बीसीसीआई ने लिखा- नहीं उठा पाएंगे इंग्लैंड टीम का ख़र्च

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Image caption अनुराग ठाकुर और अजय शिर्के (बाएं से दाएं)

इंग्लैंड और भारत के बीच पांच टेस्ट मैचों की सीरीज़ का पहला मैच राजकोट में 9 तारीख़ को होना है. लेकिन सीरीज़ शुरू होने से कुछ दिन पहले बीसीसीआई का यह कहना कि वह इंग्लैंड को भारत में पूर्व निर्धारित सुविधाएं मुहैया नहीं करवा सकता, एक अजीब स्थिति पैदा कर रहा है.

बीसीसीआई सचिव अजय शिर्के ने ख़ुद इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड के ऑपरेशनल मैनेजर फ़िल नील को ख़त लिखा.

उन्होंने अपने ख़त में लिखा कि सुप्रीप कोर्ट द्वारा बोर्ड पर लगाई गई पाबंदियों के कारण बीसीसीआई मेहमान टीम को होटल, यात्रा व अन्य सुविधाओं का भुगतान करने का वादा नहीं किया जा सकता. इसे देखते हुए इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड इन सुविधाओं का भुगतान ख़ुद करने का बंदोबस्त करे.

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Image caption (फ़ाइल फोटो)

अब ऐसी स्थिति को लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन विस्तार से जवाब देते हुए कहते है, "देखा जाए तो मामला काफी गंभीर है. यह बीसीसीआई के सचिव का लिखा आधिकारिक ख़त है. मेरा मानना है कि बीसीसीआई का लोढा समिति और सुप्रीम कोर्ट के बीच तनाव बढ़ गया है."

मेमन ने कहा कि बीसीसीआई एक तरह का माहौल पैदा करना चाहती है, जिससे सुप्रीम कोर्ट मान जाए कि कुछ मामला सहीं नही चल रहा. या फिर जनता में उसकी छवि बदल जाए. दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहता कि वह बीसीसीआई के रोज़ाना के काम में कोई दख़ल दे.

सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है कि बीसीसीआई लोढा समिति की सिफ़ारिशों को पूरी तरह लागू करे और उसके अनुसार समय सीमा निकल चुकी है.

बीसीसीआई ने लगभग एक महीना पहले अपने से जुड़े राज्य संघो को 400 करोड रूपये दिये थे. सुप्रीम कोर्ट ने इसपर सवाल उठाते हुए कहा था कि बीसीसीआई उनसे बिना पूछे पैसा कैसे दे सकते है?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि घरेलू मैचों के अलावा अंतराष्ट्रीय मैचों का आयोजन रूकना नहीं चाहिए. अब अगर यह मामला एक दो दिन में नहीं निबटा को शायद सुप्रीम कोर्ट एक ऑडिटर नियुक्त कर दें.

जहां-जहा इंग्लैंड के मैचों का आयोजन होना है, उस राज्य संघ का भुगतान ख़ुद सुप्रीम कोर्ट करे. यह प्रबंधन के तौर पर एक बड़ी ही कठिन स्थिति होगी.

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Image caption बीसीसीआई का लोगो

लेकिन अभी इस मामले के सुलझने के आसार हैं, क्योंकि अगर इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट संघ को कोई ख़बर मिल जाती, तो वह कोई क़दम उठा लेता. अब क्योंकि पहला टेस्ट मैच शुरू होने में अधिक समय नही है, इसलिए एक दो दिन में फ़ैसला हो ही जाएगा कि सीरीज़ होगी या नही.

अयाज़ मेमन आगे कहते है कि अब इसे इस रूप में भी देखा जा सकता है कि बीसीसीआई ने एक धमकी दी है, जो खोखली भी साबित हो सकती है.

एक तरह से बीसीसीआई यह कह रही है कि अगर उसके रोज़ाना के काम में दखल होगा कि पैसा कहा से आया-कहां खर्च होगा, तो फिर इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ख़ुद ही सब कुछ कर ले. लेकिन कहने की बात कुछ और है और करने की कुछ और.

ख़त बीसीसीआई का है. अगर भारत-इंग्लैंड की यह सीरीज़ नही होती, तो फिर बीसीसीआई की बेइज्ज़ती तो होगी ही. भारतीय क्रिकेट की भी बात ख़राब होगी. इतना ही नही पूरी दुनिया में जो भारत का नाम है, उसे भी बड़ा झटका लगेगा.