'...बस दिन अच्छा हो, ट्रॉफी भारत ही जीतेगा'

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भारत और पाकिस्तान के बीच मुक़ाबला हमेशा बड़ा होता है.

चैंपियंस ट्रॉफी का फ़ाइनल मुक़ाबला भी बड़ा ही होगा. भारत के जीतने की अच्छी संभावनाएं हैं.

भारत की टीम खेल भी बहुत अच्छा रही है. खेल के हर डिपार्टमेंट में उन्होंने हल्ला बोला हुआ है. बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग हर चीज बहुत बेहतरीन कर रहे हैं.

भारत और पाकिस्तान के मैच में थोड़ी अलग सी बात होती है. वजह ये है कि एक तो सारा देश देख रहा होता है.

भारत-पाकिस्तान के रिश्ते कैसे हैं, ये सब जानते ही हैं. मैं समझता हूं कि इसी वजह से मैच को लेकर ज्यादा हाईप होती है लेकिन आखिरकार ये एक क्रिकेट का मैच ही है.

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बेमानी हैं आंकड़े

फ़ाइनल में आंकड़े ज्यादा मायने नहीं रखते हैं. दोनों टीमों की तुलना करें तो भारतीय टीम का पलड़ा बहुत भारी है. लेकिन जब तक आखिरी गेंद नहीं हो जाती, आप खुद को जीता हुआ नहीं मान सकते हैं.

भारत ने पिछले मैचों में जिस टीम को खिलाया है, वो अच्छी टीम है. मेरे विचार में दो स्पिनर्स को खिलाना चाहिए.

हार्दिक पांड्या को गेंदबाज़ी करते वक्त समझ दिखानी चाहिए. अगर वो कहीं मार खा जाते हैं तो पांचवां बॉलर खुल जाता है. अगर किसी और गेंदबाज़ का दिन ख़राब हुआ तो बीस ओवर ख़राब हो जाते हैं तो रिकवरी करना मुश्किल हो जाता है.

टॉस की अगर बात करें तो विराट कोहली लक्ष्य का पीछा करना ज्यादा पसंद करते हैं. विकेट को वो देखेंगे, हालात देखेंगे और उसके हिसाब से तय करेंगे. अगर विकेट पर घास होगी तो वो शायद पहले गेंदबाज़ी करेंगे.

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सही रणनीति जरूरी

अगर शुरुआत में जल्दी विकेट ले लेते हैं तो पाकिस्तान को दबाव में ले सकते हैं. बल्लेबाज़ी में भारत को इंग्लैंड के हालात के मुताबिक रणनीति बनानी चाहिए. शुरुआत में विकेट नहीं गिरते हैं तो बाद के बल्लेबाज़ों के लिए स्थितियां आसान हो जाती हैं.

हमारी ज्यादा नज़र ओपनरों पर होती है. शुरुआत अच्छी होती है तो टीम के लिए राहत की बात होती है. नबंर तीन पर बहुत मजबूत बल्लेबाज़ विराट कोहली हैं. उसके बाद अनुभवी युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी हैं.

पाकिस्तान के शुरुआती बल्लेबाज़ भारत के लिए ज्यादा ख़तरा नहीं हैं. मोहम्मद हफीज और शोएब मलिक से भारत को सावधान रहने की जरूरत है. ये दोनों अनुभवी खिलाड़ी हैं. पाकिस्तान के कप्तान सरफराज़ के लिए भी रणनीति बनाने की जरूरत है.

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पाकिस्तान के गेंदबाज़ सेटल हो चुके हैं. उन्होंने विकेट निकाले हैं और मैच जीते हैं. इससे उनका भरोसा भी बढ़ा है. ज़ुनैद अली और हसन ख़ान अच्छी गेंदबाज़ी कर रहे हैं लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ उनका मुक़ाबला कर सकते हैं.

भारत के लिए बस दिन अच्छा होना चाहिए. किस्मत साथ रही तो ट्रॉफी भारत ही जीतेगा.

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(मदन लाल ने भारत के लिए 39 टेस्ट और 67 वनडे मैच खेले हैं. वो साल 1985 में पाकिस्तान को फ़ाइनल में हराकर बेसेन एंड हेज़ेज़ ट्रॉफी जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे. वो भारतीय टीम के कोच भी रह चुके हैं. ये उनकी निजी राय है.)

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