डिविलियर्स ने पूछा कब तक खेलोगे, कोहली ने क्या दिया जवाब?

  • 17 जून 2017
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इस रविवार जब विराट कोहली चैंपियंस ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में अपनी टीम की अगुवाई कर रहे होंगे, कुछ लोग ज़रूर ख़ुद को उनकी जगह देखना पसंद करेंगे. बेशक भारतीय कप्तान भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 'द ओवल' के मैदान पर होने वाले इस मुक़ाबले की संभावनाओं का लुत्फ़ ले रहे होंगे.

लेकिन तीन महान क्रिकेटर और कप्तान- इंग्लैंड के ऑइन मॉर्गन, ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ और न्यूज़ीलैंड के केन विलियम्सन इस टूर्नामेंट में हार-जीत के मामूली फ़ासले पर सोचते हुए यह मैच देख रहे होंगे.

दक्षिण अफ़्रीका का कप्तान होने के नाते मैं जानता हूं कि वे कैसा महसूस कर रहे होंगे.

यूं ही चलते रहे विराट तो पीछे छूट जाएंगे सचिन

जब बाहर हुई टीमों के निराश कप्तान तमाम इलज़ामों और सोशल मीडिया की आंच से जूझ रहे हैं, विराट अपनी टीम को फ़ाइनल तक ले गए हैं और एक बार फिर इस बड़े मुक़ाबले के केंद्र में खड़े हैं.

बेमिसाल हैं कोहली

28 साल की उम्र में वह अपनी ताक़तों के चरम पर हैं और आज की तारीख में बेशक दुनिया के बेमिसाल क्रिकेटर हैं.

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रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए बीते छह आईपीएल टूर्नामेंट में मुझे उनके साथ खेलने का सौभाग्य मिला. मैंने बतौर बल्लेबाज़ उनका असाधारण हुनर और वह ऊर्जा और गहनता करीब से देखी जो वह खेल में लाते हैं.

क्रीज़ पर वह एक मुक़म्मल सर्जन होते हैं; फ़ोकस और मेहनत के साथ गेंदों को गैप में खेलने वाला और दबाव में शांत रहने वाला. वह हमेशा ज़्यादा रन जुटाने और खेल को अपनी गिरफ़्त में लेने के सही समय का अंदाज़ा लगाते रहते हैं.

वनडे रैंकिंग में टॉप पर

उनके रनों के भारी अंबार ने किसी बहस की गुंजाइश नहीं छोड़ी है. 183 वनडे मैचों में विराट ने 54.47 की औसत से 8008 रन बनाए हैं और इसी हफ़्ते वह आईसीसी बल्लेबाज़ों की वनडे रैंकिंग में पहले नंबर पर पहुंच गए हैं.

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पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नाबाद 81 रन, दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ 'करो या मरो' वाले मुक़ाबले में नाबाद 76 रन और बांग्लादेश के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में 96 रन बनाकर टूर्नामेंट में वह अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं.

भारत का बल्लेबाज़ी क्रम कई प्रतिभाओं से सुसज्जित है, लेकिन पाकिस्तान के गेंदबाज़ों को विराट को नियंत्रित करने की अहमियत का एहसास होगा.

उनके पास अद्भुत प्राकृतिक हुनर है, लेकिन बड़े क्रिकेटरों की तरह उनका यह हुनर कड़ी मेहनत करने की इच्छा पर टिका हुआ है.

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लोगों ने यह देखा नहीं है, लेकिन ट्रेनिंग के समय वह दृढ़ संकल्पी और निर्मम होते हैं और खेल के हर क्षेत्र में तब तक अभ्यास करते हैं, जब तक पूरी तरह सहज न महसूस करने लगें. मैंने उन्हें भौंहों से पसीना टपकने तक कई-कई बार स्ट्रोक्स का अभ्यास करते देखा है. वह संतुष्ट होने से पहले नहीं रुकते.

दबाव से उबरना सीख चुके कोहली

सुनहरे हुनर और मजबूत संकल्प के अलावा विराट ने क़द बढ़ने के साथ दबाव से उबरना भी सीख लिया है.

