बर्मा में बदलावों को लेकर आशावान सू ची

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Image caption मुलाक़ात के बाद एक-दूसरे से गले मिलती हुई हिलेरी क्लिंटन और आंग सान सू ची

बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची ने अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से मुलाक़ात के बाद आशा जताई है कि बर्मा लोकतंत्र के रास्ते पर चलना शुरू कर सकता है.

मगर उन्होंने साथ ही कहा कि बर्मा अभी तक उस मार्ग पर पहुँचा नहीं है और सैनिक समर्थन वाली नई सरकार की तरफ़ से किए जा रहे सुधारों के स्वागतयोग्य होने के बावजूद अभी बहुत कुछ और किए जाने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा,"मुझे पूरा विश्वास है कि यदि सब मिल-जुलकर काम करें तो फिर लोकतंत्र के रास्ते पर पीछे मुड़कर देखने का अवसर नहीं आएगा."

दोनों नेताओं ने मुलाक़ात के बाद बर्मा में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए मिल-जुलकर प्रयास करने का वादा किया.

हिलेरी क्लिंटन 1955 के बाद बर्मा की यात्रा पर पहुँचनेवाली पहली अमरीकी विदेश मंत्री हैं.

भावुक मुलाक़ात

हिलेरी क्लिंटन ने सू ची से रंगून में उनके घर पर मुलाक़ात की. सू ची इसी घर में पिछले कोई दो दशक तक नज़रबंद रही थीं. पिछले साल उन्हें रिहा किया गया था.

बर्मा यात्रा के दौरान सू ची के साथ हिलेरी की ये दूसरी मुलाक़ात थी. उन्होंने गुरूवार को सू ची के साथ रात्रिभोज किया था और तब दोनों जीवन में पहली बार मिले.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि सू ची से मिलना उनके लिए एक भावुक क्षण था.

उन्होंने कहा,"हम पहली बार मिले मगर ऐसा लगा कि हम एक ऐसे दोस्त से मिल रहे हों जिसे आपने बहुत लंबे समय से नहीं देखा."

मुलाक़ात के बाद बाहर आकर दोनों ने एक-दूसरे को गले से लगाया.

हिलेरी ने फिर कहा कि बर्मी नेता उनके देश और दुनिया भर के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं. सू ची ने अमरीका का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उसने बर्मा के नेतृत्व के साथ संपर्क बढ़ाने में बहुत नाप-तौलकर भूमिका निभाई है.

1991 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता सू ची ने कहा कि बर्मा में सेना के समर्थन वाली असैनिक सरकार के साथ संपर्क बढ़ाने से बात आगे बढ़ी है और यदि सब मिल-जुलकर काम करें तो फिर लोकतंत्र के रास्ते पर पीछे मुड़कर देखने का अवसर नहीं आएगा.

हालाँकि उन्होंने चेतावनी दी कि बर्मा अभी तक उस मार्ग पर आया नहीं है.

उन्होंने कहा कि अभी बहुत सारे राजनीतिक बंदियों को रिहा किया जाना बाक़ी है.

बर्मा-अमरीका संबंध

हिलेरी क्लिंटन ने गुरूवार को बर्मा के राष्ट्रपति थेन सेन से मुलाक़ात की थी.

बर्मी राष्ट्रपति ने मुलाक़ात को अमरीका-बर्मा संबंधों के लिए एक नया अध्याय बताया था.

हिलेरी क्लिंटन ने बर्मा के राष्ट्रपति को भरोसा दिलाया कि अमरीका विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष जैसे संगठनों के साथ बर्मा के संबंधों को बेहतर करने के लिए मदद करेगा.

दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को बेहतर करने के बारे में भी चर्चा हुई.

लेकिन अमरीका सरकार ने अभी भी बर्मा के वरिष्ठ नेताओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को जारी रखा हुआ है.

बदलाव

बर्मा में 1962 से लेकर पिछले साल तक सैनिक सरकार का ही सीधा शासन था.

सैनिक सरकार ने 1990 में देश में चुनाव करवाए थे जिसमें सू ची की पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी को भारी जीत मिली थी.

मगर सैन्य सरकार ने उन्हें सत्ता सौंपने से मना कर दिया था.

इसके बाद सैन्य सरकार ने पिछले साल 20 साल बाद बर्मा में चुनाव करवाए जिसका सू ची की पार्टी ने बहिष्कार कर दिया था.

मगर चुनाव के बाद सैन्य शासकों ने असैनिक सरकार को सत्ता सौंप दी. हालाँकि संविधान में अभी भी सेना की सर्वोच्चता बरक़रार है.

पर बर्मा सरकार ने उस चुनाव के बाद एक-के-बाद-एक कई सुधारवादी क़दम उठाए हैं.

पहले चुनाव के बाद सू ची को रिहा किया गया, फिर चुनाव क़ानून में बदलाव किए गए जिसके बाद सू ची की पार्टी ने दोबारा राजनीति में लौटने का फ़ैसला किया.

पार्टी आगामी उपचुनाव में हिस्सा लेगी जिसमें सू ची भी उम्मीदवार होंगी.

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