बीसीसीआई के मौजूदा अधिकारी हटाए जाएं: सीओए

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मौजूदा पदाधिकारी हटाए जाएं, ये मांग सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी पांचवी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) ने की है.

फिलहाल सीके खन्ना बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष, अमिताभ चौधरी सचिव और अनिरूद्ध चौधरी कोषाध्यक्ष हैं.

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इतिहासकार रामचंद्र गुहा और बैंकर विक्रम लिमये के इस्तीफ़े के बाद प्रशासकों की समिति में पूर्व सीएजी विनोद राय और महिला क्रिकेटर डायना एडुल्जी ने ये सिफ़ारिश की है, समिति ने चुनाव नहीं होने तक अदालत से 'बोर्ड का शासन, प्रबंध और प्रशासन' अपने हाथों में सौंपने की मांग की है.

26 जुलाई की बैठक की सीओए को जानकारी नहीं

सीओए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 26 जुलाई को बोर्ड की विशेष आम बैठक से पदाधिकारियों ने सीईओ राहुल जौहरी और कानूनी टीम को ये कहकर बाहर कर दिया कि वो बोर्ड के पदाधिकारी नहीं हैं.

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उन्होंने प्रशासकों की मांग के बावजूद 26 जुलाई की बैठक में हुए फैसलों के बारे में सीओए को जानकारी नहीं दी. रिपोर्ट के मुताबिक डीडीसीए के प्रशासक (सेवानिवृत) न्यायधीश विक्रमजीत सेन ने भी इस बैठक में कहा कि पदाधिकारी लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं.

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26 पन्नों की इस रिपोर्ट में, 174 संलग्नक भी शामिल हैं, जिसमें साफ़ कहा गया है कि जिस तरह छह महीने बाद भी अदालत के आदेश का पालन नहीं करने की वजह से पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को हटाया गया था.

उसी तरह से सीके खन्ना, अमिताभ चौधरी और अनिरूद्ध चौधरी को भी हटाया जाए क्योंकि हलफ़नामा देने और छह महीने बीत जाने के बावजूद ये अधिकारी लोढा कमेटी की सिफारिशों को लागू करवाने में कामयाब नहीं रहे हैं.

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इसका साफ़ मतलब है कि ये पदाधिकारी इस स्थिति में नहीं हैं कि वो कोर्ट के निर्देशों को लागू करवा पाएं. इस मामले पर बीबीसी से बातचीत में सचिव अमिताभ चौधरी ने दो टूक कहा कि उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की, अब जैसा है वो ठीक है.

जबकि प्रशासकों की समिति से डायना एडुलजी ने अस्वस्थ होने की वजह से मामले में कुछ और कहने से मना कर दिया.

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रिपोर्ट में कहा गया कि बोर्ड के पदाधिकारियों ने ना सिर्फ 24 जुलाई के फैसले को जानबूझकर ग़लत अर्थों में लिया बल्कि चयन समिति के सदस्यों की संख्या को पांच से घटाकर तीन करने के अलावा किसी अहम सिफारिश पर कोई काम नहीं किया.

राज्य संघों के भुगतान पर हो विचार

सितंबर 2016 में जस्टिस एपी शाह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद लोकपाल नियुक्त करने में बीसीसीआई की असफलता का भी जिक्र किया गया है. सीओए ने कहा कि बीसीसीआई को छह सेवानिवृत जजों के नाम देने के बावजूद इस रिपोर्ट में समिति ने ये भी सिफारिश की है कि बीसीसीआई की तिजोरी से राज्य संघों को होने वाले भुगतान के बारे में नये सिरे से सोचा जाए.

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पांचवी रिपोर्ट में अदालत से समिति ने छह अहम मांगें करते हुए गुहार लगाई है कि अगर उन्हें ये सारे अधिकार नहीं सौंपे गये तो 18 जुलाई 2016 को कोर्ट का दिया फ़ैसला कभी भी दिन का उजाला नहीं देख पाएगा.

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