एड्स: क्यों और कैसे
 
 
 
 
 
एचआईवी रोधी दवाएँ
 
 
एड्स रोधी दवाएँ

 

दवाएँ कैसे काम करती हैं
एचआईवी के महामारी का रूप लेने के साथ ही कई दवाएँ विकसित की गई हैं जो उन लोगों की ज़िंदग़ी को काफ़ी हद तक बढ़ा देती हैं क्योंकि वे उन विषाणुओं की बढ़ोत्तरी को रोक देती हैं. ये दवाएँ रोगियों की सीडीफ़ोरप्लस कोशिकाओं का नष्ट होना धीमा कर देती हैं और इस तरह एड्स भी देर से शुरू होता है. मगर ये अंतिम उपचार नहीं है.

दवाओं के चार प्रमुख वर्ग हैं जो कि एचआईवी के चक्र में अलग-अलग समय पर असर डालते हैं.

1. प्रवेश रोकने वाली:

 
ये एचआईवी वायरस से लगे प्रोटीन को सीडीफ़ोरप्लस कोशिका से जुड़ने और उसमें प्रवेश से रोकती हैं. इनमें से सिर्फ़ एक दवा फ़्यूजिऑन ही अब तक बाज़ार तक आ पाई है.

2. न्यूक्लिओसाइड रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ इनहिबिटर्स:

 
ये वायरस को अपनी जीन्स की प्रतिलिपि या कॉपी बनाने से रोकते हैं.न्यक्लिओसाइड्स से ही मिलकर जीन बने होते हैं. दवाएँ उनकी प्रतिलिपि बनने की प्रक्रिया रोक देती हैं.

3. नॉन- न्यूक्लिओसाइड रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ इनहिबिटर्स:

 
ये भी प्रतिलिपि बनाने की प्रक्रिया पर असर डालती हैं. ये इस प्रक्रिया पर नियंत्रण रखने वाले एंज़ाइमों से लग जाते हैं और इस प्रक्रिया को रोक देते हैं.

4. प्रोटीज़ इनहिबिटर्स:

 
ये दवाएँ प्रोटीज़ एंज़ाइम के साथ मिल जाती हैं जो वायरस के नए तत्वों को इकट्ठा करने में प्रमुख भूमिका अदा करती हैं.

ऐंटीरेट्रोवायरल दवाओं को कुछ और दवाओं के साथ लेना चाहिए. आम तौर पर दो अलग-अलग वर्गों की तीन अलग दवाएँ एक साथ इस्तेमाल की जाती हैं. जैसे-जैसे एचआईवी बढ़ता है वैसे-वैसे कुछ तरह के वायरस उस दवा का प्रतिरोध करने की क्षमता विकसित कर लेते हैं. इसलिए अगर कुछ तरह की दवाएँ इस्तेमाल की जाती रहें तो वे प्रभावी साबित होती हैं.

साइड एफ़ेक्ट्स
आम साइड एफ़ेक्ट्स:

 
उल्टी, सिर दर्द, थकावट, दस्त, पेट दर्द
अन्य साइड एफ़ेक्ट्स:

 
पैंक्रियास या अग्न्याशय का बढ़ना, यकृत और पैंक्रियास को नुक़सान, मुँह की दिक़्क़तें, शरीर का आकार बदलना, खून की कमी, पेशियों में दर्द और कमज़ोरी
 
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