शपथ पर आपत्ति, सू ची का दल संसद सत्र में भाग नहीं लेगा

 सोमवार, 23 अप्रैल, 2012 को 02:00 IST तक के समाचार

आंग सान सू ची की पार्टी ने 1990 के बाद पहली बार इस वर्ष अप्रैल में चुनाव में हिस्सा लिया

लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची की पार्टी सोमवार को शुरु हो रहे बर्मा के संसद सत्र में भाग नहीं लेगी क्योंकि उसे शपथ लेने की शब्दावली पर आपत्ति है.

अप्रैल में हुए उपचुनावों में सू ची समेत उनकी पार्टी, नैश्नल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के 43 सासंद चुने गए थे.

इन सभी का आग्रह है कि शपथ ग्रहण करते हुए वे संविधान की 'रक्षा' की बजाय संविधान का 'आदर' करने की शपथ लेना चाहते हैं. 'रक्षा' शब्द का इस्तेमाल उन्हें अलोकतांत्रिक लगता है.

बीबीसी की बर्मीस सेवा से विशेष बातचीत में एनएलडी के प्रवक्ता और अप्रैल के उपचुनावों में सांसद चुने गए ओन चांग ने कहा, “हम संसद सत्र में हिस्सा नहीं लेंगे, जब शपथ ग्रहण के लिए पढ़ी जाने वाली शब्दावली को बदला जाएगा, तभी हम संसद की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे.”

सेना का आधिपत्य

बर्मा का संविधान, अब तक सीधे सत्ता चलाने वाले सैन्य शासकों ने तैयार किया था और इसे वर्ष 2008 में लागू किया गया था.

इसके तहत, संसद के दोनों सदनों और राज्यों की विधान परिषदों में 25 फीसदी सीटें सेना के लिए आरक्षित की गई हैं.

"हम संसद सत्र में हिस्सा नहीं लेंगे, जब शपथ ग्रहण के लिए पढ़ी जाने वाली शब्दावली को बदला जाएगा, तभी हम संसद की कार्रवाई में हिस्सा ले सकेंगे"

ओन चांग, प्रवक्ता, एनएलडी

करीब 50 वर्षों तक सैन्य शासन के अधीन रहे बर्मा में पिछले वर्ष नागरिक सरकार ने सत्ता संभाली और तभी से देश में राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की शुरुआत हुई.

इन आम चुनावों के बाद भी सेना और उसके प्रभाव में चलने वाली पार्टी, यूनियन सॉलिडैरिटी ऐन्ड डेवलपमेंट पार्टी, संसद की 80 फीसदी सीटों पर काबिज है.

चुनाव कानूनों को अन्यायपूर्ण बताते हुए सू ची की पार्टी ने इन आम चुनावों का बहिष्कार किया था.

सैद्धांतिक फैसला

बैंगकॉक में मौजूद बीबीसी संवाददाता रेचल हार्वे के मुताबिक एनएलडी ने अपने सिद्धांतों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए ये फैसला लिया है.

सू ची लंबे समय से ये कहती आई हैं कि संविधान अलोकतांत्रिक है क्योंकि वो ये सुनिश्चित करता है कि बर्मा के शासन में सेना केंद्रीय भूमिका निभाए.

हार्वे के मुताबिक बर्मा की संसद में सेना के समर्थन वाली पार्टी का प्रभुत्व होने की वजह से बदलाव ला पाना बहुत मुश्किल होगा.

हालांकि ये भी सही है कि उपचुनावों में एनएलडी ने तभी हिस्सा लिया था जब नामांकन के कानून की शब्दावली में भी ऐसा ही बदलाव किया गया.

एनएलडी ने वर्ष 1990 के बाद पहली बार चुनाव लड़े हैं. एनएलडी का ये ऐलान ऐसे समय में आया है जब जापान ने बर्मा का लगभग 3.7 अरब डॉलर का कर्ज माफ करने की घोषणा की है.

इससे पहले अमरीका और ऑस्ट्रेलिया ने बर्मा में हो रहे राजनीतिक सुधारों के चलते उस पर लगाई गई आर्थिक पाबंदियों में ढील देने की घोषणा की थी.

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