गेंदबाज़ों को कौन बचाएगा?

सचिन और सहवाग
Image caption तेंदुलकर और सहवाग ने श्रीलंकाई गेंदबाज़ों को जमने ही नहीं दिया

साल 2003 में जब ट्वेन्टी-20 क्रिकेट सामने आया तो कहा गया कि ये फीके होते क्रिकेट में मसाले का तड़का देगा.

इस फ़ॉर्मेट ने क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद भी की है मगर उसके साथ ही जो चर्चा आगे बढ़ी है वो ये कि क्या इसके बाद वनडे क्रिकेट ज़िंदा रह पाएगा.

टेस्ट क्रिकेट को असली क्रिकेट बताकर उसे क़ायम रखने की माँग करने वाले क्रिकेटरों का अभी एक बड़ा वर्ग है और इसकी भेंट चढ़ सकता है वनडे क्रिकेट.

मगर राजकोट में भारत और श्रीलंका के बीच हुआ मुक़ाबला क्या किसी मसाला क्रिकेट से कम था.

शुरू से आख़िर तक आठ रन प्रति ओवर के रनरेट से रन बने, चौकों-छक्कों की बरसात हुई, एक दिन में 800 से ज़्यादा रन और अंतिम ओवर में जाकर मैच का फ़ैसला हुआ.

सचिन तेंदुलकर ने किस ख़ूबसूरती और विश्वास से शॉट खेले, सहवाग और धोनी ने कितनी निर्ममता से गेंदबाज़ों की धुनाई की. मैदान में दर्शकों को चीख़ने-चिल्लाने का ख़ूब मौक़ा मिला.

आगे थे श्रीलंकाई

पैसा वसूल यहीं नहीं थमा. श्रीलंकाई बल्लेबाज़ जब खेलने उतरे तो वो एक क़दम और आगे निकले.

Image caption ज़हीर ख़ान ने बेहतरीन 49वाँ ओवर फेंका.

भारत के सलामी बल्लेबाज़ों ने तो 153 ही रन जोड़े थे, उपुल तरंगा और तिलकरत्ने दिलशान की सलामी जोड़ी ने 188 रन धुन दिए.

वीरेंदर सहवाग तो 146 रनों पर ही आउट हो गए थे दिलशान ने 160 रन बना दिए. दूसरे सलामी बल्लेबाज़ तेंदुलकर ने 69 रन बनाए थे तो श्रीलंकाई दूसरे सलामी बल्लेबाज़ तरंगा ने भी 67 रन बनाए.

भारतीय पारी में अगला प्रमुख योगदान था कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का, जिन्होंने 53 गेंदों में 72 रन बनाए थे.

श्रीलंकाई स्कोर कार्ड देखेंगे तो पाएँगे कि उनकी पारी में भी अगला योगदान कप्तान कुमार संगकारा का ही थी. मगर उन्होंने 43 गेंदों में ही 90 रन जड़ दिए थे.

अंत की ओर विराट कोहली और रवींद्र जडेजा की पारियों ने भारत को 414 रनों तक पहुँचाया था तो श्रीलंका की ओर से भी अंत की ओर कंदांबी और एंजेलो मैथ्यूज़ की पारियों ने वैसा ही काम किया.

बल्कि अगर आप 48 ओवरों के बाद भारत का स्कोर देखें तो पाएँगे कि भारत ने सात विकेट के नुक़सान पर 388 रन ही बनाए थे. जबकि श्रीलंका ने 48 ओवरों के बाद 400 रन बना लिए थे और विकेट गिरे थे सिर्फ़ पाँच.

गेंदबाज़ों की बलि!

अंतिम दो ओवरों में भारत ने जोड़े थे 26 रन जबकि श्रीलंकाई खिलाड़ी जोड़ पाए सिर्फ़ 11 रन.

तो जीत दिलाई ज़हीर ख़ान के 49वें और आशीष नेहरा के 50वें ओवर ने.

मगर उससे पहले तक इन दोनों की जो धुनाई हुई है उसके बाद मुझे तो पूर्व क्रिकेटर नयन मोंगिया की बीबीसी से कही गई वो बात बिल्कुल सही लगती है कि- ऐसा ही रहा तो कुछ समय बाद कौन गेंदबाज़ बनना चाहेगा.

लोगों को क्रिकेट की ओर खींचने के चक्कर में फ़ॉर्मेट में बल्लेबाज़ों की ओर जो झुकाव दिखता है कहीं वो गेंदबाज़ों की बलि ही न ले ले.

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