खुद के प्रदर्शन के अभी भी संतुष्ट नहीं हूं: सरदार सिंह

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Image caption सरदार सिंह अपने कोच रोलेंट ओल्टमैन के साथ

भारतीय हॉकी के पूर्व कप्तान सरदार सिंह को राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए चुना गया है. जिस समय पुरस्कार की घोषणा हुई सरदार सिंह बेंगलुरू के कैंप में थे.

बीबीसी हिंदी से ख़ास बातचीत में उन्होंने अपने खेल और अपने जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलू साझा किए. पढ़िए क्या कहा उन्होंने-

जब मुझे यह ख़बर मिली तो मैं कुछ टाइम के लिए शॉक हो गया लेकिन फिर लोगों के फ़ोन आने शुरू हुए. मेरे लिए ये इमोशनल मोमेंट था और मुझे खुद पर गर्व महसूस हो रहा है.

किसी भी खिलाड़ी के लिए ये पुरस्कार लेना लाइफ़टाइम अचीवमेंट से कम नहीं हैं. ये आपको और मोटिवेट करती हैं कि आने वाले समय में आप और अच्छा करो.

इस साल हमारे दो मेजर टूर्नामेंट बाक़ी हैं, हम चाहते हैं कि उनमें हम अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करें. 2018 हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस साल एशियन गेम्स हैं और भारत में वर्ल्ड कप भी आयोजित किए जा रहे हैं.

मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी कि राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए मुझे चुना जाएगा. मुझे याद है जब हम वर्ल्ड कप के लिए जाने की तैयारी कर रहे थे तब सचिन तेंदुलकर ने हमारे साथ दो घंटे बिताये थे.

उन्होंने कहा था कि जब आप देश के लिए खेलते हैं और देश के लिए मेडल ले कर आते हैं, तो उस अचीवमेंट का कोई मोल ही नहीं हो सकता.

ओलंपिक मेडल जीतना ज़्यादा महत्वपूर्ण

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2014 के एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था और सीधे ओलंपिक के लिए सबसे पहले क्वालीफ़ाई किया था. उस वक्त सोलह साल बाद भारतीय टीम को यह सफलता हासिल हुई थी.

उस वक्त हमें ओलंपिक के लिए तैयार होने के लिए दो साल का वक्त मिल गया था. हम चाहते हैं कि इस बार भी एशियन गेम्स में वैसा ही प्रदर्शन करें ताकि हमें ओलंपिक में तैयारी के लिए अधिक समय मिल सके.

हमारे लिए ओलंपिक खेलों में मेडल जीतना ज़्यादा महत्वपूर्ण है.

एक बार जब हम एशियन गेम्स में खेल रहे थे और उस वक्त मेरे दादाजी की मौत हो गई थी. खिलाड़ियों के लिए फ़ोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करने का नियम था.

तो वापस आने के बाद ही मैं गांव जा सका था. लेकिन मुझे परिवार वालों का साथ हमेशा मिला.

अपने खेल से संतुष्ट नहीं

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मैं अपने खेल से अब तक संतुष्ट नहीं हो पाया हूं. कैंप आयोजित होते हैं और मैं कई बार ग़लतियां भी करता हूं.

अगर मैं अपने आप से संतुष्ट हो गया तो मैं आगे कैसे अपने को बेहतर बनाऊंगा? मुझे लगता है कि मैं अपनी ग़लतियों को सुधारूं और बेहतर खेलूं और लंबे समय तक खेल सकूं.

टीम में अभी बहुत से युवा खिलाड़ी हैं. मैं खुद को सीनियर नहीं मानता बल्कि जूनियर ही समझता हूं, और सभी से सीखने की कोशिश करता हूं.

खेल के दौरान मुझे साथी खिलाड़ियों का, ख़ास कर उनके पास, गोल और उनके पोज़ीशन से बेहद फ़ायदा पहुंचा है. मेरा खेल मेरे अकेले की नहीं बल्कि मेरे सभी साथियों की सफलता है जिन्होंने हमेशा मेरे हमेशा साथ दिया है.

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