जब बांग्लादेश ने 'सचिन को रुलाया' था

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15 जून, 2017 को भारत और बांग्लादेश की टीमें चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के सेमी फ़ाइनल में आमने-सामने हैं. दोनों देशों के क्रिकेट प्रेमी अपनी-अपनी टीमों के लिए दुआ मांग रहे हैं. भारत का पलड़ा भारी माना जा रहा है. लेकिन बड़ी प्रतियोगिताओं में उलटफेर करने की बांग्लादेश की क्षमता से भी कोई इनकार नहीं कर रहा है.

कप्तान विराट कोहली भी कह रहे हैं कि वे बांग्लादेश को हल्के में नहीं ले रहे हैं. वैसे तो बांग्लादेश ने कई बार विश्व की धुरंधर टीमों को धूल चटाई है.

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लेकिन 10 साल पहले वेस्टइंडीज़ में हुए विश्व कप में बांग्लादेश के हाथों मिली हार को शायद ही सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज भी भूल पाए.

2007 के विश्व कप क्रिकेट की बात है. वेस्टइंडीज़ में हो रहे उस विश्व कप को मुझे कवर करने का मौक़ा मिला था. 17 मार्च का दिन दक्षिण एशिया की तीन टीमों के लिए अहम साबित होने जा रहा था.

एक ओर जहाँ भारत और बांग्लादेश की टीमें ग्रुप मुक़ाबले में आपस में भिड़ रही थी, वहीं दूसरी ओर एक अन्य ग्रुप में पाकिस्तान की टीम आयरलैंड की नौसिखिया टीम के सामने थी.

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प्रदर्शन से चौंकाने वाली टीम

लेकिन इस मैच के बाद जो होने जा रहा था, वो वर्षों तक भारतीय और पाकिस्तानी क्रिकेट को सताता रहा. जबकि बांग्लादेश की टीम ने बड़े मुक़ाबलों में अपने प्रदर्शन से चौंकाने का सिलसिला जारी रखा.

पोर्ट ऑफ़ स्पेन में हो रहे मुक़ाबले में बांग्लादेश की टीम ने भारत की मज़बूत टीम को धूल चटा दी, तो पाकिस्तान की टीम आयरलैंड के हाथों पिट गई.

और उसके एक दिन बाद 18 मार्च को पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कोच बॉब वूल्मर अपने कमरे में मृत पाए गए. कई दिनों और महीनों तक बॉब वूल्मर की मौत क्रिकेट की दुनिया पर छाई रही.

लेकिन इस सदमे से इतर विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमियों को भी बड़ा सदमा लगने वाला था. उस विश्व कप में चार ग्रुप बने थे, जिसकी टॉप दो टीमें सुपर-8 में जाती थी और 8 में चार 4 टीम सेमी फ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाई करती थी.

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बांग्लादेश ने बिगाड़ा समीकरण

लेकिन किसे पता था कि एशिया की दो शक्तिशाली टीमें ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो जाएंगी और उन्हें सुपर-8 में जाने का मौक़ा भी नहीं मिलेगा. भारत के सुपर-8 में न पहुँचने की वजह थी पहले ही मैच में बांग्लादेश के हाथों मिली हार, तो पाकिस्तान भी आयरलैंड से हारने के बाद सुपर-8 में नहीं पहुँच पाए.

मुझे याद है अगले ही ग्रुप मैच में भारत ने बरमूडा को 257 रनों के बड़े अंतर से मात दी थी. अब बांग्लादेश को अपना अहम मैच श्रीलंका से खेलना था. मैं उस मैच के दौरान पोर्ट ऑफ़ स्पेन के क्वींस पार्क ओवल स्टेडियम में मौजूद था. भारत की जीत के बाद ग्रुप के समीकरण कुछ बदले थे और बांग्लादेश इस मैच में अच्छा प्रदर्शन करना चाह रहा था.

लेकिन ऐसा हुआ नहीं. बारिश से प्रभावित इस मैच में बांग्लादेश की टीम श्रीलंका से बुरी तरह हारी. रन रेट में बांग्लादेश काफ़ी पिछड़ गया था. क्रिकेट की प्रतिद्वंद्विता क्या न कराए. बांग्लादेश निराश था, वहाँ के क्रिकेट प्रेमी निराश थे और ऐसे में मुझे बांग्लादेश के क्रिकेट प्रेमियों की नाराज़गी भी झेलनी पड़ी, जब वे मेरे एक सवाल से बुरी तरह चिढ़ गए.

क्रिकेट में ऐसा होना कोई नहीं बात नहीं थी, लेकिन टीवी के बढ़ते प्रभाव के बीच ये एक नई तरह की प्रतिद्वंद्विता थी, जो आगे चलकर और भी तीखी होने वाली थी.

उस समय होटल रूम में श्रीलंका के खिलाड़ी जहाँ जश्न के मूड में थे, तो बांग्लादेश की टीम की नज़र भारत और श्रीलंका के मैच पर थी. भारत जीता, तो बांग्लादेश की उम्मीद ख़त्म और श्रीलंका जीता, तो बांग्लादेश की जय जय. श्रीलंका की टीम दो जीत के बाद सुपर-8 के दरवाज़े पर थी, तो बांग्लादेश को आख़िरी मैच में बरमूडा को हराने का पूरा भरोसा था.

