टी-ट्वेंटी से टेस्ट को नुक़सान

गुंडप्पा विश्वनाथ
Image caption गुंडप्पा विश्वनाथ क्रिकेट की तकनीक पर ज़ोर देते हैं.

अपने दौर के सबसे कलात्मक बल्लेबाज़ गुंडप्पा विश्वनाथ मानते हैं कि टी-ट्वेंटी जैसा फटाफट खेल क्रिकेट के असली स्वरूप यानी टेस्ट क्रिकेट का आकर्षण ख़त्म कर देगा.

वे कहते हैं कि इंडियन प्रीमियर लीग से टेस्ट क्रिकेट को भारी नुक़सान पहुंचा है. लेकिन इससे एकदिवसीय क्रिकेट को फ़ायदा हुआ है.

अपने करियर में 91 टेस्ट खेलने वाले विश्वनाथ एक क्रिकेट अकादमी के उदघाटन के सिलसिले में कोलकाता आए थे.

विश्वनाथ कहते हैं, "क्रिकेट के इस नए स्वरूप से टेस्ट क्रिकेट को भारी नुक़सान हुआ है. टी-ट्वेंटी में खिलाड़ियों को ज्यादातर हवाई शॉट खेलने पड़ते हैं. ज्यादातर खिलाड़ी टेस्ट मैचों में भी ऐसे ही शॉट खेलने की ग़लती कर रहे हैं. इससे टेस्ट क्रिकेट को नुक़सान हो रहा है."

वे कहते हैं कि टी-ट्वेंटी और एक दिवसीय मैचों में 'बैटिंग पावरप्ले' की वजह से खिलाड़ी ज्यादातर ऐसे शॉट खेलते नज़र आते हैं जो क्रिकेट के प्रचलित स्वरूप से मेल नहीं खाते. उन मैचों में खिलाड़ियों का मकसद जल्दी-जल्दी रन बटोरना होता है. लेकिन टेस्ट क्रिकेट में ऐसे शॉट ठीक नहीं है.

उनका कहना है कि टेस्ट क्रिकेट अधिक से अधिक शॉट खेलने की नहीं, बल्कि क्रिकेटीय कौशल के इस्तेमाल की जगह है.

विश्वनाथ कहते हैं, "मैं हमेशा युवा खिलाड़ियों को हवा में शॉट नहीं खेलने की सलाह देता हूं. जब कोई बल्लेबाज़ 60 या 70 रनों के निजी स्कोर पर खेल रहा होता है तो उसमें अपने आप हवा में शॉट खेलने का आत्मविश्वास पैदा हो जाता है. टेस्ट क्रिकेट में शॉट्स का सही चयन ही कामयाबी की कुंजी है. हर किसी में वीरेंद्र सहवाग जैसा संतुलन नहीं होता."

अपने करियर में 14 शतकों समेत 6080 रन बनाने वाले विश्वनाथ युवा खिलाड़ियों में प्रचलित इस मान्यता के ख़िलाफ़ हैं कि देश के लिए खेलने की बजाए इंडियन प्रीमियर लीग को तरजीह देनी चाहिए.

'नए खिलाड़ी इंतज़ार करें'

विश्वनाथ कहते हैं कि चार-छह ओवरों तक गेंदों की धुनाई या चार ओवरों की बढ़िया गेंदबाज़ी से मिली कामयाबी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकती.

वे कहते हैं, "टी-ट्वेंटी में कामयाबी के लिए भी क्रिकेट की तकनीक पर गहरी पकड़ जरूरी है. किताबी क्रिकेट शॉट्स खेल कर भी टी-ट्वेंटी में कामयाबी हासिल की जा सकती है."

विश्वनाथ कहते हैं कि भारत को और अधिक टेस्ट मैच खेलने चाहिए.

वे कहते हैं, "हम दुनिया की नंबर वन टेस्ट टीम हैं. हमें इस खिताब के बचाव के और मौके मिलने चाहिए. ज्यादा मैच नहीं खेलने की वजह से दूसरे देश हमें पछाड़ सकते हैं."

नेशनल क्रिकेट अकादमी के सलाहकार के तौर पर काम कर चुके विश्वनाथ मानते हैं कि इस समय भारतीय टीम काफी मजबूत है.

वे कहते हैं, "बिशन सिंह बेदी के दौर में भी बाएं हाथ के कई प्रतिभावान स्पिनर थे. लेकिन बेदी उनमें महानतम थे. इसलिए उस दौर में कइयों को टीम में जगह नहीं मिल सकी."

वे कहते हैं कि टीम में अपनी पक्की जगह बनाने का इंतज़ार कर रहे सुरेश रैना, विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा जैसे खिलाड़ी टेस्ट मैच में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. लेकिन उनको अपनी बारी का इंतज़ार करना होगा.

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