श्रीलंका मामले पर नहीं चली राज्य सभा

Image caption श्रीलंका की सेना पर मानवाधिकार हनन के आरोप

तमिलनाडु के सांसदों ने वामपंथी दलों की मदद से श्रीलंका के मुद्दे पर राज्य सभा में इतना शोर मचाया कि सभापति हामिद अंसारी को दिन भर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, द्रमुक सदस्यों ने खड़े हो कर बैनर दिखाने शुरू कर दिए.

वे माँग कर रहे थे कि सरकार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में श्रीलंका के गृह युद्ध के दौरान तमिलों के खिलाफ कथित रूप से हुई ज्यादतियों के विरोध में अमरीका, फ़्राँस और नॉर्वे के प्रस्ताव का समर्थन करे.

द्रमुक के इस विरोध में उसके प्रतिद्वंदियों अन्ना द्रमुक और वामपंथी दलों के सदस्यों ने भी साथ दिया.

सभापति हामिद अंसारी ने शुरू में यह कह कर इसकी अनुमति नहीं दी कि विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने उनसे एक वक्तव्य देने के लिए अनुरोध किया है और उन्होंने उन्हें बोलने की अनुमति दे दी है.

सभापति अंसारी ने बैनर दिखाए जाने पर आपत्ति भी दिखाई.

लेकिन अरुण जेटली ने कहा कि वह अपनी बात, श्रीलंकाई तमिलों के मामले को उठाए जाने के बाद रखने को तैयार हैं. हामिद अंसारी ने इसके बाद सदस्यों को मामला उठाने की अनुमति दे दी.

द्रमुक के टी शिवा ने कहा कि भारत की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में गृह युद्ध के दौरान श्रीलंकाई सेना की ज्यादतियों की निंदा करने वाले प्रस्ताव का समर्थन करे.

अन्ना द्रमुक के वी मैत्रेयन का कहना था कि तमिलनाडु विधानसभा ने एक मत से प्रस्ताव पास कर केंद्र से कहा था कि वह श्रीलंका के युद्ध अपराध के मामले को संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाए.

भारत को जानकारी

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा ने कहा कि भारत को श्रीलंका में किए गए युद्धापराधों और मानवाधिकार हनन के मामलों की जानकारी है और प्रधान मंत्री को इस पर वक्तव्य देना चाहिए.

संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल ने आश्वासन दिया कि वह इस मामले पर विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से बात करेंगे और इसके बाद ही सरकार कोई वक्तव्य देगी.

बंसल के इस आश्वासन से सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और वह अध्यक्ष के आसन के नजदीक पहुँच कर नारे लगाने लगे और उन्हें सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

प्रभाकरण के पुत्र के शव का वीडियो

इस बीच एक वृत्त चित्र निर्माता ने दावा किया है कि उसके पास एक ऐसा फुटेज है जिसमें एलटीटीई के सुप्रीमो रहे प्रभाकरण के 12 वर्षीय पुत्र के गोलियों से छलनी शरीर को दिखाया गया है.

इस वृत्त चित्र को बुधवार को चैनल4 के एक कार्यक्रम में दिखाया जाएगा. इस वीडियो की प्रमाणिकता पर अभी एक राय नहीं बन पाई है.

भारत में श्रीलंका के उच्चायुक्त प्रसाद करियावसम ने फिल्म निर्माता द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया है.

उनका कहना है कि श्रीलंका की सरकार चैनल-4 से पहले ही अपना विरोध दर्ज कर चुकी है.

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