उंगली की चोट से भी नहीं टूटा हसीब का हौसला

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भारत के ख़िलाफ़ तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड की हालत बुरी थी. हार का ख़तरा मँडरा रहा था. हार से बचने की उम्मीद भी कम थी.

लेकिन भारत के ख़िलाफ़ इस टेस्ट सिरीज़ से अपना अंतरराष्ट्रीय टेस्ट करियर शुरू करने वाले 19 वर्षीय हसीब हमीद ने हार नहीं मानी.

उंगली में चोट के कारण उन्होंने सलामी बल्लेबाज़ की भूमिका नहीं निभाई. लेकिन जब इंग्लैंड की टीम की हालत ख़राब हो गई, तो हसीब को मैदान पर आना पड़ा.

इंग्लैंड के छह विकेट सिर्फ़ 107 रन पर गिर चुके थे. पिच पर पहुँचे हसीब ने तीन अहम साझेदारियाँ निभाईं.

उन्होंने जो रूट के साथ सातवें विकेट के लिए 45 रनों की साझेदारी की, फिर क्रिस वोक्स के साथ आठवें विकेट के लिए 43 रन जोड़े, तो 10वें विकेट के लिए जेम्स एंडरसन के साथ 41 रनों की भी साझेदारी की.

भारतीय गेंदबाज़ परेशान लगने लगे थे, क्योंकि उन्हें लगा था कि वे 200 रन के अंदर इंग्लैंड को समेट देंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

आख़िरी विकेट को लेकर भारतीय गेंदबाज़ों की परेशानी समय के साथ दिखने लगी थी, लेकिन तभी एंडरसन रन आउट हो गए और हसीब का चेहरा भी उतर गया.

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हसीब ने 59 रनों की नाबाद पारी खेली. भारत ने आठ विकेट से ये टेस्ट जीत लिया. भारत के पास जश्न मानने के कई वजह हैं.

लेकिन हसीब हमीद की हर कोई तारीफ़ कर रहा है. हसीब की पारी की ख़ास बात ये नहीं कि वे टूटी उंगली के बावजूद खेल रहे थे. इस टेस्ट के बाद हसीब ब्रिटेन लौट रहे हैं.

राजकोट टेस्ट से अपना करियर शुरू करने वाले हसीब ने पहले टेस्ट में 31 और 82 रन बनाए थे, जबकि विशाखापट्टनम टेस्ट में उन्होंने 13 और 25 रन बनाए थे.

मोहाली टेस्ट में उन्होंने 9 और 59 रन बनाए. तीन टेस्ट मैचों में हसीब ने 43.80 की औसत से 219 रन बनाए हैं.

सिर्फ़ 19 साल की उम्र में इंग्लैंड की ओर से टेस्ट खेलने वाले हसीब को पहले से ही 'बेबी बॉयकॉट' कहा जा रहा था.

लंकाशायर में माइकल अथर्टन के बाद ऐसा प्रभावशाली सलामी बल्लेबाज़ पहले नहीं पैदा हुआ. लंकाशायर के लिए 1000 रन बनाने वाले वे सबसे युवा खिलाड़ी बने और उन्होंने अथर्टन को पीछे छोड़ दिया.

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