मार दी गई थी.

लोया जिरगा का मक़सद

राष्ट्रपति हामिद क़रज़ई के द्वारा बुलाई गई लोया जिरगा में लगभग 2000 क़बायली प्रमुखों और नेताओं के भाग लेने की संभावना है.

अमरीकी हमले में पाकिस्तान का साथ देंगे: करज़ई

इसका मक़सद तालिबान विद्रोहियों के साथ मैत्री और संभवत: अफ़ग़ानिस्तान-अमरीका के बीच रणनीतिक साझेदारी के मुद्दों पर चर्चा करना है.

इस तरह से अफ़ग़ानिस्तान और अमरीका के बीच वर्ष 2014 के बाद कैसे रिश्तें होंगे, इस विषय पर इस सम्मेलन में बहस होगी. वर्ष 2014 तक अमरीकी और अन्य विदेशी फ़ौजें अफ़ग़ानिस्तान से पूरी तरह से हट जाएँगी.

काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता ओर्ला गुरिन के अनुसार, "तालिबान को सत्ता से बेदख़ल किए जाने के 10 साल बाद मैत्री के मुद्दो पर हो रहे इस सम्मेलन की शुरुआत से भी पहले इस पर राजनीतिक विरोधियों और विद्रोहियों के हमले शुरु हो गए हैं. विरोधियों का कहना है कि ये समय की बर्बादी है और कुछ सांसदों ने तो इसका बहिष्कार करने की धमकी भी दी है."

ग़ौरतलब है कि वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि क़ानून तौर पर इस सम्मेलन में लिए गए फ़ैसलों से संसद बाध्य नहीं हैं क्योंकि संसद को फ़ैसले सर्वोपरी हैं.

पर्यवेक्षक हारून मीर का कहना है, "जब बहस के लिए कोई समझौता ही सामने नहीं है तो इस सम्मेलन को कोई मक़सद ही नहीं है. मेरा मानना है कि ये एक और जिरगा होगी जिसमें लोग चाय पिएँगे, खाना खाएँगे, चर्चा करेंगे और अंत में राष्ट्रपति करज़ई घोषणा करेंगे कि उनकी जीत हुई है. दुर्भाग्यपूर्ण है कि अफ़ग़ानिस्तान में ऐसा ही होता है."

सोमवार को अमरीका ने इस लोया जिरगा में अपना भरोसा व्यक्त किया था और कहा था कि उसे विश्वास है कि इससे अफ़ग़ान-अमरीका संबंध मज़बूत होंगे.

घरों की छानबीन, काबुल हुआ 'सील'

उधर काबुल में सैन्य छावनी जैसा माहौल है.

काबुल में बीबीसी संवाददाता बिलाल सर्वरी का कहना है कि लोया जिरगा के स्थल की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर सुरक्षा बलों के नाके लगा दिए गए हैं और आम जनता के लिए ये रास्ते बंद कर दिए गए हैं.

इस स्थल के पास स्थित सभी घरों की छानबीन की गई है और हज़ारों पुलिसकर्मी और सादा कपड़ों में सुरक्षा बल के लोगों को तैनात किया गया है.

अनेक पुलिस वाहन और ख़ुफ़िया एजेंसियों के वाहन सड़कों पर गश्त लगा रहे हैं.

काबुल के बाहर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात हैं और काबुल में घुसने के लिए लोगों को अपने पहचान पत्र या अपनी पहचान के कोई और सबूत दिखाने पड़ रहे हैं.

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