मिज़ोरम के फ़ुटबॉलर जो मुश्किलों के बावजूद बने विजेता

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एक ऐसी टीम जिसके पास ना ख़ुद का मैदान था, ना सुविधाएं, ना फ़ुटबॉल के लिए आधुनिक साज़ो-सामान उसने इस साल भारत की प्रतिष्ठित 'आई लीग' फ़ुटबॉल चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया है.

ये टीम है आइज़ोल एफ़सी क्लब. क्लब की जीत आने वाले दिनों में फ़ुटबॉल खिलाड़ियों और प्रेमियों के बीच चर्चा का केंद्र बनी रहेगी.

आइए नज़र डालते हैं इसी टीम के कुछ शानदार खिलाड़ियों पर...

महमूद आमना

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Image caption महमूद आमना

अल्बिनो गोम्स किंग्सले, जोमिंगलियाना राल्ते और टी लालनुनपुइया को आज से कुछ दिन पहले कोई नहीं जानता था. लेकिन आई लीग जीतने के बाद ये भारत के स्टार फुटबॉल खिलाड़ी बन गए हैं.

ये खिलाड़ी आइज़ोल क्लब की सफलता में बेहद योगदान देते हैं. लेकिन जिस खिलाड़ी का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में हैं वो सीरिया के रहने वाले हैं.

मिड फील्डर महमूद आमना ने साल 2001-2003 में अपना अल-हुर्रेया क्लब बनाया और भारत जाने का फ़ैसला किया. साल 2015-16 में उन्होंने स्पोर्टिंग गोवा क्लब का प्रतिनिधित्व किया.

हालिया जीत के बाद, उनके प्रशंसकों की कोई कमी नहीं है लेकिन इस शानदार खिलाड़ी को अपने वतन और घर वालों की याद सताती है.

आमना के परिवार वाले इस वक्त मिस्र में रिफ्यूज़ी कैंप में रह रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि सीरिया में एक न एक दिन शांति ज़रूर आएगी और वे अपने वतन लौट पाएंगे.

विलियम लालनुनफेला

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Image caption विलियम लालनुनफेला

मिज़ोरम के रहने वाले 21 साल के विलियम लालनुनफेला आइज़ोल एफ़सी क्लब में फॉरवर्ड प्लेयर की भूमिका अदा करते हैं.

विलियम ने साल 2013 में आई लीग अंडर 20 में सबसे ज्यादा स्कोर बनाकर स्टारडम का स्वाद चखा था.

इसके बाद उन्होंने पुणे अकादमी का प्रतिनिधित्व किया. गोलकीपर के रूप में करियर शुरू करने वाले विलियम स्ट्राइकर भी रह चुके हैं.

उन्होंने साल 2014 और 2015 में संतोष ट्रॉफी में मिज़ोरम का प्रतिनिधित्व भी किया है.

इसके बाद साल 2015 में उन्होंने आइज़ोल क्लब में जगह पा ली और आई लीग में अपना खेल दिखाया.

अल्बिनो गोम्स

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Image caption अल्बिनो गोम्स

23 साल के अल्बिनो ने अपना करियर स्पोर्टिंग गोवा क्लब से शुरू किया था जिसके बाद वे साल 2013 से 2016 तक सालगांवकर क्लब के साथ रहे.

गोवा में ही जन्म लेने वाले अल्बिनो को बचपन से ही फुटबॉल से प्यार था. गोम्स ने सालगांवकर क्लब के साथ मैनचेस्टर तक की यात्रा भी की.

अल्बिनो इंडियन सुपर लीग के 2015 सीजन में मुंबई सिटी एफ़सी के भी सदस्य रहे.

स्टीफन कॉन्टेंस्टाइन ने अल्बिनो को इंडिया अंडर 23 साइड के लिए चुना था जिसने साल 2016 के एफसी अंडर 23 क्वालिफ़ायर्स प्रतियोगिता में भाग लिया.

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के अनुभव की वजह से अल्बिनो आइज़ोल एफ़सी क्लब के एक अहम सदस्य बन गए हैं.

सेना राल्टे

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Image caption सेना राल्टे

सेना राल्टे के रूप में चर्चित 28 साल के डिफेंडर राल्टे पर आइज़ोल क्लब के कोच खालिद ज़मील की नजर पड़ी.

इसके बाद राल्टे ने क्लब ज्वॉइन किया. राल्टे ने अपना करियर इस्थर अक़ादमी से शुरू किया.

इसके बाद उन्होंने रॉयल वाहिंगदोह क्लब के लिए खेलना शुरू किया.

इसके बाद राल्टे साल 2014 के फेडरेशन कप में रॉयल वाहिंगदोह की ओर से खेले.

राल्टे को उनके सख्त रवैये और प्रभावशाली तकनीक के लिए जाना जाता है.

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