कलमाड़ी का बयान दुर्भाग्यपूर्ण- हूपर

राष्ट्रमंडल खेल संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेलों के पर्यवेक्षक माइकल हूपर ने भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा उनको हटाए जाने की मांग को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

हूपर ने कहा है कि वो कहीं नहीं जाएंगें क्योंकि उन्हें राष्ट्रमंडल खेल संघ का पूरा समर्थन प्राप्त है.

माइकल हूपर ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मैं अपने ऊपर लगाए जा रहे सभी आरोपों से इनकार करता हूँ. अगर मैं यहाँ नहीं होता तो खेलों की तैयारियां और पीछे चल रही होतीं. मेरा काम ही है कि मैं तैयारियों से जुड़े सवाल उठाऊं और उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश करूँ."

हूपर ने आगे कहा, “ये दुर्भाग्यपूर्ण है की कलमाड़ी और कुछ और लोगों ने मेरे खिलाफ व्यक्तिगत रूप से निशाना साधा है जबकि उन्हें खेलों की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए था.”

उनका ये भी कहना था की खेलों के तैयारी में उन्होंने काफी अहम योगदान दिया है.

'हूपर व्यर्थ'

इसके पहले भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने कहा था कि वो सलाहकार की मौजूदगी के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन हूपर के खिलाफ हैं और राष्ट्रमंडल खेल समिति को उनकी जगह किसी और को भेजना चाहिए.

कलमाड़ी बोले, "माइकल हूपर की मौजूदगी से खेल आयोजन समिति को कोई लाभ नहीं हुआ है बल्कि उनकी वजह से रुकावटें ही बढ़ी हैं. दो साल से ऊपर समय से हूपर दिल्ली में हैं और उनकी मौजूदगी बिलकुल व्यर्थ रही है."

भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष ने ये भी कहा कि आयोजन समिति को फ़ौरन पत्र लिखकर हूपर को भारत से वापस बुलाए जाने की मांग करनी चाहिए.

भारतीय ओलंपिक संघ ने सामान्य समिति के अलावा खेल की तैयारियों के लिए गठित एक निगरानी समिति बनाये जाने पर भी विरोध जताया.

गत सप्ताह राष्ट्रमंडल खेल संघ ने कहा था की भारत को समय पर आयोजन करने के लिए अधिक प्रतिबद्धता दिखाई होगी. अगले साल प्रस्तावित राष्ट्रमंडल खेल भारत में 1982 के एशियाड के बाद से अब तक का सबसे बड़ा खेल आयोजन होंगे.

संबंधित समाचार