क्रिकेट बोर्ड के बड़े-बूढ़ों को कोर्ट आउट करेगा?

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Image caption राजेंद्र मल लोढ़ा

आने वाला सप्ताह बीसीसीआई यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लिए बेहद उथल-पुथल वाला साबित हो सकता है.

पहले बीसीसीआई के हुक्मरानों ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने से मना कर दिया था, अब ख़ुद लोढ़ा समिति ने ही सुप्रीम कोर्ट से माँग कर दी है कि बीसीसीआई के पदाधिकारियों को बर्ख़ास्त कर दे.

लोढ़ा समिति ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया है कि पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई बीसीसीआई को अपनी निगरानी में चलाएँ.

अब सुप्रीम कोर्ट नौ दिसंबर को बीसीसीआई के तमाम पदाधिकारियों को बर्खास्त कर सकती है. अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा?

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बीसीसीआई आज दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है. उसकी बात को आईसीसी तक सुनती है. बीसीसीआई घरेलू क्रिकेट तक खेलने वाले खिलाड़ियो को मोटा पैसा देता है. दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट को आयोजित करने के लिए बीसीसीआई पूरी तरह सक्षम है.

यहां तक कि पूर्व खिलाड़ियो को पेंशन तक देने वाला शायद बीसीसीआई दुनिया का अकेला बोर्ड है. तो क्या इसकी ताक़त ही इसकी कमज़ोरी बन गई है कि सबकी नज़र सीध-सीधे बीसीसीआई और इससे जुडे तमाम राज्य क्रिकेट संघो पर है.

कुछ लोगों को लगता है कि लोढ़ा समिति की सिफ़ारशें लागू होने से बीसीसीआई का सरकारीकरण हो जाएगा लेकिन जाने-माने खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन ऐसा नहीं मानते.

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Image caption बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर

वे कहते हैं, "अगर लोढ़ा समिति के सुझावों को देखें तो उसमें सरकारी दखलंदाज़ी बिल्कुल नहीं है. यह तो पूरा मामला बोर्ड में चल रही धांधली, मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग और पैसे के लेन-देन में अनियमितता का है. लोढ़ा समिति तो यह कह रही है कि अगर उसके सुझाव माने गए तो बोर्ड में पारदर्शिता आएगी, कामकाज़ सुचारू रूप से चलेगा. सरकारीकरण तो तब होता जब वह कहते कि बीसीसीआई को कोई मंत्रालय चलाएगा."

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प्रदीप मैगज़ीन का कहना है कि लोढ़ा समिति का सुझाव सिर्फ इतना है कि पद पर बने रहने की सीमा और उम्र तय होनी चाहिए.

तो क्या एक ही झटके में सबकी कुर्सियाँ चली जाएँगी? या फिर तीन साल तक एक पद पर बने रहने के बाद दोबारा पद पाना संभव नहीं रह जाएगा, ऐसी हालत को टालने में बोर्ड के बड़े-बूढ़े जी-जान से लगे हुए हैं.

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प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, "अगर लोढ़ा समिति की सिफ़ारिशें मानी जाएं तो ज़्यादातर अधिकारियों का कार्यकाल कब का पूरा हो चुका है. उन्हें अब जाना ही होगा."

उनका मानना है कि बोर्ड के पदाधिकारी अपने पांव पर ख़ुद कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहते, वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक इंतज़ार करना चाहते हैं.

मैगज़ीन कहते हैं, "रही बात क्रिकेट की तो बोर्ड को तो अभी भी उसके सीईओ जौहरी साहब और उनका स्टाफ चला रहा है. क्रिकेट का सारा ढाँचा सही है, कुछ पदाधिकारियों के जाने से बीसीसीआई पर कोई असर नहीं पड़ेगा."

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