गुहा का इस्तीफ़ा, सामने आई BCCI की सच्चाई: कीर्ति आज़ाद

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मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा के क्रिकेट प्रशासक (सीओए) के पैनल से इस्तीफ़े को भारत के पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आज़ाद उचित क़दम मानते हैं. वे कहते हैं कि गुहा के इस्तीफ़े ने फिर से भारतीय क्रिकेट की गंदगी को सबके सामने ला दिया है.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "उनका फ़ैसला सही है. कम से कम उन्होंने हिम्मत तो दिखाई और सामने आकर सच्चाई को सबके सामने रखा. एमएस धोनी, सुनील गावस्कर और सौरव गांगुली जैसे लोगों के हितों के टकराव के बारे में बताया. अपने देश में लोग संस्था से बड़े हो जाते हैं, जबकि दुनिया भर में लोग जानते हैं कि संस्था से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं हो सकता."

धोनी-गावस्कर पर बरसे गुहा, कुंबले का किया बचाव

रामचंद्र गुहा ने अपने इस्तीफ़े में भारतीय क्रिकेट के अंदर सुपरस्टार कल्चर की भी बात की है. पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के साथ ए श्रेणी का अनुबंध क्यों किया गया जबकि वे टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं.

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इसके अलावा गुहा ने अपने पत्र में ये भी बताया कि सुनील गावस्कर के क्रिकेट कमेंटेटर होने के साथ साथ खिलाड़ियों का प्रबंधन देखने वाली कंपनी भी चला रहे हैं जो अनैतिक आधार पर लाभ पहुंचाने जैसा मामला है. इसके अलावा सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे क्रिकेटरों का उदाहरण देते हुए उन्होंने हितों के टकराव का मुद्दा उठाया है.

टूथलेस टाइगर

भारतीय क्रिकेट को लंबे अरसे से कवर करते आ रहे वरिष्ठ क्रिकेट पत्रकार चंद्रशेखर लूथरा बताते हैं, "रामचंद्र गुहा ने अपने पत्र में जितने सवाल उठाए हैं, वो सबके सब प्रासंगिक हैं. उन्होंने दमदार तरीके से उन पहलुओं को सामने रखा है, जो बताता है कि भारतीय क्रिकेट की कामकाजी शैली में कितने झोल हैं."

कीर्ति आज़ाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अंदर के कामकाज की शैली पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं. हालांकि वे ज़ोर देकर ये भी कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस काम के लिए क्रिकेट प्रशासकों का पैनल बनाया था, उसने भी निराश किया है. वे कहते हैं, "जो अपेक्षा इन लोगों से रखी गई थी, वो पूरी नहीं हुई. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो पैनल बनाया है उनकी स्थिति टूथलेस टाइगर जैसी हो गई है. इन्हें छह महीने का वक्त मिला था, लेकिन वे अपना काम पूरा नहीं कर पाए."

अब बीसीसीआई को कंट्रोल करेंगे विनोद राय

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी, 2017 को भारत के सीएजी रहे विनोद राय की अध्यक्षता में इतिहासकार रामचंद्र गुहा, आईडीएफ़सी के अध्यक्ष विक्रम लिमये और पूर्व महिला क्रिकेटर डायना इडुलजी का क्रिकेट प्रशासकों का पैनल बनाकर उन्हें बीसीसीआई का काम देखने को कहा था.

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Image caption बीसीसीआई को कंट्रोल करने वाले पैनल के प्रमुख विनोद राय

कीर्ति आज़ाद क्रिकेट प्रशासकों के पैनल (सीओए) के प्रमुख विनोद राय की भूमिका पर भी सवाल उठाते हैं, "विनोद राय तो बीसीसीआई के पिट्ठू बन गए हैं. जिस काम के लिए उन्हें भेजा गया वो तो उन्होंने नहीं किया है. वे लंबे समय तक सरकारी अधिकारी रहे हैं, उनकी आदतें भी वैसी ही हैं."

चंद्रशेखर लूथरा के मुताबिक विनोद राय की अध्यक्षता वाली समिति के गठन से पहले लोढ़ा समिति की अनुशंसाओं के तहत बोर्ड के अंदर सुधार की कवायद शुरू हो गई थी, लेकिन क्रिकेट प्रशासकों ने बीते चार महीने में कुछ ख़ास नहीं किया.

बीसीसीआई एक बिगड़ैल बच्चा

ऐसे में भारतीय क्रिकेट को चलाने का तरीका कैसे पारदर्शी हो पाएगा, इसके जवाब में कीर्ति आज़ाद कहते हैं, "बीसीसीआई एक बिगड़ैल बच्चा है, उसके हाथ से खिलौना ले लो तो वो रोता है. आज वह मुंह चिढ़ा रहा है सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट हाथ पर हाथ धड़े बैठेगी नहीं, कुछ तो करेगी."

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वैसे गुहा का इस्तीफ़ा वैसे समय में हुआ है जब भारतीय क्रिकेट टीम चैंपियंस ट्रॉफ़ी में अपने पहले मुक़ाबले में पाकिस्तान से भिड़ने वाली है. ऐसे में क्या इस विवाद का असर टीम इंडिया पर नहीं पड़ेगा, ये पूछे जाने पर कीर्ति आज़ाद कहते हैं, "इस विवाद का असर टीम इंडिया पर नहीं पड़ेगा क्योंकि सब प्रोफेशनल हैं."

चंद्रशेखर लूथरा के मुताबिक टीम पहले से विराट कोहली और अनिल कुंबले के बीच खटास की ख़बरों का सामना कर रही है तो टीम पर ज़्यादा असर तो उस पहलू से पड़ेगा.

रामचंद्र गुहा ने अपने इस्तीफ़े में टीम इंडिया के कोच अनिल कुंबले का अनुबंध बढ़ाए जाने का मुद्दा भी उठाया है, उल्लेखनीय है कि बीसीसीआई ने भारतीय कोच पद के लिए आवेदन मांगे हैं और माना जा रहा है कि वीरेंद्र सहवाग इस होड़ में सबसे आगे हैं.

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