वो टेस्ट मुक़ाबले जब भाइयों ने मिलकर विरोधी टीम के छक्के छुड़ा दिए

मिचेल मार्श- शॉन मार्श इमेज कॉपीरइट Getty Images

सिडनी टेस्ट के चौथे दिन पहले ओवर में शॉन मार्श ने मोइन अली की गेंद पर चौका लगाकर शतक ठोक दिया. इस सिरीज़ में ये शॉन मार्श का दूसरा शतक था.

क्रीज पर शतक का जश्न मनाने के लिए उनके छोटे भाई मिचेल मार्श मौजूद थे, उन्होंने अपने भाई को बाहों में भर कर शतक को सेलिब्रेट किया. दोनों हाथ उठाकर मिचेल इस तरह जश्न मना रहे थे मानो कि ये शतक उनका अपना ही है.

इसके बाद वे थमे भी नहीं, उन्होंने इस पारी में अपना भी शतक पूरा किया. जब मार्श ने शतक जमाया तो उन्हें बधाई देने के लिए उनके बड़े भाई शॉन मार्श इस कदर क्रीज़ से भागे कि उन्हें ये ध्यान नहीं रहा कि वे रन आउट हो सकते हैं. ये इस सिरीज़ में मिचेल मार्श का भी दूसरा शतक रहा.

इन दोनों भाइयों की शतकों का असर ऐसा हुआ कि चौथे ही दिन टेस्ट पर ऑस्ट्रेलिया ने मैच पर पकड़ मज़बूत कर ली.

ये इस सिरीज़ में पहला मौका नहीं था, जब मार्श बंधुओं के करिश्मे ने टीम को जीत की राह पर डाला हो. सिरीज़ के दूसरे मुक़ाबले में एडिलेड में जब ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों से रन नहीं बन रहे थे, तब शॉन मार्श ने एक बेहतरीन शतक बनाकर टीम को उल्लेखनीय बढ़त दिलाई थी, जिसके आधार पर ऑस्ट्रेलिया 120 रन से मैच जीतने में कामयाब रहा था.

इसके बाद पर्थ में खेले गए मुक़ाबले में मिचेल मार्श ने कप्तान स्टीवन स्मिथ के साथ पांचवें विकेट के लिए 301 रनों की भागीदारी निभाते हुए 181 रन ठोक दिए. स्मिथ के 239 रन और मिचेल के 181 रनों की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने सिरीज़ के निर्णायक टेस्ट में पारी से जीत हासिल की.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

इसके बाद सिडनी टेस्ट में शॉन मार्श ने 156 रन ठोके, वहीं मिचेल ने 101 रनों की पारी खेलते हुए आपस में पहली शतकीय साझेदारी भी निभाई.

इस सिरीज़ से पहले दोनों भाई टेस्ट टीम से बाहर थे. एक ओर शॉन मार्श बढ़ती उम्र के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई मिडिल ऑर्डर में अपनी जगह पक्की नहीं कर पा रहे थे. उन्होंने एक तरह से अपना करियर ख़त्म हुआ मान लिया था.

करियर को मिली नई दिशा

32 साल के शॉन की तुलना में आठ वर्ष छोटे मिचेल मार्श को एक उपयोगी ऑलराउंडर के तौर पर देखा जा रहा था, जो अपने खेल से कहीं ज्यादा अपनी फिटनेस से जुझ रहा था. नाकामी और कंधे के आपरेशन के चलते मिचेल का करियर भी परवान चढ़ने से पहले डूबता हुआ लग रहा था.

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज़ रहे ज्यॉफ़ मार्श के इन दोनों बेटों से जितनी उम्मीद की जा रही थी, वैसा कमाल ये दोनों क्रिकेट के मैदान में नहीं दिखा पा रहे थे.

