भारत की जीत के पीछे है ये तेज़ तर्रार लड़की

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Image caption रियो ओलंपिक में भाग लेने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम

भारतीय महिला हॉकी टीम की सिंगापुर में हुई एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में ख़िताबी जीत के लिए कप्तान वंदना कटारिया की नेतृत्व क्षमता की ख़ासी तारीफ़ हो रही है.

फाइनल में भारत ने चीन को अंतिम समय में किए गए गोल की मदद से 2-1 से मात दी.

इस चैंपियनशिप में भारत और चीन के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया ने हिस्सा लिया.

टूर्नामेंट के लिए जब टीम की कमान वंदना कटारिया को सौंपी गई थी, तो चयनकर्ताओं और हॉकी इंडिया के अलावा शायद ही किसी को भरोसा रहा हो कि वह ख़िताबी जीत के साथ भारत लौटेगी.

इससे पहले भारतीय महिला हॉकी टीम रियो ओलंपिक में सबसे नीचे रही.

हालांकि, टीम को पूरे साल यूरोपीय टीमों के साथ खेलने का अवसर मिला.

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Image caption भारतीय महिला हॉकी टीम

वंदना भारतीय टीम की तेज़-तर्रार फॉरवर्ड में से एक हैं.

वैसे तो टीम में रानी रामपाल के रूप में किसी भी अवसर को गोल में बदल देने वाली खिलाड़ी भी है. लेकिन चयनकर्ताओं ने फॉरवर्ड के रूप में खेलने वाली रानी रामपाल को इस चैंपियनशिप में मिडफील्डर के रूप में खिलाया, ताकि बाकि फॉरवर्ड खिलाडियों को अधिक और तेज़ पास मिल सके.

चयनकर्ताओ का यह दांव काम कर गया.

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Image caption वंदना कटारिया

वंदना पहली बार सुर्खियों में तब आईं, जब भारतीय जूनियर हॉकी टीम ने साल 2013 में जर्मनी में आयोजित हुए जूनियर महिला हॉकी विश्व कप में कांस्य पदक जीता.

वंदना वहां भारत की तरफ से सबसे अधिक गोल करने वाली खिलाड़ी के रूप में उभरी.

उन्होंने पांच गोल किए. वैसे जूनियर विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने वालों में वह तीसरे स्थान पर थी.

इस साल यह किसी भी चैंपियनशिप में भारत की पहली ख़िताबी जीत है.

इस साल भारतीय महिला टीम ने न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड का भी दौरा किया लेकिन वहां कोई दमदार खेल नहीं दिखा सकी.

वंदना भारत के लिए 100 से अधिक अंतराष्ट्रीय मैच खेल चुकी हैं.

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Image caption वंदना कटारिया

उनका सौंवा अंतराष्ट्रीय मैच साल 2014 में ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में था, जब वह कनाडा के खिलाफ खेली.

भारतीय महिला हॉकी टीम ने मॉस्को में साल 1980 में हुए ओलंपिक खेलों के 36 साल बाद रियो ओलंपिक में जगह बनाई.

भारत को रियो तक पहुंचाने में भी वंदना कटारिया का बेहद अहम योगदान रहा.

24 साल की वंदना ने एक खिलाड़ी के रूप में तो उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है, देखना है कि क्या भविष्य में भी उन्हें कप्तान के रूप में बरक़रार रखा जाता है या नही.

एशियन चैंपियनशिप में वंदना ने जिस तरह से टीम के मनोबल को बनाए रखा, उसके बाद उनसे एक कप्तान में रूप में सुनहरे भविष्य की उम्मीद की जा सकती है.

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