'धोनी दबाव में फ़ैसले नहीं लेते'

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महेंद्र सिंह धोनी के भारत की एकदिवसीय और टी-20 क्रिकेट टीम की कप्तानी छोड़ने के फ़ैसले को जानकार भारतीय क्रिकेट के लिए एक नया मोड़ मान रहे हैं.

बीबीसी ने वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन और क्रिकेट विश्लेषक अयाज़ मेमन से इस बारे में बात की. दोनों ने कहा कि धोनी का फ़ैसला एक संतुलित फ़ैसला है.

प्रदीप मैगज़ीन का कहना है कि भारतीय क्रिकेट के लिए यह एक नया मोड़ है. काफ़ी समय से धोनी के सन्यास को लेकर ज़रूर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन कम ही लोगों ने यह उम्मीद की होगी कि वो कप्तानी छोड़कर टीम में बने रहने का फैसला करेंगे.

मैगज़ीन ने कहा कि धोनी में अभी काफ़ी खेल बाकी है. उनकी हालिया परफ़ॉर्मेंस, उनकी फ़िटनेस और फॉर्म को देखकर यह लगता है कि वो 2019 का क्रिकेट वर्ल्ड कप भी खेल सकते हैं.

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अब विराट कोहली की कप्तानी वाली भारतीय क्रिकेट टीम के बारे में उन्होंने कहा कि जिस भारतीय टीम को आज हम देख पाते हैं, उसे तैयार करने में धोनी का बड़ा योगदान रहा है.

सोशल मीडिया पर कुछ लोग बीसीसीआई में हुए ताज़ा फेरबदल और धोनी के इस फ़ैसले को जोड़कर देख रहे हैं. इस चर्चा पर टिप्पणी करते हुए मैगज़ीन ने कहा कि बोर्ड में हुए बदलाव का धोनी के फ़ैसले पर कोई असर नहीं रहा होगा. उम्मीद की जा सकती है कि यह धोनी का व्यक्तिगत फ़ैसला होगा और इसका ऐलान उन्होंने ख़ुद ही किया होगा.

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वहीं अयाज़ मेमन ने कहा कि धोनी के फ़ैसलों का पूर्वानुमान लगा पाना कभी भी सरल नहीं रहा. साथ ही यह भी हमेशा माना गया कि धोनी दबाव में फ़ैसले नहीं करते. यह फ़ैसला भी उनका एक बेहद संतुलित फ़ैसला है और सही समय पर सही चुनाव कहा जा सकता है.

मेमन ने कहा कि विराट इस वक्त बेहतरीन फॉर्म में हैं और कप्तानी मिलने के बाद उनके खेल में और भी ज्यादा निखार आया है. ऐसे में ख़ुद को कप्तानी की ज़िम्मेदारी से दूर करके, अपने खेल पर ध्यान देना धोनी के ज़ेहन में रहा होगा.

उन्होंने कहा कि टीम में विराट कोहली के बाद अब भी 35 साल के हो चुके धोनी की फ़िटनेस सबसे अच्छी मानी जाती है. ऐसे में उनके खेल पर सवाल लगना तो संभव नहीं है.

(बीबीसी संवाददाता प्रशांत चाहल से बातचीत पर आधारित)

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