लेकिन ऑस्ट्रेलियाई चयन समिति ने दोनों को मौका देने का फ़ैसला लिया, उनके चयन को लेकर काफ़ी सवाल भी उठे. लेकिन बुलंद हौसलों के साथ बेहतर करने के दबाव के बीच इस सिरीज़ को मार्श बंधुओं ने यादगार सिरीज़ में तब्दील किया है.

दोनों भाइयों ने इस सिरीज़ में दो-दो शतक जड़कर अपने आलोचकों को करारा जवाब दे दिया है.

दरअसल एक ही टेस्ट की एक ही पारी में शतक जमाने के बाद मार्श बंधु, चैपल बंधु और वॉ बंधु की कतार में आ गए हैं. मौजूदा टेस्ट सिरीज़ में शॉन और मिचेल ने दो-दो शतक जमाया है. एक ही सिरीज़ में दो-दो शतक जमाने का काम करने वाली भाइयों की ये महज तीसरी जोड़ी है. उनसे पहले ये करिश्मा केवल चैपल बंधु और वॉ बंधु ही कर पाए थे.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

क्रिकेटिंग स्किल और क्रिकेट की समझ के लिहाज से मार्श बंधुओं को अभी चैपल और वॉ की कतार में आने में वक्त लगेगा लेकिन आंकड़ों ने इन तीनों को एक मंच पर तो ला ही दिया है.

चैपल बंधुओं में एक तरह की नैसर्गिकता थी, बड़े भाई इयन चैपल एक माहिर स्ट्रैटजिस्ट थे, वहीं ग्रेग चैपल अपने दौर के सबसे स्टाइलिश बल्लेबाज़ों में एक रहे. इन दोनों ने कई मौकों पर ऑस्ट्रेलियाई टीम को संकट से बाहर निकाला.

वहीं स्टीव वॉ और मार्क वॉ की जुड़वां जोड़ी का अंदाज भी एकदम अलग था. नपे तुले अंदाज़ से शुरआत करने वाले वॉ बंधु अपनी पारी की अंतिम गेंदों तक काफ़ी ख़तरनाक हो जाते थे. हालांकि वॉ बंधु एक साथ मैदान पर होते थे, तो एक दूसरे के प्रति काफी ठंडे रवैए से पेश आते थे.

चैपल-वॉ बंधु की कतार में

ख़ासकर मार्श बंधु ने जिस अंदाज़ में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में एक दूसरे को बधाई दी, वैसी झलक वॉ बंधु के बेहद कामयाब करियर में कभी नहीं दिखी.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

इसका बेहद दिलचस्प जवाब देते हुए वॉ बंधु मीडिया में कहा करते थे, "नौ महीने गर्भ में एक साथ, 16 साल एक ही कमरे में एक साथ रहते है, कहने को कुछ बाक़ी कहां हैं?"

लेकिन क्रिकेट के मैदान में वॉ बंधु के आंकड़े बेहद दमदार हैं, स्टीव वॉ ने टेस्ट मैचों में 32 शतक जमाए थे, जबकि मार्क वॉ ने टेस्ट में 20 और वनडे में 18 शतक ठोके थे. ऐसे में मार्श बंधुओं को अभी लंबा रास्ता तय करना है.

ऐशज सिरीज़ के दौरान दोनों का प्रदर्शन इस बात की तस्दीक करता है कि दोनों में मिले मौकों का फ़ायदा उठाने की काबिलियत है. अब देखना है कि वे अपना बेहतरीन प्रदर्शन का सिलसिला कायम रख पाते हैं या नहीं, हालांकि रिकॉर्ड बुक में वे हमेशा के लिए दर्ज हो चुके हैं.

मार्श बंधु की जोड़ी महज तीसरी जोड़ी है जिसने किसी टेस्ट की एक ही पारी में शतक बनाने का करिश्मा दिखाया हो और उन्हें बधाई देने के लिए नान स्ट्राइकर छोर पर भाई मौजूद रहा हो.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

इयन चैपल और ग्रेग चैपल ने दो बार ये करिश्मा दिखाया था, 1972 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ओवल टेस्ट में और 1974 न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वेलिंगटन में. इसके बाद ये करिश्मा 1995 में स्टीव वॉ और मार्क वॉ की जोड़ी ने वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ किंग्सटन में दिखाया था.

