क्रिकेट में शतरंज की चाल चलने वाले चहल

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महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और युवराज सिंह के साए में कूदता-उछलता बच्चा-सा दिखने वाला एक खिलाड़ी. लेकिन कारनामे उसने कई धाकड़ लेग स्पिनरों जैसे किए हैं. उसकी गेंद की चाल में फँस कर इंग्लिश बल्लेबाज़ रोनी सूरत बनाकर पवेलियन जाते रहे.

मौक़ा था बेंगलुरू में हुए भारत और इंग्लैंड के बीच मौजूदा सिरीज़ के आख़िरी टी-20 मैच का और इंग्लैंड को चक्कर में डालने वाले थे युजवेंद्र चहल.पहले ही अच्छी बल्लेबाज़ी के दम पर भारत ने 202 रन बनाकर थोड़ा दबाव तो बना ही लिया था. लेकिन क्रिकेट जानकारों की मानें तो बेंगलुरू की पिच पर कितना भी बड़ा लक्ष्य बड़ा नहीं होता.

कप्तान विराट कोहली ने जब दूसरा ही ओवर चहल को थमाया तो लग गया था कि भारत इंग्लैंड को समेटने की तैयारी में है. चहल की पहली गेंद पर रॉय ने छक्का लगा दिया. ऐसे में इंटरनेशनल क्रिकेट का नया खिलाड़ी घबरा जाए.

लेकिन मैंने आईपीएल में चहल को ऐसे कई मौक़े पर ज़बरदस्त वापसी करते देखा है. हुआ भी वही और चहल ने पहले ओवर की तीसरी ही गेंद पर बिलिंग्स को आउट कर दिया. उस ओवर में एक रन आउट करने का आसान सा मौक़ा भारत के हाथ से गया. चहल के उस ओवर में 11 रन बने.

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दो ओवरों का कमाल

चहल के दूसरे ओवर में नौ रन बने. यानी दो ओवर में चहल 20 रन दे चुके थे. टी-20 के लिए ये काफ़ी महंगा था. इसका नतीजा ये हुआ कि चहल को 14वें ओवर में गेंदबाज़ी करने का मौक़ा मिला. उस समय इंग्लैंड का स्कोर था दो विकेट पर 117 रन.

इस ओवर में चहल ने जम कर खेल रहे कप्तान मॉर्गन और जो रूट को आउट किया और स्कोर हो गया चार विकेट पर 119 रन. इस ओवर में भी दो रन देकर चहल ने दो विकेट लिए.

16वें ओवर में चहल अपने सर्वश्रेष्ठ दौर में नज़र आए और इस ओवर में उन्होंने तीन विकेट लेकर इंग्लैंड के कैंप में सन्नाटा ला दिया. अगले ओवर में जसप्रीत बुमराह ने रही-सही कसर पूरी कर दी.

इस मैच में चहल की बॉलिंग पर नज़र डालिए. चार ओवर, 25 रन, छह विकेट. टी-20 जैसे फटाफट क्रिकेट में इससे बेहतरीन प्रदर्शन क्या हो सकता है.

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शतरंज के भी खिलाड़ी रहे हैं चहल

23 जुलाई 1990 को हरियाणा के जींद में जन्मे चहल अभी 26 साल के हैं. चहल एक आक्रामक लेग स्पिनर के रूप में जाने जाते हैं. उन्हें देखकर अगर किसी बल्लेबाज़ ने ये सोचा कि वो चहल की ऐसी-तैसी कर देगा, तो यही चहल सबसे ख़तरनाक साबित होते हैं. पहली बार चहल ने अपना ध्यान उस समय खींचा, जब उन्होंने 2009 में अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफ़ी में सर्वाधिक 34 विकेट लिए.

चहल शतरंज के खिलाड़ी भी रह चुके हैं और उन्होंने जूनियर लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया है. चहल एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने क्रिकेट और शतरंज दोनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है.

उन्होंने 2009 में ही हरियाणा की ओर प्रथण श्रेणी क्रिकेट खेलना शुरू किया. 2011 में उन्हें बड़ा ब्रेक उस समय मिला जब आईपीएल में मुंबई इंडियंस ने उन्हें साइन किया. हालांकि उस साल वे कोई मैच नहीं खेल पाए.

इसके बावजूद उन्हें चैम्पियंस लीग टी-20 में मुंबई इंडियंस की टीम में जगह मिली और उन्होंने अपना जलवा भी दिखाया. फ़ाइनल में उन्होंने नौ रन देकर दो विकेट लिए और मुंबई इंडियंस की ख़िताबी जीत में अहम भूमिका निभाई.

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बेंगलुरू में चमकी किस्मत

लेकिन चहल की राह आसान नहीं थी. अगले दो साल मुंबई इंडियंस की टीम में रहते उन्हें सिर्फ़ एक मैच खेलने का मौक़ा मिला. इसका असर घरेलू क्रिकेट पर भी पड़ा और 2011-12 के बीच तीन सीजन में उन्होंने सिर्फ़ आठ मैच खेले और सिर्फ़ 16 विकेट ही ले पाए.

लेकिन चहल की किस्मत ने उस समय पलटा खाया जब वो रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू की टीम का हिस्सा बने. 2015 से लगातार दो साल वो अपनी टीम की ओर से सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले बने. इसी प्रदर्शन की बदौलत जून 2016 में उन्होंने ज़िम्बाब्वे के दौरे के लिए टीम में जगह मिली और उन्हें अपना पहला वनडे और अंतरराष्ट्रीय टी-20 खेलने का मौक़ा मिला.

उसके बाद इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टी-20 की टीम में उन्हें मौक़ा मिला और चहल ने विकेटों का छक्का लगाकर अपनी अहमियत साबित की. चहल के क़दम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कहाँ तक जाते हैं, इस पर सबकी नज़र रहेगी.

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