दोधारी तलवार बन गया है क्रिकेट

ललित मोदी और शिल्पा शेट्टी
Image caption आईपीएल में किसी टीम ने पाकिस्तानी खिलाड़ी की बोली नहीं लगाई.

क्रिकेट अब खेल नहीं रहा. यह उन लोगों के लिए एक हथियार बन गया है जो इसका इस्तेमाल अन्य कारणों से करते हैं.

सरकार इसका इस्तेमाल शांति और घृणा दोनों फैलाने के लिए करती है तो कारोबारी अपने उत्पाद बेचने के लिए जिससे पैसा बनाया जाए.

वहीं इस खेल से जुड़े प्रशासक फ़िल्मी कलाकारों की तरह ख़ुद को प्रोमोट करने के लिए क्रिकेट को हथियार बनाते हैं.

और जो खिलाड़ी है, उसे इतना पैसा मिलता है कि वह व्यवस्था की ग़ुलामी कर सके.

यह खेल इतने हितसाधकों के पाले से गुजरता है कि बेचारे प्रशंसकों की भावनाएँ आहत हो जाती हैं. वे उन लोगों के कौशल का क़द्र करना भूल चुके हैं जो खेल को समृद्ध बनाते हैं और हार-जीत से अलग मुक़ाबले को रोमांचक क्षणों तक खींच ले जाते हैं.

चौतरफ़ा प्रहार के बीच आईपीएल ने इस साल एक नया मोर्चा खोल दिया है. मुंबई में हुआ आतंकवादी हमला भी भारत-पाकिस्तान के बीच लड़ाई का कारण नहीं बन सका लेकिन लगता है ताज़ा विवाद ये भी करा सकता है.

ये उन लोगों के लिए सबक है जो सोचते थे कि क्लब आधारित मुक़ाबले अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को तोड़ सकेंगे और अलग-अलग देशों के खिलाड़ी एक मंच पर होंगे.

दोधारी तलवार

Image caption पाकिस्तान में आईपीएल की आलोचना हो रही है.

तीन साल पहले आईपीएल की शुरुआत के बाद से ही यह मूढ राष्ट्रीयता को बढ़ावा देता रहा है जैसा कि पिछले साल तब हुआ जब यह भारत से बाहर निकल गया.

आतंकवाद के युग में अगर राजनीतिक उद्देश्य के लिए खेल का इस्तेमाल किया जाए तो यह दोधारी तलवार की तरह है और इसमें फ़ायदा पहुँचाने की तुलना में नुकसान पहुँचाने की ताकत ज़्यादा है.

पाकिस्तानी क्रिकेटर आईपीएल में खेलने लायक हैं या नहीं, ये विवाद पाकिस्तान में ख़तरनाक मोड़ ले रहा है, हालांकि भारतीय मीडिया काफ़ी हद तक संयम बरत रही है.

यहां तक कि भारतीय मीडिया ने पूरे मुद्दे पर आयोजकों के रवैये की आलोचना की है. लेकिन पाकिस्तान में फूटा गुस्सा समझा जा सकता है.

रमीज़ राजा के उस बयान में दम है जिसमें उन्होंने कहा है, “अगर आप हमारा स्वागत नहीं कर सकते तो खिलाड़ियों की बोली लगाने का नाटक ही नहीं करना चाहिए.”

आईपीएल और फ़्रैंचाइजी की संवेदनहीनता ही कही जाएगी कि टी-20 के कुछ श्रेष्ठ खिलाड़ियों को बोली के लिए आमंत्रित किए जाने के बावजूद उन्हें ख़रीदा नहीं गया.

लेकिन कोई इस विद्रूप कैसीनो गेम में शामिल लोगों से क्या उम्मीद कर सकता है जहां मवेशी बाज़ार की तरह खिलाड़ी ख़रीदे और बेचे जाते हैं.

सीमा के पार पाकिस्तानी सरकार को समझना चाहिए कि मुंबई हमलों के बाद खेल के नियम बदल गए हैं और अगर वे भारत विरोधी मुहिम को तेज़ कर अपना दुख व्यक्त करना चाहते हैं तो ये किसी के हित में नहीं होगा.

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