बाल विवाह से बचाता है 12 वर्षीय बालक !

 सोमवार, 23 अप्रैल, 2012 को 05:04 IST तक के समाचार

भारत समेत कई एशियाई देशों में बाल विवाह आज भी समस्या बनी हुई है. बांग्लादेश में बाल विवाह की दर विश्व में सबसे ज्यादा है.

बांग्लादेश में 20 फीसदी लड़कियों की 15वें जन्मदिन से पहले ही शादी हो जाती है जबकि कानूनी तौर पर शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल है. ऐसा क्यों?

देश में गैर सरकारी संस्था प्लैन इंटरनेशनल की निदेशक मिरना मिंग मिंग इवोरा कहती हैं, “ये नई तरह की दास प्रथा है. यहाँ लड़कियाँ बोझ हैं, यहाँ की संस्कृति में लड़कियाँ पैसा नहीं कमाती. जिसका मतलब है कि वे आर्थिक तौर पर पूरी तरह से अपने परिवार पर निर्भर रहती हैं. परिवारवाले ही उनके लिए दहेज देते हैं. दहेज देने के लिए गरीब परिवार के लोगों की जीवन भर की कमाई चली जाती है. कम उम्र में लड़की की शादी करने पर दहेज कम देना पड़ता है. लड़की को आसानी से शादी के लिए लोग पसंद कर सकते हैं.”

मिरना कई बालिका वधुओं से मिल चुकी हैं जो उन्हें अकसर बताती हैं कि उनका बचपन कहीं खो गया है. यहाँ ऐसी बच्चियाँ की कहानी है जो बाल विवाह के परिणाम भुगत रही हैं.

'मेरे लिए दुआ कीजिए'

दबी हुई सी आवाज में पॉपी कहती है, “ये एक घृणित बीमारी है, मुझसे बदबू बर्दाशत नहीं होती.”

ये लड़की ढाका के एक अस्पताल में है. दीवारों पर कॉकरोच हैं, पास में एक ही बिस्तर पर दो महिलाएँ सो रही हैं जिनका ऑपरेशन हुआ है.

गंभीर आंतरिक चोट के कारण अब शौच आदी पर पॉपी का जोर नहीं चलता. ये जख्म बहुत कम उम्र में जन्म देने और उचित इलाज न होने पर होते हैं.

पॉपी कहती है, “मैं कभी कभी रोती हूँ, और क्या कर सकती हूँ.”

नर्सों को भी नहीं पता कि पॉपी की उम्र क्या है. उन्हें लगता है कि वो 12 साल की होगी पर पॉपी कुछ नहीं बताती.

पॉपी की शादी जबरन उससे 10 साल बड़े पुरुष से कराई गई थी. वो गर्भवती हो गई पर बच्चा मर गया.

वो बताती है, “वो मेरे पेट में ही मर गया, काटना पड़ा था.”

पॉपी क्लिनिक में अकेले ही आई थी. बीमारी के कारण उसके पति ने पॉपी को छोड़ दिया है. पॉपी जैसी कई और लड़कियाँ और महिलाएँ हैं.

मैं उससे पूछता हूँ कि क्या वो दोबारा शादी करेगी. पॉपी ने कहा, “मैं अपनी उम्र की दूसरी लड़कियों को कहती हूँ कि तुम्हे शादी नहीं करनी चाहिए. अगर करोगी तो यही हालत होगी.”

जब हम जाने लगे तो पॉपी ने कहा, “कृप्या मेरे लिए दुआ कीजिए कि मैं ठीक हो जाऊँ.”

'हम जिंदगियाँ बचा रहे हैं'

पीली कमीज में ओली बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाता है

“मैं ये काम इसलिए करता हूँ क्योंकि मैं कई माता-पिता के चेहरों पर मुस्कुराहट बिखेरना चाहता हूँ.”….कहते हुए ओली अहमद हसता है.

ओली एक कार्यकर्ता है जो ढाका में झुग्गियों में जाता है और बड़े बुजुर्गों को समझाता है कि उन्हें कम उम्र में बच्चियों की शादी नहीं करनी चाहिए. उसकी उम्र पॉपी जितनी है-केवल 12 साल.

वो बताता है, “मैं एक लड़की को जानता था जो मेरी बड़ी बहन जैसी थी लेकिन उसकी जबरन शादी कर दी गई और वो कभी वापस नहीं आई. माँ-बाप लड़कियों की शादी जल्दी कर तो देते हैं, उन्हें अपराधबोध भी होता है पर उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनकी बच्चियों के साथ बाद में हुआ क्या.”

