हमलों के बाद करज़ई ने ब्रिटेन दौरा रद्द किया

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Image caption अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई देश के भविष्य पर चर्चा के लिए बॉन में आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेने गए थे

अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने राजधानी काबुल और उत्तरी शहर मज़ारे शरीफ़ में मंगलवार को हुए भीषण बम हमले के बाद ब्रिटेन का दौरा रद्द करते हुए अफ़ग़ानिस्तान वापसी का फ़ैसला किया है.

माना जा रहा है कि ये दोनों हमले शिया समुदाय के मुसलमानों को निशाना बनाकर किए गए थे और इनमें कम से कम 58 लोगों की मौत हुई है.

एक आत्मघाती बम हमलावर ने काबुल में एक धार्मिक स्थल को निशाना बनाया जहाँ 54 लोगों की मौत हो गई जबकि दूसरा विस्फोट मज़ारे शरीफ़ में लगभग उसी समय एक शिया मस्जिद के पास हुआ.

संभवतः ये सामुदायिक हिंसा थी और इससे हिंसा के नए दौर की शुरुआत की आशंका बढ़ गई है.

करज़ई अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य पर जर्मनी के बॉन में हुई बैठक में हिस्सा लेने गए थे और वहाँ से उन्हें ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से बात करने बुधवार को ब्रिटेन जाना था.

अशुरा

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Image caption लोग अशुरा के मौक़े पर काबुल में एक दरगाह के पास जमा थे

इससे पहले उन्होंने कहा, "ये पहली बार हुआ है कि अफ़ग़ानिस्तान में इतने अहम धार्मिक दिन इस घिनौने तरह का आतंकवाद हुआ है."

ये विस्फोट शिया मुसलमानों के धार्मिक आयोजन अशुरा के मौक़े पर हुए.

वैसे तो अफ़ग़ानिस्तान के शिया और सुन्नी मुसलमान समुदायों में काफ़ी तनाव रहा है मगर पिछले कुछ वर्षों में जो भी हमले हुए थे उनमें आम तौर पर सरकारी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय सेना को ही निशाना बनाया जाता था.

काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता क्वेंटिन समरविल के अनुसार पाकिस्तान या इराक़ में तो इस तरह के हमले आम हैं मगर अफ़ग़ानिस्तान में इस तरह के सामुदायिक हमले नहीं हुए हैं.

संवाददाताओं के अनुसार बॉन में अफ़ग़ानिस्तान से जुड़े सम्मेलन के दौरान अफ़ग़ान सुरक्षा अधिकारियों की जान अटकी हुई थी कि कहीं उसी दौरान ध्यान भटकाने के लिए काबुल में कोई बड़ा हादसा न हो जाए.

दोनों हमले लगभग एक ही समय पर दोपहर में हुए. काबुल में जब अबू फ़ज़ल की दरगाह के पास शिया मुसलमान प्रार्थना कर रहे थे कि उसी समय पहला हमला हुआ जिसमें 54 लोगों की मौत हो गई और डेढ़ सौ के क़रीब घायल हुए.

ज़िम्मेदारी

काबुल के आपराधिक जाँच विभाग के प्रमुख मोहम्मद ज़हीर के अनुसार किसी ने भी हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

तालेबान की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि दोनों ही हमलों में उनका हाथ नहीं था.

काबुल के प्रमुख शिया आलिम मोहम्मद बाकीर शेख़ज़ादा ने कहा कि उनकी याददाश्त में इतना बड़ा हमला कभी नहीं हुआ.

जबकि पुलिस ने बताया कि उन्होंने राजधानी में एक दूसरी जगह एक हमला विफल भी किया.

मज़ारे शरीफ़ की मुख्य मस्जिद के पास जो बम विस्फोट हुआ वो बम एक साइकिल में बंधा था और काबुल हमले के कुछ ही देर बाद वहाँ विस्फोट हुआ.

उसमें चार लोगों की मौत हो गई जबकि 17 अन्य घायल हुए.

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