जब छात्र धोनी के लिए बनाई गई टीम

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धोनी का करियर संवारने वाले देवल सहाय

धोनी को तब से जानता हूं जब वह बहुत छोटे थे. उनके पिता और मैं दोनों ही मेकॉन में काम करते थे. धोनी जब जूनियर लेवल पर स्कूल टीम के लिए खेलते थे तो मैं उस समय रांची ज़िला क्रिकेट एसोसिएशन और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ा हुआ था. धोनी ने पहले मैच में ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था.

धोनी हार्ड हिटिंग शॉट्स खेल रहे थे और उनके शॉट्स ग्राउंड में हर तरफ जा रहे थे. धोनी उसी समय सबकी नजरों में आ गए थे. हमारी भी नज़र उन पर गई. धोनी को प्रोत्साहित करने के लिए उसे रांची जिले की ए-टीम में चुना गया. धोनी ने उस समय स्कूल लेवल पर भी रिकॉर्ड बनाए थे.

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Image caption देवल सहाय के बेटे अभिनव के साथ धोनी.

धोनी तब छोटे थे लेकिन लोग उनका खेल देखने के लिए ग्राउंड में आते थे. धोनी डीएवी स्कूल में पढ़ते थे और उन्होंने अपने स्कूल को भी एक बार चैंपियन बनाया. उसी समय हमलोगों ने तय किया कि धोनी को स्टाइपेंड दिया जाए. जब मैं ईसीएल में था तो उस समय हमारी कोई क्रिकेट टीम नहीं थी.

मैंने माही के पिता से कहा कि अगर धोनी आते हैं तो हम क्रिकेट टीम बना देंगे. माही के पिता ने मेरी उनसे बात कराई. मैंने धोनी से पूछा कि तुम हमारे साथ क्यों आना चाहते हो. धोनी का जवाब था कि यहां उन्हें अच्छी प्रैक्टिस मिलेगी.

मैंने अपने सीएमडी से बात की और उन्होंने कहा कि अगर आपको भरोसा है तो हम एक क्रिकेट टीम का गठन करेंगे. सीसीएल की क्रिकेट टीम सिर्फ धोनी की वजह से ही बनी थी और वे इस टीम के पहले खिलाड़ी थे. धोनी से सीसीएल के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन किया. उन्होंने पांच शतक भी बनाए थे.

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तब धोनी ग्यारहवीं क्लास में पढ़ते थे. रांची जिला क्रिकेट असोसिएशन ने धोनी को बेस्ट क्रिकेटर का अवॉर्ड दिया. इसके बाद धोनी की क्षमता सबने देख ली थी. वे हर मैच में टीम को जिताते थे. धोनी की तर्ज़ पर दूसरे खिलाड़ियों को भी स्टाइपेंड देना शुरू किया गया लेकिन माही को ज्यादा पैसा मिलता था क्योंकि वे मैच जिताऊ खिलाड़ी थे.

फिर धोनी का चयन अंडर-19 के लिए हो गया और वह खेलते चले गए. अंडर-22 में भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया. सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि बिहार की टीम ने रणजी ट्रॉफी के लिए क्वॉलिफ़ाई किया था और उसका मैच रांची में खेला जा रहा था. उस मैच में सेलेक्टर रमेश सक्सेना भी आए हुए थे.

हमने कहा कि धोनी को अगले साल के लिए रिज़र्व प्लेयर के रूप में भी आपलोग ज़रूर रख लीजिए. उस समय मेरी बात नहीं मानी गई लेकिन अगले साल धोनी ने हर रणजी मैच में जमकर खेला. धोनी को जब भी खेलने का मौका मिला, उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की.

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धोनी को दीप दासगुप्ता की जगह खेलने का जब मौका मिला तो उन्होंने दोनों ही पारियों में शतक बनाया. तब तक वे सबके दिमाग में आ चुके थे. धोनी को इंडिया यूथ के लिए खेलने का मौका मिला और उन्होंने वहां भी शतक बनाया. उन्हीं दिनों जोनल टीम का मैच फरीदाबाद में हो रहा था.

आशीष नेहरा नॉर्थ जोन की तरफ से खेल रहे थे और धोनी ईस्ट जोन की तरफ. सेलेक्टर ये देखने के लिए वहां आए थे कि नेहरा की फिटनेस पाकिस्तान जाने लायक है या नहीं. धोनी ने वहां नेहरा की जमकर धुनाई और कई लोगों का लगा कि नेहरा का पाकिस्तान जाना अब कैंसल हो गया.

धोनी ने उस मैच में भी शतक बनाया और उनका पाकिस्तान दौरे के लिए चयन हो गया और बाकी सब कुछ तो इतिहास का हिस्सा है ही.

(बीबीसी संवाददाता अमरेश द्विवेदी से बातचीत पर आधारित)

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