"मैं एक लड़की को जानता था जो मेरी बड़ी बहन जैसी थी लेकिन उसकी जबरन शादी कर दी गई और वो कभी वापस नहीं आई. माँ-बाप लड़कियों की शादी जल्दी कर तो देते हैं, उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनकी बच्चियों के साथ बाद में हुआ क्या."

ओली

बाल विवाह के किस्से देखने के बाद ओली ने प्लैन इंटरनेशनल संस्था से संपर्क किया जो पहले से ही झुग्गियों में काम कर रही थी.

ओली ने गैर सरकारी संस्था को बताया कि वो बच्चों का एक गुट बनाना चाहता है ताकि बाल विवाह की प्रथा को रोकने का प्रयास किया जा सके.

अब वो अपने दोस्तों के साथ लोगों के घर घर जाता है, माता-पिता को समझाता है, कभी डाँटता है तो कभी थोड़ा बहुत चेताता भी है.

एक घर में जाकर तो वो तो ये माँग करता है कि वहाँ बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र क्यों नहीं है.

फिर फौरन ही वे बच्ची का पंजीकरण कराते हैं और पिता को चेताते हैं कि उन पर नजर रहेगी.

ओली कहता है, “हमें लगता है कि हम बड़ों से बेहतर काम कर रहे हैं, बड़ों को लगता है कि हम बहुत छोटे हैं लेकिन हमें बहुत कुछ पता है...हममें बड़ों से ज्यादा जोश है.”

गैर सरकारी संस्था के एक कार्यकर्ता कहते हैं कि जब से बच्चों ने काम करना शुरु किया है इलाके में बाल विवाह में 50 फीसदी गिरावट आई है.

ओली कहता है, “मुझे अच्छा लगता है कि मैने जो काम किया उस वजह से एक लड़की की जान बच गई.”

'उससे प्यार करती हूँ, इसलिए शादी करवा रही हूँ'

तेरह साल की जेमी को खेलना पसंद है. जब हम उससे मिलने गए थे तो छह दिन में उसकी शादी होने वाली थी. जेमी की माँ ने दुल्हा और शादी की तारीख तय की है.

वो ढाका से छह घंटे की दूरी पर एक गाँव में रहती है. हम उस तक एक कार्यकर्ता के जरिए पहुँचे.

जब हमने उससे पूछा कि क्या वो शादी को लेकर उत्साहित है तो वो जमीन की ओर देखते हुए बोली, “ज्यादा नहीं, नहीं.”

जेमी बहुत छोटी है और शर्मीली भी. उसके हाथों पर तितलियों के स्टिकर चिपके हुए हैं.

बेटी की शादी पर माँ कहती हैं, “मुझे अभी जेमी की शादी करनी होगी क्योंकि अभी मुझे दहेज नहीं देना पड़ेगा. अगर जेमी बड़ी हो गई तो पैसे लगेंगे. मुझे कोई डर नहीं है. उसकी शादी मेरी बहन के बेटे के साथ हो रही है. लड़कियों तो कभी नहीं कहतीं कि उन्हें शादी करनी है.”

जेमी की माँ को याद दिलाया जाता है कि ये कानून के खिलाफ है. जब स्थानीय प्रशासन और एक एनजीओ के लोग शादी रुकवाने आते हैं तो माँ उनसे बहस करती है.

वो कहती है, “हमारे परिवार के पास जेमी को स्कूल भेजने के पैसे नहीं है. अगर वो कुँवारी रही तो लोग उसके बारे में बुरी बुरी बातें करेंगे. मैं उसकी शादी इसलिए कर रही हूँ क्योंकि मैं उससे प्यार करती हूँ.”

लेकिन अधिकारी माँ से कहते हैं कि अगर उसने बच्ची की शादी की तो उसे सजा होगी जिस पर वो रोने लगती है.

फिर माँ पड़ोसियों के बीच घोषणा करती है कि शादी रद्द कर दी गई है. साथ ही कहतीं है—मुझे एहसास नहीं था कि ये गलत है.

जेमी ये सब सुनकर मुस्कुराती है और आखिर में कहती है- मुझे लगता है कि जो कुछ हुआ अच्छा ही हुआ.

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