अफगानिस्तान से अमरीकी साजो सामान भी ले जाएँगे

Image caption कुशामोंद में अमरीकी पोस्ट को हटाया जा रहा है

पूर्वी अफगानिस्तान के पकतिका सूबे से एक अमरीकी छावनी जैसे गहरे रेगिस्तान में विलीन हो रही है.

कुशामोंद में इस छावनी को हटाया जा रहा है. अफगानिस्तान में अब तक हटाए गए अमरीकी छावनियों में ये सबसे बड़ी छावनी है.

हालांकि अमरीकी सैनिक यहां से हट रहे हैं लेकिन इस नाके को अफगान सैनिकों के हवाले नहीं किया जाएगा क्योंकि वो इसे चलाने के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं.

विशालकाय बख्तरबंद गाड़ियों को ट्रकों में लादा जा रहा है. लगभग 70, 000 गाड़ियों को अमरीका वापस भेजा जाएगा और अफगान सैनिकों के पास सिर्फ कुछ हल्की और सस्ती गाड़ियां रह जाएंगी.

मुश्किल

दरअसल आज कई अफगान सैनिक शिक्षित तो हो गए हैं, लेकिन सिर्फ प्राइमरी क्लास तक. इन मुश्किल मशीनों को चलाने के लिए इंजीनियरिंग के दिशा निर्देश वाली किताब अफगान सैनिक पढ़ नहीं सकते. इसलिए ज्यादातर मशीनें वापस भेजी जा रही हैं.

सैनिकों को अपनी गश्त छोड़ इन मशीनों को खोलकर उन्हें पैक करना पड़ रहा है.

नाके के कमांडिग ऑफिसर कैप्टेन जाइल्स राइट कहते हैं, "इस जमीन को खोना दुख की बात है लेकिन मुझे भरोसा है कि इन मशीनों के जाने के बाद भी हम उतने ही कारगर रहेंगे जितना पहले थे."

लेकिन कुछ अधिकारियों का कहना है कि नाकों का हटाना उनके ध्यान को बांटता है. उनका कहना है कि आप ऐसा नहीं कर सकते कि युद्ध भी कर रहे हों और उसके साथ ही सेना को हटा भी रहे हों.

जोड़ी में दरार

Image caption इस तरह की हजारों बख्तरबंद गाड़ियां अमरीका वापस जाएंगी

अफगानिस्तान और नेटो के रिश्ते पिछले कुछ महीने बेहद मुश्किल भरे रहे हैं.

नेटो सैनिकों का तालिबान के मरे हुए लड़ाकों के साथ तस्वीर का हाल ही में बाहर आना रिश्तों की दरार को और भी बढ़ा देता है.

वरिष्ठ कमांडर और कूटनीतिज्ञ कहते हैं कि इससे ज्यादा खराब रिश्ता पहले कभी नहीं रहा. पश्चिमी देश राष्ट्रपति करजई पर से भरोसा खो चुके हैं.

इसी हफ्ते काबुल में तालिबान का हमला इस बात का इशारा है कि तालिबान हारने के बजाए पहले से ज्यादा तैयार हो गए हैं.

इस लड़ाई की शुरुआत एक सुरक्षित और बेहतर अफगानिस्तान के लक्ष्य के साथ की गई थी. लेकिन 11 साल बाद उम्मीद और उत्साह दोनों ही लगातार बुझ रहे हैं.

शांति अभी दूर

नेटों के वरिष्ठ अधिकारी सर साइमन गास का कहना है कि शांति का लक्ष्य अभी हासिल होने से बहुत दूर है.

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि काबुल को पूरी तरह से सुरक्षित बनाना कभी भी संभव होगा. हमने इस तरह के हमले पहले भी देखे हैं और दुर्भाग्यवश आगे भी देखते रहेंगे."

हालांकि पहले के मुकाबले तालिबान के हमलों में कमी आई है लेकिन लड़ाई और मुश्किल होती जा रही है. तालिबान चरमपंथी देख रहे हैं कि विपक्षी सेना बल में लगातार कमी आ रही है.

इस साल सितंबर तक 30, 000 अमरीकी सैनिक वापस लौट जाएंगे. साल के अंत तक 500 ब्रितानी सैनिक भी घर लौटेंगे. इनकी जगह अफगान सैनिक लेंगे.

ब्रसेल्स में नेटो के विदेश और रक्षा मंत्री शिकागो शिखर वार्ता की तैयारी की है, जिसमें वर्ष 2014 के बाद अफगानिस्तान में सैनिकों के लिए जरूरी फंड पर चर्चा की जाएगी.

घटती उम्मीद

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Image caption सितंबर तक 30000 अमरीकी सैनिक घर लौटेंगे

लेकिन पकतिका में अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि अफगान सेना, पुलिस और खुफिया तंत्र में आपसी सामंजस्य की कमी है. विदेशी सैनिकों के जाने के बाद उन्हें लड़ाई संभालना भारी पड़ सकता है

अफगान सैनिक महसूस कर रहे हैं कि अमरीका ने इस लड़ाई में उनसे पीठ मोड़ ली है.

अफगानिस्तान में नेटो की सफलता की योजना इस बात पर निर्भर है कि वर्ष 2014 तक वहां एक स्थिर और भरोसेमंद सरकार बन जाएगी और तालिबान इतने कमजोर हो जाएंगे कि वो शांति वार्ता के लिए मजबूर होंगे.

लेकिन ऐसा शायद बिल्कुल नहीं होगा. बल्कि ये लड़ाई और गहरी होने की आशंका है. विदेशी सैनिकों को तालिबान से लड़ना है, अपनी संख्या घटानी है और अफगान सैनिकों को प्रशिक्षित भी करना है. लेकिन तालिबान को सिर्फ लड़ना है.

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