क्रिकेट: गेंद से भी तेज़ हैं गालियों की रफ़्तार

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मेलबर्न किकेट क्लब (एमसीसी) ने क्रिकेट नियमों में बड़े बदलाव की सिफ़ारिश करते हुए कहा है कि अब क्रिकेट में भी ख़राब व्यवहार और गाली गलौज को रोकने के लिए फ़ुटबाल की तरह रेड कार्ड और यलो कार्ड दिखाए जाएंगे.

अगर ये नियम पहले से लागू हो जाते तो बेंगलुरु टेस्ट में स्टीव स्मिथ के चेहरे की नकल उतारने वाले ईशांत शर्मा गेंदबाज़ी करने की जगह पवेलियन की सीट गर्म कर रहे होते.

कहा जाता है कि क्रिकेट में स्लेजिंग की विधा को कला बनाया है ऑस्ट्रेलिया की टीम ने.

एक मज़ाक ये भी प्रचलित है कि अगर आप ऑस्ट्रेलियाई टीम को चिढ़ाना चाहते हैं तो उनसे ये मत कहिए कि आप दुनिया के सबसे बड़े स्लेजर है.

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Image caption गेंद फेंकते हुए ऑस्ट्रेलिया के कासप्रोविक्स

आप उनसे ठीक इसका उल्टा कहिए. इससे ऑस्ट्रेलियाई टीम को शायद ज़्यादा परेशानी होगी.

अपशब्दों का सहारा

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में ग्राहम मेकेंज़ी और मार्क कासप्रोविक्स दो ऐसे तेज़ गेंदबाज़ हुए हैं जिन्होंने अपने विकेट पाने के लिए कभी अपशब्दों का सहारा नहीं लिया.

कासप्रोविक्स का निक नेम 'कास्पर' हुआ करता था जिस का मतलब था दोस्त तेज़ गेंदबाज़.

अपने करीबी लोगों के बीच वो अक्सर कहा करते थे कि मेरी तो इतनी साफ़ सुथरी छवि बना दी गई हैं कि मेरी तेज़ से तेज़ गेंद भी बल्लेबाज़ों को नहीं डराती.

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Image caption इयान चैपल और ग्रेग चैपल

सुनील गावस्कर अपनी किताब आइडल्स में लिखते हैं कि इयान चैपल के समय में ऑस्ट्रेलियाई टीम 'अगली ऑस्ट्रेलियन' कहलाई जाने लगी क्योंकि अगर विपक्षी बल्लेबाज़ ने मैदान में एक शब्द भी कह दिया तो पूरी टीम उसके पीछे लग जाती थी.

एलबीडब्लू आउट

इयान चैपल की इस कारिस्तानी में उनका सबसे अधिक साथ देते थे उनके छोटे भाई ग्रेग चैपल, एशली मैलट, विकेटकीपर रोडनी मार्श और तेज़ गेंदबाज़ डेनिस लिली.

1981 का मेलबर्न टेस्ट याद करिए जब लिली की अपील पर गावस्कर को एलबीडब्लू आउट दिया गया था.

आमतौर से अंपायर की उंगली उठने से पहले पवेलियन चल देने के लिए मशहूर गावस्कर ने उस फ़ैसले पर अपना विरोध प्रकट किया था.

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Image caption गावस्कर और डेनिस लिली

उन्होंने धीरे-धीरे पवेलियन की तरफ चलना भी शुरू कर दिया था.

मैदान से बाहर

जब वो लिली के पास से गुज़रे तो उन्होंने गावस्कर से कुछ ऐसी भद्दी बात कही कि उनका गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा.

वो इसने ज़्यादा क्रोधित हुए कि वो पीछे गए और नॉन स्ट्राइकिंग छोर पर खड़े हुए चेतन चौहान को लगभग ढकेलते हुए पवेलियन की ओर ले जाने लगे.

भला हो भारतीय मैनेजर विंग कमांडर एसएके दुर्रानी का जिन्होंने चौहान को मैदान से बाहर आने से रोका वर्ना भारत को उस मैच में हार स्वीकार करनी पड़ती.

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Image caption लॉर्ड्स के ग्राउंड पर इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेलते विवियन रिचर्ड्स

शेन वॉर्न मानते हैं कि स्लेजिंग औसत बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ एक अच्छा हथियार साबित हो सकता है.

लंबा छक्का

लेकिन सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा या विवियन रिचर्ड्स जैसे बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ इसका उल्टा असर पड़ता है.

एक काउंटी मैच में ग्लेमरगन के तेज़ गेंदबाज़ ग्रेग टॉम्स ने यही हिमाकत विवियन रिचर्ड्स के साथ की थी.

उन्होंने रिचर्ड्स को दो गेंदे फेंकी जिन्हें वो मिस कर गए. टॉम्स ने रिचर्ड्स को छेड़ा, 'शायद आपको पता न हो. ये लाल रंग की है. गोल है और इसका वज़न पांच आउंस है.'

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अगली ही गेद पर रिचर्ड्स ने इतना लंबा छक्का लगाया कि गेंद एक नदी में जा गिरी.

शरीफ खिलाड़ी

अब बोलने की बारी विवियन की थी, 'तुम्हें तो गेंद का रंग, स्वरूप और वज़न सब पता है. जाओ उसे ढूढ कर लाओ.'

कभी कभी दुनिया के सबसे शरीफ़ खिलाड़ियों के मुंह से भी कुछ ऐसे शब्द निकलते हैं कि आप मुस्कराए बिना नहीं रह सकते.