अगर आप भारत के किसी भी शहर की सड़क से गुज़रें तो उनका चेहरा आपको तमाम होर्डिंग्स पर दिखेगा. 1.3 अरब की जनसंख्या वाले देश में बाज़ार का सबसे योग्य और शायद सबसे लोकप्रिय हस्ती होना अपने क़िस्म का दबाव लेकर आता है. वह 'सेल्फ़ी' मांगने वाले लोगों से बचकर बाहर नहीं निकल सकते. उनका हर क़दम, शब्द और इशारा लगातार प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर छापा जाता है.

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बांग्लादेश के ख़िलाफ़ एक विकेट के जश्न में जब उन्होंने जीभ बाहर निकाल दी तो यह बात ट्विटर पर छा गई.

विराट ने इन वास्तविकताओं के साथ जीना सीख लिया है. उन्होंने उन हवाई उम्मीदों के बोझ को स्वीकार करना भी सीख लिया है कि हर बार उन्हें रन बनाने चाहिए और हर बार उनकी टीम जीतनी चाहिए.

शांत भी, क्लिनिकल भी

लेकिन दुर्भाग्य से विराट या किसी और के लिए भी हमेशा चीज़ें ठीक नहीं होतीं. तो जब ऐसा मौक़ा आता है, वह अपनी गहरी प्रतिबद्धता पर वापस आते हैं, पहले से भी ज़्यादा मेहनत करते हैं, तब तक करते हैं चीज़ें बदल नहीं जातीं और दोबारा उन भारी उम्मीदों को पूरा करते हैं.

उनके करियर में ऐसे मौक़े आए हैं, जब सफलता के लिए उनका दृढ़ संकल्प मैदान में गुस्से और उतार-चढ़ाव के तौर पर सामने आया, लेकिन ऐसी घटनाएं अब बहुत कम हो गई हैं. वह अब एक शांत, क्लिनिकल और आत्मविश्वासी क्रिकेटर के तौर पर उभरे हैं जिसका हर स्थिति पर काबू है.

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मैच और अभ्यास में वह धीर-गंभीर रहते हैं. लेकिन उनके पास खेल से ख़ुद को स्विच ऑफ कर लेने की बेशक़ीमती क्षमता भी है. तब वह आराम करते हैं, हंसते हैं और हर मौके पर मज़ाक करते हैं.

वह लोगों को शरारती उपनामों से बुलाने का लुत्फ़ लेते हैं और हर स्थिति में मज़ाक खोज सकते हैं. जब हम किसी फ़ोटोशूट में हों और पहले फ़ोटोग्राफ़र के इंतज़ार करें, फिर ये सुनें कि कैसे और कहां पोज़ करना है, फिर कुछ और इंतज़ार करें और फिर ये बताया जाए कि हमें सब कुछ फिर से शुरू करना है, तब भी वह मज़ाक के मौके खोज लेते हैं.

मज़ाक के मौक तलाश लेते हैं

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ऐसे मौकों पर जब उनके कुछ साथी खिलाड़ी संयम बनाए रखने में मुश्किल महसूस करते हैं, विराट कुछ मज़ाकिया चीज़ खोज लेते हैं और चतुराई से माहौल बदल देते हैं.

तो उनका आगे बढ़ना जारी है और आईसीसी की प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम की कामयाबी भी जारी है.

थोड़े ही दिन पहले, एक आईपीएल मैच के बाद की सुबह मैं नाश्ते के लिए होटल पहुंचा तो देखा कि विराट अकेले बैठे हुए थे.

हमने खेल के बारे में बातें शुरू कर दीं, थोड़ा बहुत दबाव और उम्मीदों के बारे में भी. लेकिन हमने सबसे ज़्यादा बात की, बतौर कप्तान अपनी टीम के लिए खेलने के शानदार सौभाग्य के बारे में. हम सहमत हुए कि हमें हर एक पल का मज़ा पूरी ईमानदारी से लेना चाहिए, जो अब भी ज़िंदग़ी जीने का एक ख़ास और शानदार तरीका है.

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विराट मुझसे पांच साल छोटे हैं. मैंने उनसे पूछा, 'आपको क्या लगता है, कब तक खेलोगे?'

उन्होंने चमकती आंखों के साथ तुरंत जवाब दिया. 'मैं हमेशा खेलूंगा.'

उनके चेहरे पर एक चौड़ी मुस्कान तारी हो गई. तो रविवार को 'द ओवल' के मैदान पर उनका 'हमेशा' जारी है.

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