कौन हैं भारतीय गेंदबाज़ों को रुलाने वाले फ़खर ज़मान

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खेल के मैदान में बड़ा सितारा वो होता है जो अहम मौके पर अपनी भूमिका को दमदार ढंग से निभाए.

जब वो सितारा पाकिस्तान का हो तो वो भारत के ख़िलाफ़ किसी मुक़ाबले पर चूकना नहीं चाहता.

पाकिस्तानी बल्लेबाज़ फ़खर ज़मन ने चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल को वो अहम पड़ाव बना लिया और भारत के ख़िलाफ़ एक ताबड़तोड़ शतक बना दिया.

इस टूर्नामेंट से पहले क्रिकेट की दुनिया ने फ़खर ज़मन का नाम शायद ही किसी ने सुना होगा. इसी टूर्नामेंट में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया.

अपने पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ 31 रन, उसके बाद श्रीलंका के ख़िलाफ़ फ़खर ने 50 रन बनाए.

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घरवालों की चाहत

सेमीफ़ाइनल में अज़हर अली के साथ शतकीय साझेदारी निभाते हुए फ़खर ने 57 रन बनाए और फ़ाइनल में उन्होंने 106 गेंदों पर 114 रन ठोके.

ज़मान ने अपनी पारी में 12 चौके और तीन छक्के जमाए.

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उनकी बल्लेबाज़ी को देखते हुए स्टारस्पोर्ट्स पर लाइव कमेंट्री कर रहे सुनील गावस्कर ने कहा कि ज़मान ने फ्रंट फ़ुट और बैकफ़ुट पर कमाल के शाट्स खेले और मैदान के दोनों तरफ़ ब़खूबी खेले.

ये जानना बेहद दिलचस्प है कि क्रिकेट के मैदान में कमाल दिखाने वाले फ़खर ज़मन के घर वाले नहीं चाहते थे कि वो क्रिकेट खेलें.

पाकिस्तान के अशांत इलाके ख़ैबर पख्वातून के कैटलांग में जन्मे फ़खर के पिता सरकारी वन्यजीव संरक्षण एजेंसी में काम करते थे और एक आम पिता की तरह वे यही चाहते थे कि बेटा पढ़े लिखे और सरकारी नौकरी में चला जाए.

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नौसैनिक फ़खर ज़मन

क्रिकेट खेलने को लेकर डांट डपट सुनने के बाद फ़खर ज़मान ने नौकरी करने का मन बनाया लिया और हायर सेकेंडरी स्कूल की तालीम पूरी करने के बाद पाकिस्तान की नौसेना में शामिल हो गए.

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2007 में फ़खर पाकिस्तान की नौसेना में सेलर बने. तब पाकिस्तानी नौसेना की क्रिकेट टीम भी थी और फ़खर वहीं खेलने लगे. उस टीम के कोच थे आज़म ख़ान उन्होंने सबसे पहले फ़खर की प्रतिभा को पहचाना.

इसके बाद फ़खर का मन क्रिकेट में रमने लगा और 2013 में उन्होंने नौसेना छोड़ दिया. हालांकि परिवार को उनके नौकरी से होने वाली आमदनी की ज़रूरत थी. लेकिन फ़खर ने तय कर लिया था कि क्रिकेट में मुकाम बनाना है.

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आक्रामक अंदाज़

इसी दौरान पाकिस्तानी क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज़ यूनुस ख़ान से उनकी मुलाकात हुई औऱ उन्होंने फ़खर को अपने इलाके की घरेलू टीमों से खेलने को कहा. मरदान, खैबर पख्वातून, एबटाबाद, ब्लूचिस्तान की टीमों से खेलते हुए फ़खर तेजी से जगह बनाते गए.

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2016 में उन्हें पाकिस्तान सुपर लीग में खेलने का मौका मिला और उस टूर्नामेंट में वे सर्वाधिक रन बनाने वालों में शामिल थे. उनकी आक्रामक बल्लेबाज़ी ने उन्हें अगले साल ही पाकिस्तानी टीम में शामिल करा दिया.

अपने पहले ही टूर्नामेंट को फ़खर ने लगभग यादगार बना दिया है. ख़ास बात ये है कि वे बाएं हाथ से उस आक्रामक अंदाज़ में बल्लेबाज़ी करते हैं, जिस अंदाज़ के ओपनर कभी पाकिस्तान क्रिकेट की पहचान हुआ करते थे.

उम्मीद की जा रही है कि फ़खर ज़मान सईद अनवर और आमिर सुहैल वाली परंपरा को आगे बढ़ाएंगे.

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