भारत में तेज़ गेंदबाज़ों की कमी की यह हैं वजह?

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क्रिकेट देखना तो बहुत आसान है. खेलना नहीं.

मुंबई के कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन में कोचिंग देने वाले हेड कोच विद्याधर परादकर उस वक़्त लाइम-लाइट में आए, जब इंग्लैंड क्रिकेट टीम के युवा खिलाड़ी हासिब हमीद ने उनसे कोचिंग ली.

बाएं हाथ के ओपनिंग बल्लेबाज़ हासिब हमीद मुंबई में अपनी तकनीक और भारतीय पिचों की समझ के लिए आए थे और यहां उन्हें इस काम में मदद की विद्याधर परादकर ने.

यहीं हमें मालूम चला कि विद्याधर परादकर ही ज़हीर ख़ान को बचपन से ट्रेनिंग देते आए हैं और भारतीय टीम के लिए ज़हीर को तराशने का काम उन्होंने ही किया था.

ज़हीर समेत कई अन्य रणजी खिलाड़ियों को भी ट्रेनिंग दे चुके विद्याधर परादकर मानते हैं कि भारत में अच्छे तेज़ गेंदबाज़ नहीं मिलना एक समस्या है और विश्व क्रिकेट में हमारे पास तेज़ गेंदबाज़ी में बड़े नाम नहीं होने के कई कारण हैं.

कोच परादकर के अनुसार भारत में उम्दा तेज़ गेंदबाज़ नहीं होने के 4 मुख्य कारण ये हैं.

1. पिच

Image caption क्रिकेट कोच विद्याधर परादकर के साथ इंग्लैंड के बल्लेबाज़ हासिब हमीद.

भारतीय पिचों की अक्सर आलोचना की जाती है कि वो सिर्फ़ स्पिन गेंदबाज़ी को मदद करती हैं और विद्याधर परादकर इसे सही मानते हैं. वो कहते हैं, "हमारे यहां अभी भी टर्निंग विकेट्स बनाए जाते हैं और पेस बॉलर्स के लिए इन विकेट्स में कुछ ख़ास नहीं होता. ऐसे में तेज़ गेंदबाज़ भी स्पीड की जगह लाईन लेंथ पर काम करने लगते हैं और स्लो हो जाते हैं."

2. विदेशी तकनीक

भारतीय खिलाड़ियों को सिखाने के लिए विदेशी कोच बुलाए जाना भी अच्छी तेज़ गेंदबाज़ी नहीं सीखने का एक बड़ा कारण है.

कोच परादकर के अनुसार, "भारतीय लोगों की शारीरिक बनावट और किसी ऑस्ट्रेलियाई या वेस्ट इंडियन खिलाड़ी की शारीरिक संरचना में ज़मीन आसमान का अंतर होता है. ऐसे में वो हाथ को लंबे समय तक सीधा कर उंचाई से बॉल फ़ेक सकते हैं."

वो जोड़ते हैं, "भारतीय गेंदबाज़ बहुत लंबे नहीं होते, ऐसे में सीधा हाथ रखने से भी उनकी बॉल उपर नहीं उठती. हां इस तकनीक से वो थक जल्दी जाते हैं."

3. रन अप

तेज़ गेंदबाज़ के लिए रन-अप बहुत महत्वपूर्ण चीज़ है और अधिकांश गेंदबाज़ बचपन से ही ग़लत रन-अप अपना लेते हैं.

Image caption क्रिकेट कोच विद्याधर परादकर के साथ अभ्यास करते ज़हीर ख़ान (फ़ाइल तस्वीर)

अगर सही समय पर इसे ठीक नहीं किया जाए, तो इंजुरी होने का ख़तरा रहता है.

उदाहरण के लिए भारत के सफ़लतम गेंदबाज़ों में से एक आशीष नेहरा को अपने रन-अप और जंप के बाद लैंडिंग में कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ा और इस दौरान लगी चोट से वो कई बार बाहर हुए.

4. एक्शन

विद्याधर परादकर को इस मामले में सभी तेज़ गेंदबाज़ों के कोच से शिकायत है.

उनके अनुसार भारत में कोच स्विंग और लाईन पर ज़ोर तो देते हैं, लेकिन इन चीज़ों के लिए एक्शन में ज़रूरी बदलाव वो नहीं करते.

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बल्लेबाज़ी की तुलना में क्या गेंदबाज़ी आसान है.

कोच परादकर के अनुसार,"किसी तेज़ गेंदबाज़ के बॉलिंग आर्म के साथ-साथ उसका नॉन बॉलिंग-ऑर्म किधर जा रहा है, इससे फ़र्क पड़ता है. क्योंकि नॉन-बॉलिंग आर्म से ही बॉल को मिलने वाला स्विंग तय होता है."

इन सबसे ऊपर कोच परादकर के अनुसार डिसिप्लिन और लगातार अभ्यास बहुत ज़रूरी है, जो अक्सर एक समय के बाद जाकर खिलाड़ी छोड़ देते हैं.

कोच परादकर कहते हैं, "ज़हीर को मैंने 17 साल की उम्र से कड़े अनुशासन के साथ अपने पास रखा था और उस अनुशासन से ही वो आगे बढ़ा, इसलिए अनुशासन एक पेस बॉलर के लिए बहुत ज़रूरी है वर्ना मैदान और जीवन में बाउंड्री लाईन ज़्यादा दूर नहीं होती."

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