उस आख़िरी ओवर ने मेरी नींद उड़ा रखी है: केदार

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बीबीसी संवाददाता सुशांत मोहन से बात करते हुए क्रिकेटर केदार जाधव

भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते हुए बल्लेबाज़ केदार जाधव ने बीबीसी के साथ विशेष फ़ेसबुक लाइव में अपनी क्रिकेट और ज़िंदगी के बारे में बातें की.

ये बातचीत हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर यहां उपलब्ध है.

पेश हैं बीबीसी संवाददाता सुशांत मोहन के साथ केदार जाधव की इस बातचीत के मुख्य अंशः-

केदार जाधव तेज़ी से रन बनाते हैं और बांउड्री मारना उनका शगल है. इस बारे में उन्होंने कहा, "मैं नैचुरल स्ट्रोक मेकर हूं. रणजी ट्रॉफ़ी का मैच हो, टी-20 हो या वनडे मैं स्ट्रोक खेलने की ही कोशिश करता हूं. हम पिच पर रन बनाने ही जाते हैं. आप चाहे कम बॉल लें या ज़्यादा. मुझे नहीं लगता कि मैं टी-20 की वजह से ऐसा हूं. मैं नैचुरली ही स्ट्रोक मेकर हूं."

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अपने क्रिकेट के सफ़र के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "क्रिकट का सफ़र मेरा बहुत लंबा था. मैंने दसवीं के बाद प्रोफ़ेशनल क्रिकेट खेलना शुरू किया. मुझे भारतीय टीम तक पहुंचने में क़रीब 13 साल लग गए. मैंने भारतीय टीम के लिए जो भी त्याग किया अब उसका फल मिल रहा है. मैंने अंततः भारत के लिए खेलने का अपना सपना पूरा कर लिया है. मेरे परिजनों को मुझ पर गर्व है और मैं इससे बहुत ख़ुश हूं."

केदार कहते हैं कि मौक़ों के कामयाबी में बदलना ही क्रिकेट में सफलता दिलाता है.

उन्होंने कहा, "अगर आपमें क़ाबिलियत है तो आपको मौक़े मिलेंगे उन्हें आप जितने कम समय में कामयाबी में बदल लोगे उतना ही ज़्यादा बेहतर है. आपको लगातार ज़्यादा रन बनाने होंगे ऐसा करके आप वो पा लेंगे जो आप चाहते हो."

उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में जगह बनाना बहुत ही मुश्किल काम है. उन्होंने कहा, "भारत की आबादी बहुत ज़्यादा है इसलिए टीम में पहुँचने के लिए कम्पीटशन भी बहुत है.

मुझे पहले भी मौक़े मिले थे लेकिन मैं उन्हें कामयाबी में नहीं बदल सका लेकिन न्यूज़ीलैंड के साथ पिछली सिरीज़ में मैंने उन मौक़ों को भुनाया और अब मुझमें बहुत आत्मविश्वास है.मैं बहुत ख़ुश हूं कि मैं देश को मैच जिता पाया"

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ कोलकाता में हुए आख़िरी वनडे मैच में केदार क्रीज़ पर थे. उन्होंने तेज़ी से रन बनाए लेकिन अंतिम ओवर में वो ज़रूरी रन नहीं बना सके. उस ओवर को याद करते हुए केदार कहते हैं, "मुझे नींद नहीं आती है जब मैं उस मैच के बारे में सोचता हूं."

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आम जीवन में केदार क्रिकेट पर बात नहीं करते हैं बल्कि उन्हें फ़िल्मों और फ़ुटबॉल पर बात करना पसंद है. उन्होंने कहा, "मैं क्रिकेट के बारे में बहुत कम बात करता हूं. मुझे अपनी लाइफ़ ज़्यादा नहीं बदलनी है. हालांकी पहले जैसे बने रहना मेरे लिए मुश्किल है. मैं अपने परिवार से क्रिकेट के बारे में बात नहीं करता बल्कि फ़ुटबॉल और सिनेमा के बारे में ज़्यादा बात करता हूं."

जब उनसे ड्रेसिंग रूम के माहौल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "रविंद्र जडेजा माहौल को बहुत हलका रखते हैं. हारने के बाद सबको दुख होता है लेकिन आपको हार से आगे बढ़कर अगले मैच की ओर देखना होता है. जीतने पर हम ज़्यादा ख़ुश नहीं हो सकते और हारने पर ज़्यादा दुखी नहीं हो सकते. मेरे लिहाज़ से टीम में सबसे ज़्यादा मज़ेदार जड्डू हैं."

केदार कहते हैं कि मैं अपने खेल को बहुत एंजॉय करता हूँ और इसे लंबे समय तक एंजॉय करना चाहता हूँ. उन्होंने कहा, "मैं मैदान पर बल्लेबाज़ी को ज़्यादा एंजॉय करता हूँ क्योंकि मुझे बल्लेबाज़ी ज्यादा देर मिलती है गेंदबाज़ी कम देर के लिए मिलती है. मुझे हमेशा से ही गेंद को पार्क के बाहर भेजने में मज़ा आता है. मैं जब भी चौका या छक्का जड़ता हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है."

Image caption केदार का परिवार पुणे की एक रिहायशी कॉलोनी में फ्लैट में रहता है

भारतीय टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "भारतीय टीम का माहौल इस समय बहुत ही मज़ेदार है. बड़े खिलाड़ी हमारे साथ छोटे भाई की तरह व्यवहार करते हैं. बहुत बार मुझे यक़ीन नहीं होता कि मैं इतने सालों से जिनको टीवी पर देखता आ रहा था उनके साथ मैं ड्रेसिंग रूम शेयर कर रहा हूं. मैं अभी अपने वक़्त को बहुत एंजॉय कर रहा हूं. बस पूरी कोशिश यही है कि ज़्यादा से ज़्यादा मैच टीम को जिता पाऊं."

भारतीय टीम में अहम जगह बनाने के बाद ज़िंदगी कितनी बदल गई है इस सवाल पर केदार कहते हैं. "जब मैंने पहला शतक लगाया तो बहुत से स्थानीय नेता और पत्रकार घर आएं. मेरी पिता 70 साल के हैं और मां 60 साल की हैं . वो बहुत ही साधारण व्यक्ति हैं वो सबसे मिल लेते हैं. वो किसी को मना नहीं कर पाएंगे लेकिन लोगों को थोड़ा समझना चाहिए कि मेरे परिजनों की भी निजता है. धीरे-धीरे वो भी समझ लेंगे. इतने लोग मिलने आ रहे हैं ये उनके लिए बहुत ही अच्छा अहसास है."

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