संन्यास से दुनिया को चौंकाने वाले 6 सुपर स्टार

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फार्मूला वन रेसिंग की दुनिया के वर्ल्ड चैंपियन निको रोज़बर्ग ने बीते शुक्रवार को संन्यास लेकर रेसिंग की दुनिया को सकते में डाल दिया.

महज़ 31 साल की उम्र में जर्मन रेसर रोज़बर्ग ने संन्यास लेने का फ़ैसला किया. पिछले रविवार को ही अबूधाबी ग्रां प्री रेस जीतकर उन्होंने वर्ल्ड चैंपियन टाइटिल की होड़ में लुइस हैमिल्टन को पीछे छोड़ दिया था.

इसके बाद रोज़बर्ग और हैमिल्टन के बीच बादशाहत को लेकर होड़ शुरू होती, उससे पहले ही रोज़बर्ग ने खुद को इस रफ़्तार और रोमांच के खेल से दूर करने का फ़ैसला कर लिया.

रोज़बर्ग ने संन्यास की घोषणा के वक्त कहा कि उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा हो गया है और अब उन्हें कुछ भी साबित नहीं करना है. उन्होंने ये भी कहा कि वे अब अपने परिवार के साथ, ख़ासकर छोटी बेटी के साथ वक्त बिताना चाहते हैं.

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हालांकि कुछ विश्लेषक ये भी कह रहे हैं कि हैमिल्टन के बढ़ते दबदबे के चलते ही रोज़बर्ग ने संन्यास लिया लेकिन रोज़बर्ग ने स्पष्ट कहा है कि अगर वे इस सीज़न में वर्ल्ड चैंपियन नहीं बनते तो अगले साल जरूर रेसिंग कोर्स में उतरते.

वैसे खेल की दुनिया में शीर्ष पर रहते हुए संन्यास लेने का उदाहरण बहुत कम ही देखने को मिलता है, बावजूद इसके समय समय पर सुपरस्टार खिलाड़ी संन्यास लेकर खेल की दुनिया को चौंकाते रहे हैं.

रोज़बर्ग जैसी मिसाल पेश करने वाले पांच स्टार खिलाड़ियों पर एक नज़र, जिन्होंने टॉप पर रहते हुए संन्यास ले लिया-

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ब्योन बोर्ग (26 साल): लगातार पांच बार विंबलडन का ख़िताब जीतने वाले बोर्ग ने 1983 में जब टेनिस की दुनिया को अलविदा कहा था, तब लोगों को यकीन नहीं हुआ, क्योंकि बोर्ग तब महज 26 साल के थे.

उन्हें आज भी ऑल टाइम ग्रेटेस्ट खिलाड़ियों में गिना जाता है. पांच बार विंबलडन ख़िताब के अलावा बोर्ग ने पांच बार फ्रेंच ओपन का ग्रैंड स्लैम भी जीता था. हालांकि काफ़ी कोशिशों के बाद भी वे यूएस ओपन का ख़िताब नहीं जीत पाए थे.

1976 से 1980 के बीच वे लगातार चार बार यूएस ओपन फ़ाइनल तक पहुंचे लेकिन ख़िताब जीतने का सपना पूरा नहीं हुआ. बावजूद इसके स्वीडिश खिलाड़ी बोर्ग ने जब संन्यास लिया तब उनका सुनहरा दौर बीता नहीं था.

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रॉकी मैरकियानो (32 साल): रॉकी मैरकियानो चार साल तक वर्ल्ड हैवीवेट मुक्केबाज़ी के चैंपियन रहे. अमरीकी बॉक्सर ने 1956 में जब संन्यास की घोषणा की तो वे महज़ 32 साल के थे. वे तब वर्ल्ड चैंपियन थे और उनके मुक्कों के सामने दूसरे मुक्केबाज़ कमतर साबित हो रहे थे.

उनकी कामयाबी का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने सभी 49 मुक़ाबले जीते थे और 43 में तो उन्होंने सामने वाले को नॉकआउट करके बाहर किया था. जीत में नॉकआउट के इस हिसाब के सामने आज तक कोई नहीं पहुंच पाया है.

अपने करियर में मैरकियानो ने कोई मुक़ाबला नहीं गंवाया था. उन्होंने अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए संन्यास लिया था लेकिन 13 साल बाद एक विमान हादसे में उनकी मौत हो गई थी.

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जस्टिन हेनिन (25 साल): सात बार की ग्रैंड स्लैम विजेता जस्टिन हेनिन ने जब 2008 में टेनिस की दुनिया को अलविदा कहा था तब उनकी उम्र महज 25 साल थी. हेनिन उस वक्त दुनिया की नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी थीं.

हेनिन से पहले और अब तक महिला टेनिस में शीर्ष पर रहते हुए किसी खिलाड़ी ने संन्यास नहीं लिया है. उन्होंने अपने संन्यास की घोषणा के वक्त कहा था कि वे अपने जीवन की छोटी छोटी ख़ुशियों को हासिल करना चाहती हैं.

हालांकि 2004 की ओलंपिक गोल्ड मेडल जीत चुकीं हेनिन ने 20 महीने बाद टेनिस की दुनिया में वापसी की, लेकिन कुछ ही दिनों फिर से संन्यास ले लिया.

लॉरेना ओचो (28 साल): ओचो ने 2010 में जब गोल्फ़ को अलविदा कहा तब वह दुनिया की नंबर एक महिला गोल्फ़र थीं.

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ओचो उस दौर में अपने देश मैक्सिको ही नहीं दुनिया भर में पहचानी जाने वाली स्पोर्ट्स स्टार थीं. उन्होंने अपने करियर में दो मेजर सहित 27 पीजीए टूअर के खिताब जीते.

28 साल की उम्र में उन्होंने खेल से संन्यास इसलिए लिया था क्योंकि वह अपना घर बसाना चाहती थीं.

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ग्रीम स्मिथ (33 साल): स्मिथ को क्रिकेट की दुनिया में सबसे चतुर कप्तानों में आज भी शुमार किया जाता है. महज़ 33 साल की उम्र में उन्होंने 2014 में तब संन्यास ले लिया था, जब किसी को इसकी उम्मीद नहीं थी.

117 टेस्ट मैच में स्मिथ ने 27 शतकों की बदौलत 9265 रन बनाए थे. दस हजार रनों का लालच भी उन्हें टेस्ट क्रिकेट में रोक नहीं पाया था.

वे चाहते तो आराम से 2015 के वर्ल्ड कप तक क्रिकेट खेल सकते थे लेकिन स्मिथ को ख़ुद ऐसा नहीं लगा. एक सिरीज़ में उनका बल्ला नहीं चला और उन्होंने हमेशा के लिए ही बल्ला टांग दिया.

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