क्रिकेट कोच की रेस में शास्त्री आगे, 5 वजहें

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई की तीन सदस्यीय सलाहकार समिति सोमवार को मुंबई में बैठक कर टीम इंडिया के कोच पद के दावेदारों की समीक्षा करेगी.

बीसीसीआई को 10 लोगों ने इस पद के लिए अपने बायोडाटा भेजे हैं जिसमें रवि शास्त्री के अलावा वीरेंद्र सहवाग, टॉम मूडी, रिचर्ड पाइबस, डोडा गणेश, लालचंद राजपूत, लान्स क्लूसनर, राकेश शर्मा (ओमान राष्ट्रीय टीम के कोच), फ़िल सिमंस और उपेंद्रनाथ ब्रह्मचारी (इंजीनियर) शामिल हैं.

कप्तान विराट कोहली के साथ मतभेद के बाद पूर्व कप्तान और मुख्य कोच अनिल कुंबले ने वेस्ट इंडीज सिरीज़ से पहले इस्तीफ़ा दे दिया था जिसके बाद से यह पद खाली है.

बीसीसीआई के मुताबिक नए कोच का कार्यकाल दो साल का होगा.

क्रिकेट के जानकारों की राय में मौजूदा सूची में राकेश शर्मा, डोडा गणेश, उपेंद्रनाथ ब्रहमचारी और क्लूसनर रेस की शुरुआत में ही बाहर हो सकते हैं और सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की समिति छह दावेदारों का इंटरव्यू लेगी.

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रवि शास्त्री को सहवाग, मूडी, सिमंस, पाइबस और राजपूत से टक्कर मिल सकती है. सबसे अधिक टक्कर उन्हें मूडी से मिल सकती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय और फ्रेंचाइजी कोच के रूप में उनके पास बहुत अनुभव है. उनके मार्गदर्शन में श्रीलंका 2011 विश्व कप के फ़ाइनल में पहुंचा और सनराइजर्स हैदराबाद ने आईपीएल खिताब जीता.

कोच के लिए 55 वर्षीय शास्त्री को प्रबल दावेदार माने जाने की 5 वजहें -

1- कोहली के साथ अच्छा समीकरण

कोच पद पर रहते हुए भारतीय टीम को बेहतरीन नतीजे देने वाले कुंबले को इसलिए इस्तीफ़ा देना पड़ा क्योंकि कोहली से उनके मतभेद हो गए थे. लेकिन कुंबले से पहले टीम के डायरेक्टर रहे रवि शास्त्री की कोहली से अच्छी ट्यूनिंग है.

शास्त्री अगस्त 2014 से जून 2016 तक टीम निदेशक थे. शास्त्री ने शुरू में इस पद के लिए आवेदन नहीं किया था, लेकिन बीसीसीआई ने जब आवेदन स्वीकार करने की समय सीमा नौ जुलाई तक बढ़ाई तो इस पूर्व कप्तान ने आवेदन किया.

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2-बेहतरीन रिकॉर्ड

टीम डायरेक्टर के रूप में शास्त्री का कार्यकाल उम्दा रहा है. शास्त्री के कार्यकाल के दौरान भारत ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 2014 में सीमित ओवरों की सिरीज़ जीती.

2015 में विश्व कप और 2016 में विश्व टी-20 के सेमीफाइनल में पहुंची.

टीम इंडिया ने 22 साल के अंतराल के बाद श्रीलंका को टेस्ट सिरीज़ में उसके ही घर में हराया. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका को भी चार टेस्ट की सिरीज़ में 3-0 से मात दी और फिर एशिया कप जीता.

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3-मैन मैनेजमेंट स्किल्स

शास्त्री को उनके मैन मैनेजमेंट स्किल्स के लिए जाना जाता है. कुंबले ने इस्तीफ़ा देने के बाद सोशल मीडिया पर लिखी अपनी पोस्ट में लिखा था कि उन्हें ये जानकर हैरानी हुई कि कोहली को उनकी कोचिंग शैली को लेकर आपत्ति थी. खिलाड़ी भी उनसे कथित तौर पर बहुत खुश नहीं थे. दूसरी ओर, शास्त्री खिलाड़ियों का मनोबल ऊंचा रखने की कोशिश करते हैं और खिलाड़ी भी इसके लिए उनकी सराहना करते हैं.

पूर्व कप्तान गावस्कर भी मानते हैं कि शास्त्री की मैन मैनेजमेंट स्किल्स उन्हें इस होड़ में आगे रखती है. गावस्कर ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, "रवि शास्त्री ने 2014 में भारतीय क्रिकेट टीम को बदला. इंग्लैंड में भारत की हार के बाद बीसीसीआई ने उन्हें (शास्त्री) को टीम डायरेक्टर बनाया....इसके बाद टीम का भाग्य बदल गया. अब जब उन्होंने कोच पद के लिए आवेदन कर दिया है तो संभवत वो ही ये जिम्मेदारी पाने वाले हैं."

4- खिलाड़ियों का समर्थन

शास्त्री खुलकर खिलाड़ियों का समर्थन करते हैं और खिलाड़ी उनका.

बात चाहे महेंद्र सिंह धोनी की ख़राब फ़ॉर्म की हो या उन्हें (धोनी) कप्तान पद से हटाने की, शास्त्री खुलकर धोनी के पक्ष में आए और कहा कि मीडिया को धोनी जैसे महान क्रिकेटर की काबिलियत पर संदेह नहीं करना चाहिए.

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5- आंकड़ों का खेल

शास्त्री को होड़ में आगे बताने वाले उनके पक्ष में आंकड़े गिनाना भी नहीं भूल रहे हैं. 1981 से 1992 तक भारतीय टीम में खेलने वाले रवि शास्त्री ने 2014 में जब टीम डायरेक्टर का पद संभाला था, तब भारतीय टीम आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में 7वें स्थान पर थी और उनका कार्यकाल खत्म होते-होते भारतीय टीम दूसरे स्थान पर पहुँच गई थी.

शास्त्री के हालांकि पूर्व भारतीय कप्तान और क्रिकेट सलाहकार समिति के सदस्य सौरभ गांगुली के साथ अच्छे रिश्ते नहीं रहे हैं. शास्त्री ने पिछली बार कहा था कि जब उन्होंने स्काइप के ज़रिये कोच पद का साक्षात्कार दिया था तो तब गांगुली उपस्थित नहीं थे. इस पर गांगुली ने कहा था कि अगर शास्त्री की पद पाने में इतनी दिलचस्पी थी तो उन्हें साक्षात्कार के लिए खुद उपस्थित होना चाहिए था.

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