बांग्ला नववर्ष को गैर-इस्लामी बताया

 रविवार, 20 मई, 2012 को 16:04 IST तक के समाचार
बैशाखी मेला

ब्रिटेन में रहने वाले बांग्लादेशी पिछले तेरह साल से लंदन के ब्रिक लेन इलाके में बंगाली नववर्ष मनाने के लिए बैशाखी मेले का आयोजन कर रहे हैं.

ब्रिटेन में रहने वाला बांग्लादेशी समुदाय हर साल बांग्ला नव वर्ष मनाने के लिए बैशाखी मेले का आयोजन करते हैं. पिछले तेरह साल से ये मेला पूर्वी लंदन के ब्रिक लेन इलाके में आयोजित किया जा रहा है.

बैशाखी मेला यूरोप का सबसे बड़ा एशियाई संगीत और सांस्कृतिक मेला है. इस साल 20 मई को होने वाले इस मेले का एक मुख्याकर्षण ब्रिटिश एशियन गायक एश किंग हैं जो बॉलीवुड फिल्मों में भी कुछ हिट गाने गा चुके हैं.

एश किंग कहते हैं, “मेरी जड़ें बंगाली हैं और मैं पूर्वी लंदन में रहने वाले बंगाली समुदाय के साथ बैशाखी मेला मनाने को लेकर उत्साहित हूं. इस बार मैं अपने सभी बॉलीवुड गाने गाउंगा जैसे आई लव यू, टी एमो और आंटी जी.”

एश किंग और ममज़ी, जुनाई काडेन, बोनाफाइड जैसे कलाकारों के अलावा इस बार मेले में बांग्लादेश के लोक कलाकार एसआई टुटुल भी शिरकत करेंगे. संगीत के कार्यक्रम के साथ ही मेले में विभिन्न कला समूह और नर्तक भी हिस्सा ले रहे हैं और खाने-पीने के साथ ही कई और गतिविधियां भी हो रही हैं.

व्यापार को बढ़ावा

इतना ही नहीं, ब्रिक लेन बैशाखी मेले के चौदह साल के इतिहास में पहली बार स्थानीय व्यवसायों के लिए व्यापार मेला हुआ है. इस व्यापार मेला का आयोजन कराने वाले तारिक राणा चौधरी बैशाखी मेला ट्रस्ट के प्रबंधकों में से एक हैं.

"हमारी जैसे स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश में किसी भी आयोजन या चीज़ का बहिष्कार करने से कुछ हासिल नहीं होता. अगर ऐसे लोग हैं जिन्हें मेला ठीक नहीं लगता तो उन्हें इसका विकल्प सुझाना चाहिए ताकि जो लोग मेले में आना चाहते हैं वो खुद फैसला कर सकें. मेले में नहीं जाना परिपक्व विकल्प नहीं है."

अजमल मसरूर, लंदन के इमाम

तारिक कहते हैं, “बैशाखी मेला समुदाय ट्रस्ट समुदाय के लिए कुछ करना चाहता है. ट्रस्ट बांग्लादेशी व्यापारियों और ब्रितानी व्यापारियों के बीच संबंध स्थापित करना चाहता है. हमें बांग्लादेशी कंपनियों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. वो यहां आ रही हैं और ब्रितानी खरीदारों से सीधे संपर्क स्थापित करना चाहती हैं.”

लेकिन इस साल मेले के आयोजन पर कुछ स्थानीय मुस्लिम गुटों ने सवाल उठाए हैं. इन गुटों का मानना है कि ये मेला ग़ैर-इस्लामी है.

समुदाय के एक नेता महबूब मामून आलम पूर्वी लंदन की एक मस्जिद से हैं. वो कहते हैं, “इस मेले में जो गतिविधियां होती हैं वो ग़ैर-इस्लामी हैं.ये युवाओं को नाचने-गाने और लड़के-लड़कियों को एक-दूसरे से मिलने-जुलने के लिए प्रोत्साहित करती हैं. हम एक दल बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो लोगों को इस तरह के मेलों का बहिष्कार करने की सलाह देगा. इनसे समुदाय का कुछ भला नहीं होता.”

ब्रिक लेन के कुछ निवासियों ने भी बैशाखी मेले को ग़ैर-इस्लामी बताते हुए कहा है कि वो इसमें हिस्सा नहीं लेंगे.

‘बहिष्कार विकल्प नहीं’

पूर्वी लंदन का ब्रिक लेन इलाका

कुछ मुस्लिम गुट इस बार बैशाखी मेला का बहिष्कार करने की बात कर रहे हैं.

लेकिन लंदन के इमाम अजमल मसरूर मानते हैं कि मेले का बहिष्कार करना इसका समाधान नहीं है.

अजमल मसरूर का कहना है, “हमारे जैसे स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश में किसी भी आयोजन या चीज़ का बहिष्कार करने से कुछ हासिल नहीं होता. अगर ऐसे लोग हैं जिन्हें मेला ठीक नहीं लगता तो उन्हें इसका विकल्प सुझाना चाहिए ताकि जो लोग मेले में आना चाहते हैं वो खुद फैसला कर सकें. मेले में नहीं जाना परिपक्व विकल्प नहीं है.”

बैशाखी मेले ने हमेशा से ही देश भर से हज़ारों लोगों को आकर्षित किया है. बांग्लादेश के बाहर ये अपनी तरह का सबसे बड़ा आयोजन है. और इस विवाद के बावजूद इस साल भी हज़ारों की संख्या में मेले में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है.

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