टेस्ट है सचिन की असली विरासत

सचिन तेंदुलकर
Image caption सचिन तेंदुलकर ने वनडे क्रिकेट में 17,000 रन पूरे कर लिए हैं

एक ऐसे दौर में जब लोग टेस्ट क्रिकेट को समय की बर्बादी मानने लगे हैं, सचिन तेंदुलकर के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 20 साल पूरे होने का जश्न कुछ राहत देने वाला है.

ये हमें इस बात का अहसास भी दिलाता है कि जिस दौर में हम जी रहे हैं वहाँ किसी खिलाड़ी के दो दशक तक खेलते रहने की संभावनाएँ बहुत कम हैं.

ये वो युग है जिसमें ये माना जाता है कि चिरस्थायित्व एक पल में हासिल किया जा सकता है. हम ऐसे समाज में रह रहे हैं जो ये मानता है कि हम जितना ज़्यादा जीएँगे, यादें उतनी ही धुंधली पड़ती जाएँगी. आज का समाज ये भी मानता है कि जो कुछ ही सेकंड में दक्षता और ज्ञान हासिल कर लेता है, दरअसल वही इस दुनिया पर राज भी करता है.

दरअसल, बुद्धि का इससे लेना-देना नहीं है कि आप सीखने में कितने साल लगाते हैं. किसी खिलाड़ी को अपना कौशल दिखाने के लिए सिर्फ़ एक ही दिन काफ़ी है कि वह अपने हुनर में कितना माहिर है.

आशंकाएँ

जब तेंदुलकर ये कहते हैं कि उन्हें पक्का यकीन है कि टेस्ट मैच क्रिकेट अपनी प्रासंगिकता कभी नहीं गँवाएगा, तो वे उन सभी की तरफ़ से बोलते हैं जो उस क्रिकेटीय कौशल को पसंद करते हैं जो सीखने की लंबी प्रक्रिया और कड़ी मेहनत से हासिल होता है.

Image caption सचिन तेंदुलकर का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट अपनी अहमियत हमेशा बनाए रखेगा

लेकिन जब वो ये कहते हैं कि कौन जानता है कि अगले 20 साल में क्या होगा, तो उन आशंकाओं को बल देते हैं जिनका मानना है कि बढ़ता बाज़ारवाद क्रिकेट के लंबे संस्करण को ज़िंदा नहीं रहने देगा.

हो सकता है कि आने वाले समय में लोग तेंदुलकर की शैली और टेस्ट मैचों में उनके शानदार कौशल को भुलाकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में उनके दो दशक के सफर को ज़्यादा अहमियत दें. ये भी संभव है कि उन्होंने जितने भी रन और शतक बनाए हैं उनका महत्व ख़ास संदर्भों में ही हो.

और क्योंकि लोगों की याददाश्त दिन पर दिन कमज़ोर होती जा रही है, तो शायद हमसे ये भी कहा जाए कि आने वाले वर्षों में लोगों के पास तेंदुलकर की बेमिसाल उपलब्धियों का याद करने का वक़्त नहीं होगा.

‘क्रिकेटमेंट’ के इस दौर में हो सकता है कि एक दिन हमें ये भी देखने को मिले कि आईपीएल की टीमों में एक-दो स्थान फ़िल्म अभिनेताओं के लिए आरक्षित हैं.

लेकिन शेन वार्न और तेंदुलकर के बीच टक्कर सिर्फ़ और सिर्फ़ टेस्ट क्रिकेट में ही संभव है. अगर कभी ऐसा समय आता है जब खेल और क्रिकेट पर समय हावी हो जाएगा, सिर्फ़ फटाफट क्रिकेट ही चले तो क्रिकेट महज एक उपभोक्ता वस्तु बनकर रह जाएगा, तब तेंदुलकर को कैसे याद किया जाएगा?

बेशक, तेंदुलकर के वनडे रिकॉर्ड को हर लिहाज से याद रखा जाएगा. लेकिन दाएँ हाथ के इस बेजोड़ बल्लेबाज़ की असली विरासत टेस्ट क्रिकेट है, जिसका वो सबसे ज़्यादा लुत्फ़ उठाते आए हैं. और अगर भारत उन्हें अहमियत देता है तो उसे टेस्ट क्रिकेट को बचाए रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए. तेंदुलकर के लिए हमारा ये सबसे बड़ा तोहफ़ा होगा.

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