चैपल बंधुओं का जलवा

हालांकि इयन चैपल और ग्रेग चैपल ने कुल मिलाकर तीन बार टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में शतक जमाने का करिश्मा दिखाया था. इसमें से दो बार तो एक ही टेस्ट के दौरान देखने को मिला था. 1974 के वेलिंगटन टेस्ट की पहली पारी में ग्रेग चैपल ने 247 और इयन चैपल ने 145 रन ठोके थे.

इसके बाद दूसरी पारी में इयन चैपल ने 121 और ग्रेग चैपल ने 133 रन ठोके. इस पारी में जब ग्रेग ने शतक बनाया, तब तक इयन पवेलियन लौट चुके थे. दोनों पारियों में दोनों भाइयों के शतक के बाद भी ऑस्ट्रेलिया ये मैच जीत नहीं पाया था. मुक़ाबला ड्रा रहा था.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

इससे पहले 1972 में ओवल टेस्ट में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ इयन चैपल ने 118 और ग्रेग चैपल ने 113 रन बनाए थे. ऑस्ट्रेलिया ये टेस्ट पांच विकेट से जीतने में कामयाब रहा था.

मार्क-स्टीव वॉ का दम

वहीं स्टीव वॉ और मार्क वॉ की जोड़ी ने टेस्ट मैचों में ये कारनामा दो बार कर दिखाया. पहली बार 1995 में किंग्सटन में मार्क वॉ ने 126 रन ठोके थे, जबकि स्टीव वॉ ने 200 रनों की पारी खेली थी. ऑस्ट्रेलिया ये टेस्ट पारी और तीन रन से जीतने में कामयाब रहा.

इसके बाद 2001 में ओवल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मार्क वॉ ने 120 और स्टीव वॉ ने नाबाद 157 रन ठोके, ऑस्ट्रेलिया इन दोनों के शतकों की बदौलत ये टेस्ट पारी और 25 रन से जीतने में कामयाब रहा.

इन ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी के अलावा टेस्ट इतिहास में महज दो भाइयों की जोड़ी ने एक ही टेस्ट में शतक बनाने का करिश्मा दिखाया है.

पाकिस्तान के मोहम्मद भाई

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption मुश्ताक मोहम्मद की गिनती पाकिस्तान के बेहतरीन बल्लेबाज़ों में होती है

इनमें एक तो पाकिस्तान मुश्ताक मोहम्मद और सादिक मोहम्मद की जोड़ी है. मोहम्मद भाईयों ने 1976 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ हैदराबाद में शतक जमाया था. सादिक मोहम्मद के नाबाद 103 रन और मुश्ताक मोहम्मद के 101 रनों की बदौलत पाकिस्तान ने न्यूज़ीलैंड को 10 विकेट से हराया था.

फ्लावर बंधु का धमाल

इमेज कॉपीरइट Getty Images

वहीं दूसरी जोड़ी ज़िंबाब्वे के ग्रांट फ्लावर और एंडी फ्लावर भाइयों की है. इन दोनों के नाम बंधुओं में सबसे बड़ी टेस्ट साझीदारी करने का रिकॉर्ड है. ग्रांट फ्लावर और एंडी फ्लावर ने 1995 में हरारे में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 269 रन जोड़े थे. ग्रांट ने 201 रन बनाए थे जबकि एंडी फ्लावर ने 156 रनों की पारी खेली थी.

इन दोनों की धमाकेदार बल्लेबाज़ी के चलते ही ज़िंबाब्वे ने पाकिस्तान को पारी और 64 रनों से हराने का करिश्मा कर दिखाया था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे