कैंप पर नियंत्रण को लेकर माओवादी बँटे

Image caption सेवानिवृत्ति के तहत कैंप में चेक लेते हुए माओवादी छापामार

नेपाल में माओवादियों के कैंपों पर नेपाली सेना के नियंत्रण को माओवादियों के एक गुट ने आत्मसमर्पण करार दिया है.

नेपाल में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मंगलवार को नेपाली सेना ने माओवादी छापामारों के लगभग 15 कैंपों को अपने नियंत्रण में ले लिया था.

लेकिन माओवादी नेता बाबूराम भट्टाराई के नेतृत्व वाली नेपाली सरकार के इस फैसले का माओवादी पार्टी के उपाध्यक्ष मोहन वैद्य ने कड़ा विरोध किया है.

मोहन वैद्य गुट के एक प्रमुख नेता और पार्टी के सचिव सीपी गजुरेल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि समायोजन के नाम पर नेपाली सेना ने जिस तरह से माओवादी कैंपों को अपने नियंत्रण में ले लिया है वे ऐसा है जैसे बाहर से आकर किसी ने उन पर कब्ज़ा कर लिया है.

सीपी गजुरेल ने इसके लिए सीधे तौर पर पार्टी के चेयरमैन पुष्प कमल दाहाल प्रचंड और मौजूदा प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई को जिम्मेदार ठहराया है.

विश्वासघात

गजुरेल ने बातचीत के दौरान कहा, ''इन दोनों (प्रचंड और भट्टाराई) ने आत्मसमर्पण करके हथियार और माओवादी छापामारों को नेपाली सेना को सौंप दिया है. ये तो शांति समझौते के तहत उन लोगों ने जो हस्ताक्षर किए थे उनके मुताबिक भी नहीं है. ये नेपाली क्रांति के साथ एक बड़ा विश्वासघात है.''

लेकिन पार्टी के चेयरमैन और प्रधानमंत्री पर इतने गंभीर आरोप लगाने का मतलब कहीं ये तो नहीं कि माओवादी पार्टी टूट के कगार पर आ गई है, ये सवाल पूछे जाने पर गजुरेल का कहना था, ''हमलोगों का पार्टी से अलग होने का कोई इरादा नहीं है. बल्कि जिन्होंने क्रांति का परित्याग किया है, जिन्होने परिवर्तन का परित्याग किया है और जिन्होने आत्मसमर्पण किया है उनको इस पार्टी में नही रहना चाहिए.''

गजुरेल ने दावा किया कि राज्य और जिले के स्तर पर मोहन वैद्य गुट के समर्थक ही बहुमत में हैं और सेना समायोजन के नाम पर 'आत्मसमर्पण' करना पार्टी के किसी निकाय का फैसला नही है.

आगे की कार्रवाई के बारे में गजुरेल ने कहा कि उनका गुट जन संविधान के पक्ष में एक देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान चला रहा है.

गजुरेल के अनुसार माओवादी छापामारों का सम्मानजनक ढंग से नेपाली सेना में समायोजन करना शांति प्रक्रिया का आधारभूत चीज है लेकिन प्रचंड और बाबूराम भट्टाराई ने उसे छोड़ दिया है और मोहन वैद्य गुट के लोग उसको लेकर चल रहे हैं.

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Image caption सेना समायोजन विशेष समिति की बैठक

इस बीच मंगलवार की कार्रवाई के बारे में बीबीसी से बातचीत के दौरान नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रमिंद्र छेत्री ने कहा कि सेना ने शांतिपूर्वक तरीके से माओवादी कैंपों को अपने नियंत्रण में ले लिया और किसी तरह की कोई दिक्कत पेश नहीं आई.

जनरल छेत्री के अनुसार फिलहाल सेना को माओवादी कैंपों को अपने नियंत्रण में लेने, वहां रखे हथियार को अपने कब्ज़े में करने और कैंपों को सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए गए हैं जिनका सेना ने पालन किया है.

निर्देश

उनके अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए बुधवार को सेना समायोजन विशेष समिति की बैठक होने वाली है और सरकार के निर्देशानुसार सेना अपना काम करेगी.

गौरतलब है कि फरवरी 2012 में हुए पुनर्वर्गीकरण समझौते के अनुसार लगभग नौ हजार माओवादी छापामारों ने नेपाली सेना में समायोजन का फैसला किया था जबकि सात हजार छापामारों ने 'स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पैकेज' के तहत माओवादी कैंप छोड़ दिया था.

नेपाल में संविधान लिखने का काम पूरा करने की अंतिम तारीख 27 मई, 2012 है और विपक्षी पार्टियों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक माओवादी छापामारों का नेपाली सेना में समायोजन का काम पूरा नही हो जाता वे संविधान लिखने के काम में सहयोग नहीं करेंगे.

इसी के कारण बाबूराम भट्टाराई की सरकार ने मंगलवार को सेना को सभी माओवादी कैंपों को अपने नियंत्रण में लेने के निर्देश दिए थे.

लेकिन समझौते के तहत अधिकतम 6500 माओवादी छापामारों को ही नेपाली सेना में समायोजित किया जासकेगा जबकि इस समय कुल नौ हज़ार सात सौ माओवादी छापामार उन कैंपों में मौजूद हैं.

ऐसी स्थिति में चयन की प्रक्रिया तय करना और बाकी लोगों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पैकेज के तहत आर्थिक सहायता लेकर कैप छोड़ने के लिए तैयार करना एक कठिन काम है.

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