बूढ़े शेरों में अभी जान बाक़ी है

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दुनिया के ज़्यादातर प्रोफ़ेशन में 35 बरस की उम्र, करियर का आधा पड़ाव लेकर आती है, लेकिन किसी एथलीट के लिए ये इशारा है कि बतौर खिलाड़ी उसकी पारी अंतिम दौर में है.

ना जाने कितने ही खिलाड़ी 35 साल का आंकड़ा छूने से पहले ही या तो रिटायर हो जाते हैं या फिर अपने रंग में नहीं रहते. क्रिकेट में भी ऐसी ही कहानी है.

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लेकिन कटक के बाराबती स्टेडियम में दो बल्लेबाज़ इस परंपरा को तोड़ते नज़र आए.

धोनी-युवराज का बल्ला बोला

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महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह उन चुनिंदा बल्लेबाज़ों में शुमार हुए जो 35 साल से ज़्यादा के हैं और वनडे में शतक लगाकर बढ़ती उम्र को मुंह चिढ़ा रहे हैं.

शतक लगाने वाले दिन धोनी की उम्र 35 साल 196 दिन थी जबकि युवराज की 35 साल 38 दिन.

जानकार मानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ बल्लेबाज़ों के हैंड-आई कॉर्डिनेशन (हाथ और आंखों का तालमेल) और दौड़ने पर काफ़ी फ़र्क पड़ता है, लेकिन धोनी और युवराज ने सभी चिंताओं को दूर कर दिया.

उम्र तो सिर्फ़ नंबर है

बिशन सिंह बेदी से जब पूछा गया कि 35 साल के बाद बल्लेबाज़ के लंबी पारियां खेलना कितना मुश्किल होता है, तो उन्होंने बीबीसी से कहा, ''अगर मुश्किल होता भी होगा, तो मैच में धोनी और युवराज को देखकर ऐसा लगा नहीं.''

बेदी ने कहा, ''दोनों ने गज़ब की बल्लेबाज़ी की और आपको उन्हें पूरा श्रेय देना होगा. जहां तक उम्र बढ़ने की बात है, तो मैं सिर्फ़ इतना कहूंगा कि उम्र महज़ एक नंबर है और इससे ज़्यादा कुछ नहीं.''

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युवराज (150 रन) और धोनी (134) ने अपनी उम्र के बूते एक और रिकॉर्ड बनाया. ये जोड़ी एक ही पारी में 35 की उम्र पार होने के बावजूद शतक लगाने वाली दुनिया की दूसरी जोड़ी बन गई.

श्रीलंकाई जोड़ी का रिकॉर्ड पीछे छूटा

उनसे पहले ये रिकॉर्ड श्रीलंका के नाम था. साल 2015 में मेलबर्न में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ जब तिलकरत्ने दिलशान (161) और कुमार संगकारा (105) ने शतकीय पारियां खेली तो उनकी उम्र 35 साल पार थी.

धोनी और युवराज का बल्ला बीच-बीच में आग उगलता रहा, लेकिन लंबी पारी कई दिन से नहीं दिखी थी. गुरुवार को टीम इंडिया के तीन विकेट पांच ओवर और 25 रनों के भीतर गिर गए थे. सो, मौक़ा भी था और ज़रूरत भी.

कई साल बाद पहुंचे सौ पार

और भारतीय टीम को कई अवसरों पर छोटी, लेकिन तेज़ पारियों के दम पर जीत दिलाने वाले धोनी और युवराज ने शतक लगाए. वो भी कई दिन बाद.

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इससे पहले युवराज के बल्ले से शतक छह साल पहले साल 2011 में निकला था, जबकि धोनी ने इससे पहले सेंचुरी चार साल पहले साल 2013 में मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ लगाई थी.

35 साल से ज़्यादा के शतकवीर

ये ख़बर भी उड़ी कि ये दोनों बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर के बाद पहले भारतीय हैं, जो 35 साल से ज़्यादा होने के बावजूद शतक बना पाए. लेकिन ये सच नहीं है.

रिकॉर्ड खंगालने के बाद ख़ुलासा हुआ कि इस ख़ास फ़ेहरिस्त में सचिन तेंदुलकर और धोनी के बीच भी कुछ भारतीय नाम हैं. सचिन ने साल 2012 में जब बांग्लादेश के ख़िलाफ़ शतक लगाया था, तो उनकी उम्र 38 साल, 327 दिन थी.

सचिन के अलावा सुनील गावस्कर ने 38 साल, 113 दिन, मोहिंदर अमरनाथ 37 साल, 185 दिन और मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने 35 साल, 224 दिन का होने पर शतक लगाए हैं. इन ख़ास भारतीयों की सूची में पांचवें नंबर पर अब धोनी और छठे पर युवराज आ गए हैं.

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लेकिन दुनिया के तीन ऐसे बल्लेबाज़ हैं जो बढ़ती उम्र के बावजूद शतक लगाने के मामले में इन सभी भारतीयों से आगे हैं. इस सूची में पहला नाम ख़ुर्रम ख़ान है. ये नाम आपने शायद ना सुना हो, लेकिन उनके नाम ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है जिसे तोड़ना धुरंधरों के लिए भी आसान नहीं होगा.

ख़ुर्रम नाम याद रखिएगा

संयुक्त अरब अमीरात के इस बल्लेबाज़ ने साल 2014 में जब अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ 132 रनों की पारी खेली, तो उनकी उम्र का मीटर 43 साल, 162 दिन पर खड़ा था.

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Image caption ख़ुर्रम ख़ान

उनके बाद इस सूची में श्रीलंका के विस्फ़ोटक बल्लेबाज सनथ जयसूर्या हैं, जो 39 साल, 212 दिन की उम्र में शतक लगा चुके हैं और तीसरे पायदान पर जैफ़ बायकॉट हैं, जो 39 साल, 51 दिन का होने पर सेंचुरी जड़ चुके हैं.

जो लोग ये कह रहे थे कि युवराज सिंह और धोनी के रिटायर होने का वक़्त आ गया है, वो कटक मैच की उनकी पारियों की हाईलाइट देख सकते हैं और साथ ही क्रिकेट के रिकॉर्ड भी, जो बताते हैं कि 43 साल का बल्लेबाज़ शतक लगा सकता है. और उम्र वाक़ई कुछ और नहीं, सिर्फ़ एक नंबर है.

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