पाकिस्तानी क्रिकेटर महिंदर सिंह वहां के टॉप 30 में शामिल

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हाल के वर्षों में पाकिस्तान में सिख समुदाय के युवक वहां की सेना और अन्य कई क्षेत्रों में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं.

अब तो पाकिस्तान की क्रिकेट टीम में भी एक सिख युवक के शामिल होने की उम्मीद जगी है.

राइट आर्म फ़ास्ट बोलर महिंदर पाल सिंह मरदान से नेशनल क्रिकेट अकादमी की ओर से उभरते क्रिकेटरों में चुने गए हैं.

उन्होंने मुल्तान में 28 नवंबर से 11 दिसंबर तक प्रशिक्षण पूरा किया है.

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पाकिस्तान में इससे पहले ईसाई और हिंदू खिलाड़ी नेशनल टीम का हिस्सा बने हैं लेकिन ये पहली बार है कि कोई पाकिस्तानी सिख नेशनल क्रिकेट अकेडमी तक पहुंचने में कामयाब रहा.

महिंदर पाल सिंह देश के शीर्ष 30 क्रिकेटरों में शुमार हो गए हैं. पाकिस्तान के इतिहास में अब तक सिर्फ़ सात ग़ैर-मुस्लिम खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है.

यदि नेशनल टीम में शामिल हुए तो महिंदर ऐसे आठवें गैर-मुस्लिम और पहले पाकिस्तानी सिख बन सकते हैं.

'शुक्र है पाक टीम में कोई सिख तो आया'

महिंदर पाल सिंह ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है कि प्रशिक्षण में मुदस्सर नज़र, मुश्ताक अहमद ने उनके खेल की सराहना की है.

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष शहरयार खान ने भी मुल्तान क्रिकेट अकेडमी में उनसे मुलाकात की और सराहना की.

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उनके मुताबिक शहरयार ख़ान ने खुश होकर कहा, "शुक्र है कि पाकिस्तान क्रिकेट में कोई सिख लड़का सामने आया है."

महिंदर पाल बताते हैं कि उनकी गेंद की रफ़्तार तो 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक है लेकिन उनके पास गेंद को इन और आउट स्विंग करने की क्षमता है जो तेज़ गेंदबाज़ी में रफ़्तार से ज़्यादा मायने रखता है.

वो पंजाब यूनिवर्सिटी में फार्मेसी के छात्र हैं. उन्हें क्रिकेट खेलने की प्रेरणा अपने पिता डॉक्टर हरजीत सिंह से मिली है जो ख़ुद भी तेज़ गेंदबाज़ रहे हैं.

महिंदर पाल तेज़ गेंदबाज वकार यूनुस से ख़ासे प्रभावित हैं और उन्हें अपना आइडल बताते हैं.

प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, वो ग्रेड टू क्रिकेट खेलेंगे और इसके बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलेंगे. उनका सपना राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में शामिल होने का है.

क्रिकेट अकेडमी में एक सिख लड़के को देखकर बाकी क्रिकेटरों के व्यवहार के बारे में महेंद्र पाल सिंह ने बताया कि पंजाब यूनिवर्सिटी में भी वह फार्मेसी की क्लास में एकमात्र सिख स्टूडेंट हैं.

अन्य छात्र उन्हें देखकर हैरान भी होते हैं और खुश भी होते हैं और ऐसी ही प्रतिक्रिया क्रिकेट अकादमी में मिली.

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20 वर्षीय महिंदर पाल सिंह के अनुसार उनका संबंध तो मरदान से है लेकिन पंद्रह साल पहले ख़राब माहौल की वजह से उनका परिवार ननकाना साहिब में रहने चला गया था.

उनके अनुसार उन्हें उम्मीद है कि वो अपने खेल के दम पर चयनकर्ताओं की नज़र में आ सकेंगे.

महिंदर पाल सिंह ने ये भी कहा कि सिख समुदाय में पहले कोई क्रिकेटर सामने नहीं आया इसलिए उन्हें गाइड करने वाला कोई नहीं था.

एक बार तो निराशा का शिकार होकर एक वर्ष तक वो क्रिकेट से अलग हो गए थे.

उन्होंने बताया कि उनके दिल में अपने समुदाय की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेलने का जुनून था और जब क्रिकेट शिविर के बारे में पता चला तो फिर उन्होंने कड़ी मेहनत करनी शुरू कर दी.

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