लोग कहते हैं मुझसे कोई शादी नहीं करेगा: नाहिदा ख़ान

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पाकिस्तानी क्रिकेटर नाहिदा ख़ान ने महिला विश्व कप में अपने मुल्क की तरफ़ से सबसे ज़्यादा रन बनाया है.

उन्होंने क्रिकेट में अपने इस मुकाम के लिए पिता का आभारी जताया है. नाहिदा ख़ान ने कहा, ''तमाम दिक़्क़तों के बावजूद मेरे पिता ने मेरा समर्थन किया. एक क्रिकेटर बनने में परिवार और हमारे समाज से ही मेरा विरोध हो रहा था.''

30 साल की नाहिदा पाकिस्तान में अशांत बलूचिस्तान प्रांत से हैं. बलूचिस्तान में उम्मीद की जाती है कि महिलाएं घर में ही रहें. हालांकि नाहिदा के पिता इस मामले में काफ़ी उदार थे.

उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा और आगे बढ़ाने में हमेशा मदद की. नाहिदा ने कहा, ''मेरे पिता कहते थे कि नाहिदा मेरी बेटी है और वह जो चाहती है उसे करेगी.'' नाहिदा ने यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन भी किया है.''

महिला क्रिकेट टीम का अगला मिशन वर्ल्ड कप

नाहिदा ने कहा, ''मेरे पिता ने मेरे संघर्षों की काफ़ी प्रशंसा की. एक क्रिकेटर बनने में जिस आत्मविश्वास की मुझे ज़रूरत थी उसे बढ़ाने में मेरे पिता ने कोई कमी नहीं छोड़ी.''

कुछ महीने पहले पिता की मौत

नाहिदा के पिता की कुछ महीने पहले मौत हो गई. नाहिदा को पिता खोने का काफ़ी ग़म है लेकिन वह इंग्लैंड में महिला विश्व कप में बेहतरीन खेल रही हैं.

नाहिदा ने कहा कि खेल के मैदान में बल्ला जब मेरे हाथ में होता है तो एक ही रणनीति काम करती है- ज़्यादा रन बनाओ और विपक्ष पर हमलावर रहो.

दक्षिण अफ़्रीका से पहले मैच में पाकिस्तान की बल्लेबाज़ी बिखर गई थी लेकिन नाहिदा ने अच्छी पारी खेली थी. उन्होंने 101 गेंदों पर 76 रन की पारी खेली. इसमें 9 चौके थे और एक छक्का.

हालांकि इस मैच को दक्षिण अफ़्रीका ने तीन विकेट से जीत लिया. पाकिस्तानी टीम की कप्तान सना मीर ने कहना है कि नाहिदा असली फाइटर हैं और वह मैदान में भी ऐसा ही करती हैं.

पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम का गठन पहली बार 1997 में हुआ था.

भारतीय महिला क्रिकेट टीम के गठन के 21 साल बाद पाकिस्तानी महिला क्रिकेट टीम का गठन हुआ था. पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम का गठन इतना आसान नहीं था.

हत्या की धमकी भी मिली

धार्मिक कारणों से मामला कोर्ट में गया, हत्या की धमकी मिली और सरकार ने सार्वजनिक रूप से खेलने पर भी पाबंदी भी लगाई.

इन सब के बावजूद 1997 में पहली बार पाकिस्तान की महिला टीम ने वर्ल्ड कप खेला. वर्ल्ड कप में पाकिस्तान का बहुत बुरा प्रदर्शन रहा है. 1997 के पहले वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ पाकिस्तान की पूरी टीम 27 रन के स्कोर पर आउट हो गई थी. लेकिन नाहिदा ख़ान ऐसी खिलाड़ी हैं जो पाकिस्तान के खेल में लगातार सुधार कर रही हैं.

क्वेटा में जन्मी नाहिदा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2009 में क़दम रखा था. यह मैच बांग्लादेश के बोगरा में श्रीलंका के ख़िलाफ़ हुआ था. 2010 के एशियन गेम में भी पाकिस्तानी टीम मेंबर के रूप में वह शामिल थीं. इसमें नाहिदा ने गोल्ड मेडल जीता था. शुरू में ख़ान को मिडल ऑर्डर में लाया गया था. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में एंट्री नाहिदा का सपना था.

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नाहिदा कहती हैं कि एक रूढ़िवादी परिवार से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम तक पहुंचना आसान नहीं था. इस मामले में नाहिदा ख़ुद को भाग्यशाली मानती हैं.

नाहिदा ने कहा, ''मेरी सफलता मेरे पिता के बिना संभव नहीं थी. उन्होंने उन सभी को चुप करा दिया जिन्होंने विरोध किया. मेरे पिता से लोग कहते थे कि मैं क्रिकेट खेलती हूं इसलिए मुझसे कोई शादी नहीं करेगा. मेरे परिवार के लोग आज भी कहते हैं कि मुझसे कोई शादी नहीं करेगा क्योंकि मैं लड़कों के कपड़े पहनती हूं और क्रिकेट खेलती हूं. इस तरह की लड़की हमलोग के परिवार में कोई नहीं चाहता.''

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