राजपक्षे का तमिल क्षेत्रों से सेना हटाने से इनकार

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने तमिल विद्रोहियों के साथ हुए युद्ध वाले इलाकों से सेना हटाने की अंतरराष्ट्रीय माँगों को नकार दिया है.

उन्होंने तीन दशक लंबे गृहयुद्ध के खत्म होने की तीसरी बरसी पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि वे उत्तरी श्रीलंका में स्थित सैन्य शिविरों को नहीं हटा सकते क्योंकि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा कमजोर होगी.

राजपक्षे ने कोलंबो के एक सैन्य परेड ग्राउंड में दिए गए अपने भाषण में कहा कि देश से बाहर रहनेवाले तमिल विद्रोही अभी भी सक्रिय हैं.

उन्होंने कहा,”ये बात छिपी नहीं है कि एलटीटीई नेता बाहर से खुलकर गतिविधियाँ चला रहे हैं.”

राजपक्षे ने सेना हटाने की माँग के बारे में कहा,”कुछ लोग चिल्लाए जा रहे हैं – कैंप हटाओ, कैंप हटाओ. मगर ये कैंप किसी और देश में नहीं हैं. ऐसे कैंप हमारे देश में दूसरी जगहों पर भी हैं."

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने ये टिप्पणियाँ अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की श्रीलंका के विदेश मंत्री को कही गई बातों के बाद सामने की हैं.

हिलेरी क्लिंटन ने श्रीलंकाई विदेश मंत्री से कहा था कि उन्हें पूर्व युद्ध क्षेत्रों को सेनामुक्त करना चाहिए और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए और प्रयास करना चाहिए.

जवाब

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने अपने भाषण में ऐसे मंतव्यों को भी खारिज कर दिया जिनमें ये कहने का प्रयास किया जा रहा था कि श्रीलंकाई सेना उत्तर के तमिल बहुल इलाकों के प्रशासन में दखल दे रही है.

राजपक्षे ने कहा,"ईलमवादी चरमपंथी जो कई दशकों से हासिल नहीं कर सके वे उसे अब दूसरे माध्यमों से पाने की कोशिश कर रहे हैं."

श्रीलंका पर युद्ध के दौरान हुए युद्धापराधों की जाँच के लिए भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ रहा है मगर राजपक्षे ने अपने भाषण में स्पष्ट कर दिया कि वे उनके सामने नहीं झुकेंगे.

उन्होंने कहा,"संयुक्त राष्ट्र सदस्य होने के नाते हम दूसरे देशों के बराबर हैं. हमारे सभी देशों के साथ अच्छे संबंध हैं और हम अपनी समस्याएँ खुद सुलझा सकते हैं."

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सरकारों को युद्ध के पश्चात श्रीलंका सरकार के अपने लोगों के लिए किए जा रहे कामों की सराहना करनी चाहिए और विकास तेज करने में मदद करनी चाहिए.

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में शनिवार को ‘विजय दिवस’ मनाया गया जिसमें सेना के तीनों बलों ने अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया.

लड़ाई खत्म होने के बाद ये अभी तक का सबसे बड़ा सैन्य प्रदर्शन था.

संबंधित समाचार