श्रीलंका मैच में धुली उम्मीदें

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इसलिए दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों की नज़र भारत-श्रीलंका मैच पर थी. पोर्ट ऑफ़ स्पेन में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं. भले ही भारत से उनका जुड़ाव उस तरह का न हो, लेकिन क्रिकेट में भारत का झंडा लहराते आपको मिल जाएँगे. बांग्लादेश में श्रीलंका की जीत के लिए प्रार्थनाएँ की जा रही थी, तो बांग्लादेश के कई खिलाड़ी भी स्टेडियम में भारत-श्रीलंका मैच का मज़ा लेने के लिए मौजूद थे.

23 मार्च 2007 का दिन. पोर्ट ऑफ़ स्पेन की सड़कें भारतीय तिरंगे से पटी पड़ी थी. स्टेडियम में घुसने के लिए सुबह से लाइन लगी थी. रंग-बिरंगे कपड़ों में भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के साथ-साथ श्रीलंकाई क्रिकेट प्रेमी भी मौजूद थे. ये अलग बात है कि भारतीयों के मुक़ाबले उनकी संख्या काफ़ी कम थी. साथ ही बांग्लादेश के क्रिकेट प्रेमी श्रीलंका की जीत की कामना लिए हुए मौजूद थे.

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मैच दो टीमों के बीच था, लेकिन तीसरी टीम दम साधे इसमें अपना भविष्य भी देख रही थी.

भारत ने टॉस जीता, फ़ील्डिंग चुनी और श्रीलंका ने पहले खेलते हुए 6 विकेट पर 254 रन बनाए. जवाब में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरभ गांगुली, वीरेंदर सहवाग, युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी के रहते भारत की पूरी टीम 185 पर आउट. कप्तान राहुल द्रविड़ ने आख़िर-आख़िर तक बहुत कोशिश की. सबसे ज़्यादा 60 रन भी बनाए, लेकिन भारतीय टीम हार गई.

दूर बांग्लादेश में पटाखे छूट रहे थे, तो स्टेडियम में श्रीलंका के समर्थकों से ज़्यादा बांग्लादेश के समर्थक झूम रहे थे और बड़ी संख्या में मौजूद भारतीय समर्थकों के पास अपने क्रिकेटरों को कोसने के सिवा कोई चारा नहीं था.

कमरे से नहीं निकले सचिन

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सिर झुकाकर भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का मैदान से बाहर जाने का दृश्य मीडिया की सुर्ख़ियों में रहा. उसी रात में हम उस होटल में पहुँचे जहाँ भारतीय टीम रुकी हुई थी, इस आस में कि शायद कोई क्रिकेटर अपनी पीड़ा हमसे भी शेयर करे.

होटल की लॉबी में बांग्लादेश और श्रीलंका के क्रिकेटर मौजूद थे. श्रीलंका से ज़्यादा ख़ुश बांग्लादेश के क्रिकेटर नज़र आ रहे थे. पार्टी जैसा माहौल था. संजय जगदाले उन दिनों भारतीय टीम के मैनेजर थे. बहुत आग्रह करने पर वे अपने होटल के रूम से बाहर आए. हमारे साथ वरिष्ठ पत्रकार सुनंदन लेले भी थे, जो सचिन तेंदुलकर के काफ़ी क़रीबी समझे जाते थे.

संजय जगदाले ने बताया कि कैसे भारतीय खिलाड़ी हताश और निराश हैं.

सचिन तेंदुलकर अपने कमरे से नहीं निकल रहे थे और हमें ये भी पता चला कि सचिन तेंदुलकर समेत कई खिलाड़ी हार के बाद रोए भी थे.

भारतीय कैंप का माहौल ग़मगीन था. कोई खिलाड़ी होटल के कमरे से निकलने को तैयार नहीं था.

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इसके बाद भारतीय टीम को स्वदेश में लोगों का ग़ुस्सा झेलना पड़ा. कई जगह खिलाड़ियों के पोस्टर जलाए गए और सबसे ज़्यादा निशाने पर आए सचिन तेंदुलकर.

सचिन तेंदुलकर ने 2007 के विश्व कप पर कई बार बात की है और बताया है कि वे उस दौर को अपने करियर का सबसे बुरा दौर मानते हैं.

ये अलग बात है कि बांग्लादेश की टीम सुपर-8 से आगे नहीं बढ़ पाई. लेकिन उसने सचिन जैसे सुपर स्टार का सपना ज़रूर तोड़ दिया था. लेकिन चार साल बाद जब 2011 में विश्व कप हुआ, तो सचिन तेंदुलकर का वो सपना पूरा हुआ, जो लंबे समय से अधूरा था. भारत की टीम दूसरी बार विश्व चैम्पियन बनी. जिसने 2007 के विश्व कप की बुरी याद को धो दिया.

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