'ये समय विराट कोहली का है, उसे एन्जॉय करने दो'

इमेज कॉपीरइट Getty Images

अनिल कुंबले ने एक साल बाद भारत के मुख्य कोच का पद छोड़ दिया. अनिल कुंबले ने कल एक ट्वीट में कप्तान विराट कोहली के साथ अपनी 'साझेदारी' आगे नहीं चल सकती थी.

कुंबले ने कहा कि कोहली को उनकी कोचिंग स्टाइल के बारे में 'ऐतराज़' था.

अनिल कुंबले की विदाई की कहानी यूं शुरू हुई थी...

कुंबले ने स्वीकारी कोहली से मतभेद की बात

अनिल कुंबले ने कप्तान से मतभेद और अपने इस्तीफे का एलान ट्विटर पर किया.

पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर और बिशन सिंह बेदी ने उनका समर्थन किया और कहा कि पिछले एक साल में उनका रिकॉर्ड ज़बरदस्त है जिसके दौरान भारत ने 17 टेस्ट मैच खेले, 12 जीते और केवल एक हारा.

लोगों को कुंबले से सहानुभूति हो रही है.

Image caption 18 साल के टेस्ट करियर में 619 विकेट लेने वाले कुंबले भारत के अधिक विकेट लेने वाले बॉलर हैं

कोच बनाम कप्तान मनमुटाव रविवार को ख़त्म हुए चैंपियंस ट्रॉफ़ी से पहले से चला आ रहा था. समझा ये जा रहा है कि कुंबले एक सख़्त अनुशासन वाले हैं जो कुछ खिलाड़ियों को नागवार गुज़र रहा था.

'अब सचिन, गांगुली और लक्ष्मण के कंधों पर टीम का भविष्य'

लेकिन कोहली ने किया था अनबन से इनकार

दोनों व्यक्तियों के बीच तनाव की वजह जो भी रही हो इस पूरे मामले में कोच और कप्तान के सार्वजनिक तेवर अलग-अलग रहे हैं.

कुंबले ने अपने आपसी झगड़े को सार्वजनिक किया. ट्वीट में साफ़ लिखा भी कि 'उनके स्टाइल से टीम इंडिया के कप्तान खुश नहीं.'

दूसरी तरफ़ कप्तान कोहली ने 4 जून को चैंपियंस ट्रॉफी में भारत-पाकिस्तान के मुक़ाबले पहले कोच कुंबले के साथ दरार की रिपोर्ट को सिरे से ख़ारिज कर दिया था.

इस पूरे मामले में कोहली ने कोई भी ऐसा बयान नहीं दिया जिससे ग़ैर ज़िम्मेदारी की झलक आती हो. कोहली आक्रामक हो सकते हैं, उनके व्यवहार में जवानी की अकड़ भी झलक सकती है लेकिन उनके पास शिष्टाचार है.

उन्हें मालूम है कि कहाँ क्या कहना चाहिए और कहाँ चुप रहना चाहिए. ऐसा अनिल कुंबले के बारे में नहीं कहा जा सकता.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

चैम्पियंस ट्रॉफी के फ़ाइनल में हार के बाद के भाषण ने कोहली को कई पाकिस्तानी खिलाड़ियों और प्रशंसकों को अपना मुरीद बना दिया है.

कोहली ने हार में जिस स्पोट्समैनशिप का मुज़ाहिरा किया है उससे साफ़ समझ में आता है कि वो एक समझदार व्यक्ति हैं.

मुझे लगता है कि वो भारत और दुनिया भर के युवा पीढ़ी के लिए एक अच्छे रोल मॉडल बनना चाहते हैं. उनके ऑन-फ़ील्ड प्रदर्शन को जितना सराहा गया है, शायद उतना ऑफ़-फील्ड प्रदर्शन को नहीं सराहा गया है.

भरतीय क्रिकेट के इतिहास में कोच-कप्तान के झगड़े कई बार हो चुके हैं. ग्रेग चैपल बनाम सौरव गांगुली के बीच तनाव के बारे में काफ़ी लिखा जा चुका है.

भारतीय क्रिकेट में कप्तान का स्थान अहम होता है. मंसूर अली खान पटौदी, अजित वाडेकर, अज़हरुद्दीन, सौरव गांगुली और महिंदर सिंह धोनी जैसे बड़े दिग्गज कप्तान गुज़रे हैं.

सभी जानते हैं कि कप्तान की चलती है और अगर कप्तान अच्छे लीडर के साथ अच्छा खिलाड़ी भी हो तो उसकी बात अधिक मानी जाती है.

कप्तान बनाम कोच के रिश्ते के संतुलन पर टिपण्णी करते हुए एक बार ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कोच जॉन बुकानन ने कहा था, "कोच और कप्तान के बीच का रिश्ता विश्वास और सम्मान पर बनाया जाना चाहिए. यह निरंतर समझौता नहीं है लेकिन इसका मतलब यह है कि टीम के भीतर और बाहर एकता का एक 'सार्वजनिक' प्रदर्शन होता है."

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption कुंबले-कोहली के मतभेद, फैन्स में उदासी

कुंबले ने इस संतुलन को लगता है खो दिया. इसलिए इस्तीफा देकर अच्छा किया.

केवल ऐतराज़ इस पर है कि उन्हें कोहली के साथ अपने मतभेद को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए था. कुंबले एक लीजेंड हैं.

उन्होंने अपने दौर में खूब नाम कमाया. देश के क्रिकेट के इतिहास में सबसे अच्छे गेंदबाज़ों की लिस्ट में अपना नाम जोड़ा.

लेकिन कुंबले जी अब आपका समय नहीं रहा. अब समय है विराट कोहली का.

अभी वक़्त है दुनिया के अव्वल नंबर के बैट्समैन का. वो अब भी केवल 28 साल के हैं. कप्तान और खिलाड़ी की हैसियत से अभी उनका एन्जॉय करने का समय है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे