बीस सालों में सबसे यादगार

सचिन तेंदुलकर
Image caption सचिन तेंदुलकर ने वनडे क्रिकेट में 17 हज़ार से अधिक रन बनाए हैं

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपने बीस साल पूरे कर चुके मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि 1989 में पाकिस्तान में खेला गया टेस्ट मैच ही उनका सबसे यादगार मैच रहा है.

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बीस साल पूरे होने पर शुक्रवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मीडिया के कई सवालों के जवाब दिए. सचिन ने कहा कि 1989 में भारत के लिए पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलना उनके लिए अब तक का सबसे यादगार अनुभव रहा है और 2003 विश्व कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेली गई अपनी पारी को वो अब तक की अपनी सबसे बेहतरीन पारी मानते हैं.

सचिन ने कहा कि मैंने कई अच्छी पारियां खेली हैं और वो भी काफ़ी यादगार हैं क्योंकि उसकी वजह से टीम को जीत हासिल हुई है.

सचिन ने कहा, "2003 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेला गया मैच मेरे लिए बेहद ख़ास है. मुझे याद है कि 1989 में जब हम पाकिस्तान के फ़ैसलाबाद में दूसरा टेस्ट खेल रहे थे तो मैंने 58-59 रन बनाए थे. ये रन इसलिए अहम थे क्योंकि पहले टेस्ट में मेरा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था और मैं बहुत तनाव में था. मुझ पर भारी दबाव था. तब मैंने तय किया कि मुझे केवल अपने खेल के बारे में ही सोचना है, चाहे रनों का औसत कुछ भी हो. उसके बाद मेरा प्रदर्शन बेहतर होता गया."

सचिन ने कहा है कि देश के लिए खेलना ही उनका बचपन का सपना रहा है और वे खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि इतने सालों से अपने देश के लिए खेल रहे हैं.

बदलाव

सचिन भी मानते हैं कि पिछले 20 साल में क्रिकेट के स्वरूप में कई बदलाव आए हैं. ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच, अंतिम निर्णय के लिए अंपायर द्वारा टेलीविजन की मदद लेना और बल्लेबाज़ी की नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल जैसे कुछ बड़े बदलाव हुए हैं.

सचिन कहते हैं, "1989 से आज तक क्रिकेट में काफी बदलाव आए हैं. सबसे बड़ी चीज़ ये है कि पहले बल्लेबाज़ी करते हुए जो शॉट्स कभी-कभी इस्तेमाल किए जाते थे, अब उनका इस्तेमाल बहुत ज़्यादा होता है."

सवालों का जवाब देते हुए सचिन ने ये भी कहा कि आजकल के बल्लेबाज़ ज़्यादा जोखिम उठाते हैं और इसी का नतीज़ा है कि एक दिवसीय मैचों में अब बहुत रन बनते हैं. अच्छे विकेट पर 275 रन बनाना अब बड़ी बात नहीं रह गई है.

ये पूछे जाने पर कि पिछले बीस 20 साल में उनके खेलने के तरीके में कितना बदलाव आया है, सचिन ने कहा, "मैं काफ़ी बदल गया हूँ. हर मैच के साथ मैं खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता हूँ. ये एक कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है क्योंकि यहाँ हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता है."

टेस्ट इज़ बेस्ट

टेस्ट मैचों पर अपनी राय व्यक्त करते हुए सचिन ने कहा कि पहले लोग टेस्ट मैचों से बोरियत महसूस करते थे. इसकी वजह ये थी टेस्ट मैचों के नतीज़े बहुत कम आते थे. लेकिन आजकल इन मैचों में ज़्यादा नतीज़े आने से लोगों का भरपूर मनोरंजन होता है.

Image caption सचिन अपनी सफलता का श्रेय अपने परिजनों को देते हैं

आज जिस कामयाब सचिन को दुनिया जानती है आखिर उन्हें सबसे ज़्यादा सहयोग और प्रेरणा कहाँ से मिलती है, सचिन कहते हैं, " मेरे माता-पिता, भाई बहन और पत्नी अंजलि ने हमेशा मुझे सहयोग दिया है. मेरी मां क्रिकेट के बारे में कुछ नहीं जानती, लेकिन देश के लिए खेलने जाने पर मेरी सफलता की कामना करती है."

सचिन ने कहा, "मैं अपने बड़े भाई से क्रिकेट के बारे में बहस करता हूँ. दूसरे भाई-बहन भी मुझे बहुत सहयोग देते हैं. मैं अपनी पत्नी से भी क्रिकेट के बारे में बातें करता हूँ. मुझे लगता है कि यही वजह है कि मैं इतने लंबे समय तक टिका हुआ हूँ."

अपने क्रिकेट करियर के 20 साल पूरा होने पर सचिन अपने प्रशंसकों का धन्यवाद करना नहीं भूले. सचिन ने कहा, "पूरे देश के लोगों ने मुझे जो प्यार और सहयोग दिया है मैं उसे कभी नहीं भूल सकता."

1989 में पाकिस्तान के खिलाफ़ टेस्ट मैच से अपनी शुरुआत करने वाले सचिन ने अब तक 159 टेस्ट खेले हैं और 12,773 रन बनाए हैं, जिसमें 42 शतक शामिल हैं. इसके अलावा उन्होंने 436 एकदिवसीय मैचों में 45 शतक लगाए हैं और 17 हज़ार से अधिक रन बना चुके हैं.

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