1976 में न्यूज़ीलैंड दौरे के दौरान न्यूज़ीलैंड के अंपायर मेज़बान टीम के पक्ष में लगातार फ़ैसले दे रहे थे.

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ऑकलैंड टेस्ट में जब भागवत चंद्रशेखर ने न्यूज़ीलैंड के विकेटकीपर केन वड्सवर्थ को बोल्ड किया तो वो अपील करने के लिए पीछे मुड़ने लगे.

'सिर तोड़ दूँगा'

अंपायर के मुंह से निकला, 'ही इज़ बोल्ड.' चंद्रशेखर ने अपनी कमर पर हाथ रख कर क्लासिक सवाल पूछा, 'आई नो ही इज़ बोल्ड बट इज़ ही आउट?'

भारत के रवि शास्त्री और ऑस्ट्रेलिया के माइक विटनी के बीच भी एक मज़ेदार नोकझोंक हुई थी. उस मैच में विटनी 12 वें खिलाड़ी थे.

जब शास्त्री ने एक रन लेने की कोशिश की तो विटनी ने गेंद विकेटकीपर को फेंकते हुए कहा, 'क्रीज़ में ही रहो वर्ना मैं तुम्हारा सिर तोड़ दूँगा.'

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Image caption ब्रायन लारा

रवि शास्त्री ने बिना एक सेकेंड जाया करते हुए जवाब दिया, 'अगर तुम उतनी अच्छी गेंदबाज़ी कर पाते जितना अच्छा तुम बोलते हो तो तुम अपनी टीम के 12वें खिलाड़ी नहीं होते.'

तेज़ गेंदबाज़

लेकिन कभी कभी ये नोकझोंक शालीनता के पार चली जाती है और खिलाड़ी अश्लीलता की सारी हदें पार कर देते हैं.

वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच के दौरान ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ ग्लेन मेग्रा ने यूँ ही तफ़रीह लेने के लिए रामनरेश सरवान से पूछा, 'ये बताओ ब्रायन लारा के ____ का स्वाद कैसा है?'

सरवान ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया, 'तुम्हारी बीबी इसे ज़्यादा बेहतर बता सकती है.'

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Image caption ऑस्ट्रेलिया को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में वर्ल्ड कप फाइनल में हराने के बाद रानातुंगे की टीम

ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के बीच हो रहे एकदिवसीय मैच में जब अर्जुना रानातुंगे ने कहा कि उन्हें रनर की ज़रूरत है तो स्टंप माइक्रोफ़ोन में विकेटकीपर इयान हीली को कहते सुना गया, 'ज़रूरत से ज़्यादा वज़न वाले थुलथुल व्यक्ति को रनर नहीं मिला करते.'

गाली गलौच

अर्जुन रानातुंगा से ही जुड़ा एक किस्सा और भी है कि जब ऑस्ट्रेलियाई उन्हें आउट नहीं कर पाए तो शेन वॉर्न ने योजना बनाई कि उन्हें क्रीज़ के बाहर खींचा जाए और उन्हें स्टंप करने की कोशिश की जाए.

जब ये कोशिश भी नाकामयाब हो गई तो विकेटकीपर हीली ने चिल्ला कर कहा, 'गुड लेंथ स्पॉट पर मार्स चॉकलेट रखो, तभी ये आगे आएगा.'

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Image caption क्लार्क को अपनी बदज़ुबानी के लिए 20 फ़ीसदी मैच फ़ीस गंवानी पड़ी थी

क्रिकेट में गाली गलौज इस हद का महत्वपूर्ण हो सकती है कि श्रीलंका दौरे से पहले ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ को बाकायदा एक बैठक बुलानी पड़ी जिसमें ये चिंता प्रकट की गई कि इस टीम में चुपचाप रहने वाले सदस्यों की संख्या कुछ ज़्यादा हो गई है.

आख़िरी बल्लेबाज़

उन्होंने कहा कि अगर आप कुछ नहीं भी बोलें लेकिन सीना चौड़ा करने के पुराने ऑस्ट्रेलियाई तरीको को याद करें और अपनी पहचान दर्ज कराएं.

2013 में ब्रिस्बेन टेस्ट के दौरान जब इंग्लेंड के आख़िरी बल्लेबाज़ जिमी एंडरसन बल्लेबाज़ी करने आए तो ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क ने उनकी आँखों में आँखे डाल कर कहा, 'अपनी बांह तुड़वाने के लिए तैयार रहो.'

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Image caption इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर शाउन ऊदल

क्लार्क को अपनी इस बदज़ुबानी के लिए अपनी 20 फ़ीसदी मैच फ़ीस गंवानी पड़ी.

इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर शाउन ऊदल कहते हैं, "अक्सर औसत या कम स्तर के खिलाड़ी ही आउट करने के लिए इस विधा का सहारा लेते हैं. आप को हमेशा याद रखना चाहिए कि वो ऐसा इसलिए कर रहे है क्योंकि आप उनसे बेहतर खिलाड़ी हैं. ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ मर्व ह्यूग्स को चैंपियन स्लेजर माना जाता है, लेकिन रिचर्ड हेडली की तुलना में उनका बॉलिंग रिकॉर्ड बहुत मामूली है जिन्होंने कभी स्लेजिंग तो दूर किसी बल्लेबाज़ से ऊँची आवाज़ में भी बात नहीं की."

दिलचस्प बात ये है कि मैदान पर इतनी रंगीन भाषा का इस्तेमाल करने के एक घंटे के बाद जब प्रतिद्वंदी ड्रेसिंग रूम में मिलते है तो इस तरह का आभास देते हैं जैसे बहुत दिनों बाद दो बिछड़े हुए दोस्त आपस में मिल रहे हों.

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