राजस्थान क्रिकेट बोर्ड भंग

क्रिकेट
Image caption आईपीएल चेयरमैन ललित मोदी के राजस्थान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष पद का चुनाव हारने के बाद से ही गुटबाज़ी चल रही थी

राजस्थान क्रिकेट बोर्ड (आरसीबी) में आंतरिक झगड़ों और गुटबाज़ी के बीच राज्य सरकार ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए मंगलवार देर रात बोर्ड को भंग कर दिया है.

राज्य सरकार ने आरसीबी को भंग करने साथ ही नौ सदस्यों की एक अस्थायी (तदर्थ) समिति गठित की है.

ग़ौरतलब है कि नौ माह पहले हुए बोर्ड के चुनाव में भारतीय प्रशासनिक सेवा के संजय दीक्षित ने आईपीएल चेयरमैन ललित मोदी को हराकर आरसीबी पर क़ब्ज़ा कर लिया था. जिसके बाद संजय दीक्षित और पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी के बीच गुटबाज़ी जमकर चल रही थी.

पिछले सितंबर महीने में आरसीबी में विवाद इतना गहराया की ज़्यादातर जिला इकाईयों ने दीक्षित के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया और नया अध्यक्ष चुन लिया. लेकिन दीक्षित ने इसे अस्वीकार कर दिया.

आरोप

दीक्षित के विरूद्व खड़े हुए समांतर अध्यक्ष राजेंद्र राठौर ने उनपर वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोप भी लगाए. दीक्षित ने इन आरोपों को ग़लत बताया है.

पर्वयक्षकों की राय में आरसीबी में छिड़ी लड़ाई का असर खेल के मैदान पर भी दिखाई देने लगा था. देश के विभिन्न हि्स्सों में हो रहे खेल मुक़ाबलों में दोनों गुटों की टीमें पहुँचने लगी थी और स्थिति बड़ी हास्यास्पद बन गई थी.

इस विवाद के बाद सरकार ने मंगलवार की रात इसे भंग करने का निर्देश दे दिया. जिसके बाद सहकारी विभाग देर रात सक्रिय हुआ और क्रिकेट संघ भंग कर दिया गया.

इस फ़ैसले के साथ ही दीक्षित का आरसीबी में आठ माह पुराना कार्यकाल समाप्त हो गया है. अब सरकार ने पूर्व रणजी खिलाड़ी रतन सिंह को अस्थायी ( तदर्थ) समिति का संयोजक बनाया है.

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