'अफ़ग़ान पुलिसकर्मियों पर कुछ आरोप सही'

अफ़ग़ानिस्तान
Image caption ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाकुओं की तादाद तेज़ी से बढ़ी है

अमरीकी सेना की एक जाँच में पाया गया है कि अमरीका की ओर से प्रशिक्षित कुछ अफ़ग़ान पुलिसकर्मी मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में शामिल रहे हैं.

इस जाँच से पहले ह्यूमन राइट्स वॉच ने ये आरोप लगाया था कि कुछ अफ़ग़ान पुलिसकर्मियों ने बलात्कार और हत्या जैसे अपराध भी किए हैं.

अमरीकी जाँच में अब सिफ़ारिश की गई है कि इन पुलिसकर्मियों को मानवाधिकारों का प्रशिक्षण दिया जाए और साथ ही उन पर कड़ी निगरानी भी रखी जाए.

इस जाँच में अफ़ग़ान सरकार के लोग शामिल नहीं थे.

इस जाँच का आदेश अफ़ग़ानिस्तान में नेटो के कमांडर जनरल जॉन एलेन ने दिया था और इसमें उन 46 आरोपों को देखा गया जिसका ज़िक्र ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में था. इस जाँच में सात आरोप सही पाए गए.

इसमें एक ऐसा भी मामला था जहाँ अफ़ग़ान पुलिस ने अपने ही एक कमांडर को सिर्फ़ इसलिए मार दिया क्योंकि वह उन दो बच्चों को रिहा करने की कोशिश कर रहा था जिसे पुलिस ने फ़िरौती के लिए अगुवा किया था.

रिपोर्ट में 10 आरोप ग़लत पाए गए जबकि 14 के बारे में कोई फ़ैसला नहीं हुआ और 15 आंशिक रूप से सही थे.

चरमपंथ

जाँच में पाया गया कि कई मामले तो सिर्फ़ छोटी-मोटी चोरियों और अधिकार के ग़लत इस्तेमाल के थे.

रिपोर्ट के मुताबिक़, "ह्यूमन राइट्स वॉच का ध्यान ग़लत आचरण के आरोपों पर था. ये जाँच दिखाती है कि इस तरह के आरोपों को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है."

अफ़ग़ान पुलिस में अभी नौ हज़ार सदस्य हैं जो तीन गुना बढ़कर 30 हज़ार तक हो जाएँगे.

अमरीका को उम्मीद है कि ये बल अफ़गा़निस्तान में चरमपंथ को रोकने में क़ामयाब होगी.

इन्हें अमरीका के विशेष बलों ने प्रशिक्षित किया है और गाँव वालों ने उनका चयन किया था.

मगर मानवाधिकार गुटों को डर है कि इस तरह से अफ़ग़ान क़बायली नेताओं के निजी लड़ाकुओं को वैधता मिल जाएगा, साथ ही ऐसे नए गुट भी पैदा हो सकते हैं जिनकी ज़िम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा.

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