बैडमिंटन: एक नई ताकत बनकर उभरा भारत

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इसमें कोई शक़ नहीं है कि अभी तक बैडमिंटन की दुनिया में भारत का झंडा साइना नेहवाल और पीवी सिंधु ने ऊंचा किया है लेकिन अब बी साईं प्रणीत, किदांबी श्रीकांत और एचएस प्रणॉय जैसे पुरुष खिलाड़ी भी नए सितारे बनकर उभरे हैं.

ख़ास तौर पर के. श्रीकांत की बात की जाए तो ये भारतीय बैडमिंटन के लिए स्वर्णिम युग है.

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के. श्रीकांत ने दो साल पहले चाइना ओपन सुपर सीरिज़ का खिताब जीता था जिसमें उन्होंने बैडमिंटन के महान खिलाड़ी लिन डैन को हराकर बड़ा उलट फेर किया था लेकिन बाद में वो अपना फ़ॉर्म बरक़रार नहीं रख पाए थे.

2016 की रियो ओलंपिक के क्वार्टर फ़ाइनल से बाहर हुए श्रीकांत चोटिल होने के बाद दो तीन महीने के लिए बैडमिंटन कोर्ट से बाहर रहे.

लेकिन लौटने के बाद श्रीकांत तीन सुपर सीरीज़ के फ़ाइनल में पहुंचे और बैडमिंटन विश्व और आख़री दो सुपर सीरिज़ इंडोनेशिया ओपन और ऑस्ट्रेलिया ओपन दोनों में ही विजेता रहे हैं.

विश्व में ये उपलब्धि हासिल करने वाले सिर्फ़ पांच खिलाड़ी थे, लेकिन इस सूची में अब श्रीकांत छठे खिलाड़ी बन गए हैं.

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इसके अलावा बी साईं प्रणीत ने सिंगापुर ओपन में श्रीकांत को मात देकर खिताब जीता.

नंबर एक खिलाड़ी रहे चीन के ली चोंग वे और ओलंपिक के स्वर्ण पदक जीतने वाले चेन लॉन्ग को हराने वाले एच एस प्रणॉय भी उभरते सितारे हैं.

श्रीकांत ने चोटी के खिलाड़ी सोन वेन वो को लगातार दो प्रतियोगिताओं में हराकर अपना लोहा मनवाया है.

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विदेशी कोच का कमाल

पिछले तीन या चार महीने से इंडोनेशिया के दो कोच भारत के एकल वर्ग के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं.

भारतीय बैडमिंटन कोच और पूर्व खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद के साथ कोच मुलयो हेंडोयो के श्रीकांत और बी साईं प्रणीत को प्रशिक्षण दे रहे हैं.

दोनों खिलाड़ियों का कहना है कि ट्रेनिंग में आए बदलाव से खिलाड़ियों के स्टेमिना और फिटनेस में फ़र्क आया है.

खिलाड़ियों का मानना है कि इस ट्रेनिंग से लंबे मैचों में बने रहने में मदद मिली है.

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के. श्रीकांत और साईं प्रणीत ने अपने हाल के कई लंबे मैचों में कोर्ट में अच्छा खेल और स्टेमिना दिखाया है, इसमें इन खिलाड़ियों ने सही समय पर उपयुक्त शॉट खेलकर अपने खेल में आए निखार का भी प्रदर्शन किया है.

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श्रीकांत ने अपनी आक्रामकता के साथ नई ट्रेनिंग के स्टाइल का संयोजन किया है.

पिछली तीन प्रतियोगिता में के. श्रीकांत, साईं प्रणीत और एच एस प्रणॉय के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला.

इसलिए भविष्य में आने वाली प्रतियोगिताओं में भारतीय पुरुष खिलाड़ियों से काफ़ी उम्मीदें हैं.

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रैंकिंग में किदांबी श्रीकांत एक साल के अंदर 40 वें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंच गए थे लेकिन बड़ी सफलता के साथ काफ़ी दबाव भी बढ़ता है. श्रीकांत शुरुआत में बेहतर खेले लेकिन फिर चोटिल होने के बाद उनकी रैंकिंग गिरी थी जिसे उन्होंने फिर संभाला है.

विश्व स्तर पर चुनौती बहुत कड़ी है. अब वो स्थिति नहीं है कि जो चोटी के कुछ ही खिलाड़ी ही ख़िताब जीतते थे. अब टॉप खिलाड़ियों के बीच ज़बरदस्त मुकाबला है.

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रियो ओलंपिक खेलों में भारत के लिए रजत पदक हासिल करने वाली पी वी सिंधु के प्रदर्शन में भी काफ़ी उतार चढ़ाव देखा गया.

भारतीय बैडमिंटन की स्टार साइना नेहवाल ऑस्ट्रिलया ओपन में ज़्यादा कमाल नहीं दिखा सकीं. उनकी विश्व रैंकिंग भी नीचे गिरी है.

युगल वर्ग में पेंच

महिला युगल और मिश्रित युगल के लिए भारतीय खिलाड़ियों को मलेशियाई कोच ट्रेनिंग दे रहे हैं.

भारतीय बैडमिंटन में महिला युगल कमज़ोर कड़ी थी.

युगल में अश्विनी पोनप्पा और ज्वाला गुट्टा की जोड़ी में से ज्वाला गुट्टा के रिटायर होने के बाद अश्विनी के साथ सिक्की रेड्डी की जोड़ी ने उम्मीद जगाई है.

जबकि मिश्रित युगल में अश्विनी पोनप्पा के साथ 16 साल के सात्विक साईंराज के अच्छी जोड़ीदार साबित होने की उम्मीद है.

बढ़ी बैडमिंटन की लोकप्रियता

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इस समय क्रिकेट के बाद बैडमिंटन काफ़ी लोकप्रिय है.

जब पी वी सिंधु ने ओलंपिक में फ़ाइनल मैच खेला था तब कई करोड़ों लोगों ने टीवी पर इस मैच को देखा था इससे साफ़ होता है कि बैडमिंटन कितना लोकप्रिय हो रहा है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय स्टार खिलाड़ियों ने लोगों में बैडमिंटन के लिए दिलचस्पी बढ़ाई है.

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खिलाड़ियों को अब बेहतर स्पॉन्सरशिप मिल रही हैं, इससे भी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा है.

इंडियन बैडमिंटन लीग ने भी लोगों में खेल की लोकप्रियता बढ़ाई है. क्योंकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चमकने वाले भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जब इंडियन बैडमिंटन लीग में उतरते हैं तो लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ते हैं.

स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ़ इंडिया की तरफ़ से मिलने वाली मदद के अलावा पुलेला गोपीचंद ने भी भारतीय बैडमिंटन ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है.

वर्ल्ड चैंपियनशिप पर नज़र

ओलंपिक पदक विजेता पी वी सिंधु दो बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक विजेता रही हैं वहीं साइना नेहवाल एक बार रजत पदक जीत चुकी हैं.

अब सबकी नज़रें टिकी हैं अगस्त 2017 में होने वाले बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप पर.

(पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी दिनेश खन्ना से बीबीसी संवाददाता हरिता कांडपाल की बातचीत पर आधारित)

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