अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी धन की बर्बादी

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Image caption अमरीकी सेना 2014 तक अफ़ग़ानिस्तान से चली जाएगी

अमरीका द्वारा अफ़ग़ानिस्तान में निर्माण कार्यों में लगाए जाने वाले धन में से करोड़ों डॉलर की बर्बादी हुई है.

यह ख़ुलासा अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी निर्माण कार्य संबंधी प्रोजेक्ट्स की देखरेख करने वाले विशेष इंस्पेक्टर जनरल ने अपनी रिपोर्ट में किया है.

यह रिपोर्ट अमरीकी संसद को पेश की गई है.

विशेष इंस्पेक्टर जनरल जॉन सोपको ने रिपोर्ट में कहा है कि अमरीकी निर्माण कार्यों की परियोजनाओं में योजना, समन्वय और योजना को लागू करने के तरीक़े सभी कमज़ोर थे.

सन 2002 से ही अमरीकी प्रशासन की यह कोशिश रही है कि अफ़ग़ानिस्तान में निर्माण कार्यों के ज़रिए आम अफ़ग़ान लोगों के दिल जीते जाएं. इन निर्माण कार्यों के ज़रिए अमरीकी सरकार की कोशिश रही है कि अफ़गान लोगों को अफ़ग़ान सरकार का समर्थन करने के लिए राज़ी किया जा सके.

सोमवार को जारी की गई रिपोर्ट में अमरीकी सरकार की इस नीति की भी आलोचना की गई है.

अमरीकी रक्षा और विदेश मंत्रालय की देखरेख में होने वाले इन निर्माण कार्यों के तहत अफ़ग़ानिस्तान में सड़कें, पुल, बिजली घर आदि क्षेत्रों में निर्माण किया जाना था.

लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से बहुत से कार्यक्रम बहुत लंबे समय से चल रहे हैं और अपनी समय सीमा के बाद भी पूरे नहीं हुए हैं. ऐसे कार्यक्रम अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सेना निकलने से पहले पूरे नहीं होंगे और यह तय नहीं है कि अफ़ग़ान सरकार ये कार्यक्रम पूरे करा पाएगी या नहीं.

अमरीका सन 2014 तक अफ़ग़ानिस्तान से अपनी सभी सेना निकालने का एलान पहले ही कर चुका है.

अरबों डॉलर ख़र्च

अमरीका ने पिछले 10 वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान में निर्माण कार्यों पर लगभग 90 अरब डॉलर खर्च किए हैं.

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Image caption कुछ महीने पहले अफ़ग़ानिस्तान की आर्थिक मदद करने वालों का सम्मलेन टोक्यो में हुआ था.

रिपोर्ट का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े ख़र्चे के भी बढ़ने की उम्मीद है.

जॉन सोपको ने इसी महीने विशेष इंस्पेक्टर जनरल का कार्यभार संभाला है.

हर तीन महीने में जारी की जाने वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है, "योजना के अनुसार जारी प्रोजेक्ट्स जिन्हे अफ़ग़ान सरकार पूरा नहीं कर पाएगी, उससे और अधिक समस्या पैदा होगी. जो लक्ष्य बनाए गए और पूरे नहीं किए गए उससे अमरीका और अफ़ग़ान सरकार दोंनो ही जनता का समर्थन खो सकते हैं."

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका द्वारा अफ़ग़ानिस्तान में इस प्रकार बड़े पैमाने पर धन ख़र्च करने से हालात और बिगड़ सकते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार सन 2011 में अमरीका ने जो 40 करोड़ डॉलर निर्माण कार्यों में लगाए उनमें से अधिक्तर ख़राब योजना के कारण बर्बाद हो गए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीकी फ़ौज ने ऐसे ठेके मंज़ूर किए जिसके तहत बनने वाले कई अडडों को प्रयोग में ही नहीं लाया जा सका.

इसी प्रकार कई बिजली घरों का भी निर्माण कार्य पूरा नहीं किया जा सका है.

विशेष इंस्पेक्टर जनरल जॉन सोपको ने कहा कि अमरीका ने अपने इतिहास में किसी अन्य देश में निर्माण कार्यों के लिए इतना धन कभी नहीं ख़र्च किया.

अमरीकी सिनेटर क्लैर मकैस्किल जो अमरीका द्वारा अफ़ग़ानिस्तान में धन लगाए जाने के ख़िलाफ़ रही हैं कहती हैं, "इन निर्माण कार्यों से अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा के हालात में कोई सुधार नहीं आया है. हम इस तरह किसी देश पर पैसे फेंक तो नहीं सकते, और फिर यह उम्मीद भी करें कि इसका नतीजा भी अच्छा होगा."

लेकिन पेंटागन ने इस रिपोर्ट को जल्दबाज़ी में बनाई गई रिपोर्ट कहा है जबकि काबुल स्थित अमरीकी दूतावास ने कहा है कि यह निर्माण कार्य अफ़ग़ानिस्तान के प्रति अमरीका की कटिबद्वता दर्शाते हैं.

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