15 साल बाद, भारत के पास वर्ल्ड चैंपियन बनने का मौका

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जूनियर वर्ल्ड कप हॉकी का ख़िताब जीतने के लिए भारतीय टीम पूरी तैयारी कर चुकी है. लखनऊ के मेजर ध्यानचंद एस्ट्रोटर्फ़ स्टेडियम में ख़िताबी मुक़ाबले में भारत की टक्कर बेल्ज़ियम से होगी.

रविवार को होने वाले फ़ाइनल मुक़ाबले से पहले भारतीय हॉकी टीम के कोच हरेंद्र सिंह ने बीबीसी को बताया, "भारत और बेल्ज़ियम का मैच कांटे का होगा. दोनों टीमें आक्रामक हॉकी खेलने के लिए जानी जाती हैं. लिहाजा दर्शकों को एक रोमांचक मैच देखने को मिलेगा."

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फ़ाइनल मुक़ाबला में भारत की टक्कर बेल्ज़ियम से होगी.

टूर्नामेंट में अब तक भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा है. क्वॉर्टर फ़ाइनल में स्पेन से पिछड़ने के बावजूद भारतीय टीम मैच जीतने में कामयाब हुई. इसके बाद सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में भारतीय दल ने पेनल्टी शूट आउट में ऑस्ट्रेलिया को हराकर फ़ाइनल में प्रवेश किया.

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टीम के अब तक के प्रदर्शन के बारे में हरेंद्र सिंह ने कहा, "इस टीम को दो साल आठ महीने से ज़्यादा समय लगाकर तैयार किया गया. हमने इन खिलाड़ियों को एक टीम के तौर पर खेलने के लिए तैयार किया है. हमारे खिलाड़ियों ने विपक्षी टीम को अपनी ताक़त पर खेलने के लिए मज़बूर किया है."

इस टूर्नामेंट में अब तक भारतीय खिलाड़ियों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया है. चाहे वो गुरजंत सिंह और मंदीप सिंह जैसे स्ट्राइकर हों या फिर कप्तान हरजीत सिंह का मिडफ़ील्ड में प्रदर्शन हो.

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दीपसन टिर्की और हरमनप्रीत सिंह के रूप मे रक्षापंक्ति ने भी कमाल का खेल दिखाया है. सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ गोलकीपर विकास दहिया सुपरस्टार बनकर उभरे.

टीम के कोच हरेंद्र सिंह ने बताया, "टीम का हर खिलाड़ी अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है. हर किसी की अपनी अपनी ज़िम्मेदारी है और खिलाड़ी उसके मुताबिक खेल रहे हैं. सेमीफ़ाइनल मैच में विकास दहिया की जितनी अच्छी भूमिका रही उतनी ही अच्छी भूमिका हमारे गोल करने वाले खिलाड़ियों की भी रही है."

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ऐसे में इस टीम से उम्मीद की जा रही है कि वो फ़ाइनल मुक़ाबला जीत कर जूनियर वर्ल्ड कप हॉकी का ख़िताब जीत सकती है. लेकिन टीम बेल्ज़ियम को हल्के में आंकने की भूल नहीं कर रही है.

इसकी वजह भी साफ़ है, इस टूर्नामेंट से पहले वेलेंसिया में खेले गए चार देशों के टूर्नामेंट में बेल्ज़ियम के हाथों ही भारतीय टीम 2-4 से हारी थी.

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हरेंद्र सिंह बेल्ज़ियम की चुनौती के बारे में कहते हैं, "बीते चार सालों से बेल्ज़ियम की सीनियर और जूनियर हॉकी टीम का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है. वे भी हमारी तरह आक्रामक और खुली हॉकी खेलते हैं. ऐसे में हम अपने अवसरों का पूरा फ़ायदा उठाना चाहेंगे."

वैसे ये तीसरा मौका है जब भारतीय हॉकी टीम जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में पहुंची है. इससे पहले केवल एक बार भारतीय टीम जूनियर हॉकी वर्ल्ड चैंपियन बनी है, ऑस्ट्रेलिया में 2001 में भारतीय टीम जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप चैंपियन बनने में कामयाब हुई थी.

1997 में टीम को रनर्स अप रहकर संतोष करना पड़ा था अब 15 साल बाद भारतीय जूनियर हॉकी टीम के सामने नया इतिहास बनाने का मौका है.

फ़ाइनल मुक़ाबले के लिए भारतीय खिलाड़ियों का मंत्र क्या होगा, इस बारे कोच हरेंद्र सिंह ने बताया, "सिंपल हॉकी, अटैकिंग हॉकी और पास वाली हॉकी. एक टीम वाली हॉकी."

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