लक्ष्मण ने रोका था ऑस्ट्रेलिया का विजयी रथ

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Image caption वीवीएस लक्ष्मण

भारतीय क्रिकेट टीम कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डंस मैदान में अपनी ही सरज़मीं पर अपना ऐतिहासिक 250वां टेस्ट मैच खेल रही है.

कोलकाता वैसे तो अनेक यादगार क्रिकेट मैचों का गवाह रहा है, लेकिन जब भी बात भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच साल 2001 में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच की होती है तो उसके सामने सारे मैच फीके पड जाते हैं.

तब भारत ने लगातार 16 टेस्ट मैच जीतकर पूरी दुनिया में अपने खेल का डंका बजा रही ऑस्ट्रेलियाई टीम को 171 रन से मात दी थी.

वह भी फॉलोआन का सामना करने के बाद.

उस टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए कप्तान स्टीव वॉ के 110 और सलामी बल्लेबाज़ मैथ्यू हैडन के 97 रनों की मदद से 445 रन बनाए.

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Image caption स्टीव वॉ

जवाब में भारत की पहली पारी केवल 171 रनों पर ढ़ेर हो गई.

भारत को 274 रनों से फॉलोआन का सामना करना पड़ा.

यह मैच का तीसरा दिन था. नम्बर छह पर बल्लेबाज़ी करते हुए वीवीएस लक्ष्मण अंतिम बल्लेबाज़ के रूप में 59 रन बनाकर शेन वॉर्न का शिकार बने थे.

भारतीय टीम के ड्रैसिंग रूम में तनाव का माहौल था.

तभी भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर पूर्व सलामी बल्लेबाज़ चेतन चौहान लक्ष्मण के पास पहुंचे और बोले कि क्या आप नम्बर तीन पर बल्लेबाज़ी करोगे.

जवाब में लक्ष्मण ने कहा कि क्यों नहीं सर.

मैं तो अभी तक अपनी क्रिकेट में इसी नम्बर पर खेलता आया हूं.

दरअसल लक्ष्मण घरेलू क्रिकेट में अपनी टीम हैदराबाद के लिए इसी नम्बर पर खेलते थे.

इसके बाद चेतन चौहान ने टीम के कोच जॉन राइट से बात की.

उनके हॉ कहने के बाद कप्तान सौरव गांगुली को बताया गया.

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Image caption सौरव गांगुवी

इसके बाद ख़ुद चेतन चौहान ने ही राहुल द्रविड़ से कहा कि आप नम्बर तीन पर मत खेलना, लेकिन आप बुरा मत मानना.

उन दिनो राहुल द्रविड़ नम्बर तीन के ज़बरदस्त बल्लेबाज़ थे.

राहुल द्रविड़ ने विनम्रता से कहा कि खेल और टीम के हित में जो होगा मै वहीं करूंगा.

इसके बाद जो कुछ हुआ वह इतिहास बन गया.

वीवीएस लक्ष्मण ने 281 रनों की शानदार पारी खेली.

राहुल द्रविड़ ने भी रन आउट होने से पहले 180 रन बनाए.

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Image caption राहुल द्रविड़

इन दोनों बल्लेबाज़ों के बीच पांचवें विकेट के लिए रिकार्ड 376 रनों की साझेदारी हुई.

भारत ने पांचवे और अंतिम दिन अपनी दूसरी पारी 7 विकेट पर 657 रनों के स्कोर पर समाप्ति धोषित की.

ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 384 रनों का लक्ष्य था लेकिन उसकी पूरी पारी 212 रनों पर सिमट गई.

लक्ष्मण के बाद हरभजन सिंह का जादू चला.

उन्होंने 73 रन पर 6 विकेट लेकर अपनी ज़िंदगी की सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ी की.

हरभजन सिंह ने पहली पारी में हैट्रिक भी बनाई थी.

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Image caption हरभजन सिंह

ऐसा कारनामा करने वाले वह भारत के पहले गेंदबाज़ बने.

उनकी हैट्रिक में रिकी पोंटिग, एडम गिलक्रिस्ट और शेन वॉर्न के विकेट शामिल थे.

इसके साथ ही भारत ने ऑस्ट्रेलिया के उस विश्व विजयी रथ को रोका जो इससे पहले लगातार 16 टेस्ट मैच जीत चुकी थी.

उसमें भारत के ख़िलाफ उसी सिरीज़ में मुंबई में खेले गए पहले टेस्ट मैच में तीन दिनों में ही 10 विकेट से हासिल की गई जीत भी शामिल थी.

चेतन चौहान मानते है कि उसके बाद लक्ष्मण और राहुल द्रविण सचिन तेंदुलकर की छाया से निकल गए.

इसके बाद सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने नए आत्मविश्वास के साथ अपनी नई पहचान बनाई.

वास्तव में लक्ष्मण ने जिस अंदाज़ में पहली पारी में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों का सामना किया उसके बाद चेतन चौहान के मन में विचार आया कि उन्हे नम्बर तीन पर भेजा जाए.

उल्लेखनीय है कि वीवीएस लक्ष्मण की उस पारी को पिछले 50 सालों में टेस्ट क्रिकेट का सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन आंका गया है.

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