क्या सफल होगा आयोजन?

भारत में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन और उससे जुड़ी तैयारियों पर उठे सवालों ने लगातार सुर्ख़ियाँ बटोरीं.

राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति और राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों पर निगरानी रखने वाले आयोग के बीच काफ़ी खींच-तान चलती रही.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने साल के अंत में यहाँ तक कह दिया कि वे हमेशा प्रार्थना करती हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन ठीक से हो जाए और भारत की प्रतिष्ठा को धक्का न पहुँचे.

दूसरी ओर समय से स्टेडियमों के निर्माण को लेकर आशंकाएँ अब भी क़ायम हैं. हालाँकि आयोजन समिति, खेल मंत्री एमएस गिल और भारतीय ओलंपिक संघ के प्रमुख सुरेश कलमाडी ये दावा करते रहे हैं कि आयोजन में कोई समस्या नहीं आएगी.

विवाद

इस बीच सुरेश कलमाडी ने कॉमनवेल्थ गेम्स फ़ेडरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल हूपर को वापस बुलाए जाने की मांग करके विवाद को नया रंग दे दिया.

सुरेश कलमाडी ने कहा कि माइकल हूपर के भारत में रहने से आयोजन समिति को कोई फ़ायदा नहीं हुआ है बल्कि इससे रुकावटें ही आई हैं.

लेकिन राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के अध्यक्ष माइक फ़ेनेल ने सुरेश कलमाडी की मांग को ठुकरा दिया और उन्हें सलाह दे डाली कि आयोजन समिति खेल की तैयारियों पर ज़्यादा ध्यान दे.

इन विवादों के बीच खेलों की आयोजन समिति ने कहा कि उसे टीवी प्रसारण अधिकार से 300 करोड़ रुपए का फ़ायदा होगा. साथ ही यह भी दावा किया गया कि ये आय पहले के अनुमान से बहुत ज़्यादा है.

राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन वर्ष 2010 में तीन से 14 अक्तूबर तक दिल्ली में आयोजित होगा. भारत इससे पहले वर्ष 1951 और 1982 के एशियाई खेलों की मेज़बानी कर चुका है.

लेकिन आयोजकों पर इसका दबाव है कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान कैसे सब कुछ ठीक रहे. दिल्ली में बुनियादी सुविधाएँ अच्छी रहें, सभी स्टेडियम तैयार रहें और सुरक्षा व्यवस्था में कोई ख़ामी न रहे.

तैयारी

दिल्ली सरकार ने भी इसके लिए तैयारी की है. दिल्ली के कई इलाक़ों को चमकाया जा रहा है, सड़कें चौड़ी की जा रही हैं और परिवहन व्यवस्था दुरुस्त की जा रही है.

राष्ट्रमंडल खेलों को देखते हुए दिल्ली मेट्रो का विस्तार किया जा रहा है. राष्ट्रमंडल खेल गाँव से महत्वपूर्ण ठिकानों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है ताकि खिलाड़ियों को आने-जाने में कोई परेशानी न हो.

दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी विस्तार किया गया है और इसे चमकाया जा रहा है.

बिजली व्यवस्था बाधित न रहे, इसके लिए सरकार ने सात हज़ार मेगावाट बिजली का उत्पादन करने की योजना बनाई है.

इन सबके बीच सवाल यही है कि क्या दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन सही तरह से कर पाएगा...और इसका जवाब तो अक्तूबर 2010 में ही मिल पाएगा.

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