ऐसे खेलें जैसे ज़िंदग़ी-मौत का सवाल हो

दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ी
Image caption दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ियों ने भारतीय खिलाड़ियों को धूल चटा दी

भारतीय चयनकर्ताओं ने अगर नागपुर टेस्ट में हार से कुछ सीखा है तो कोलकाता में होने वाले दूसरे टेस्ट के लिए चुनी गई टीम में वो सीख कम से कम दिखती तो नहीं है.

दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध पहले टेस्ट में मिली बड़ी हार के बाद टीम के दो रिज़र्व यानी अतिरिक्त खिलाड़ियों- तेज़ गेंदबाज़ सुदीप त्यागी और अभिमन्यु मिथुन को बाहर कर दिया गया.

अब इसकी वजह यही हो सकती है कि शायद वो गेंदबाज़ों को सही एनर्जी ड्रिंक न पहुँचा पाए हों या बल्लेबाज़ों को उन्होंने सही बैट न पहुँचाए हों या कोई खिलाड़ी जब मैदान से हाथ हिलाकर उनसे कुछ मँगा रहा हो तो वो तुरंत वो सामान न पहुँचा पाए हों.

अगर ये बात नहीं थी तो इन खिलाड़ियों को बलि का बकरा बनाए जाने या मैदान में खेल रहे 11 खिलाड़ियों की वजह से मिली हार के बाद टीम से हटाए जाने की भला और क्या वजह हो सकती है.

भारत में हमेशा से ऐसा होता रहा है.

जब एक टीम हारती है तो अतिरिक्त खिलाड़ियों को ही बाहर का रास्ता दिखाया जाता है, भले ही उन्होंने अपने सीमित अनुभव के साथ वही किया हो जिस चीज़ की उनसे अपेक्षा थी.

चयन से जुड़े मुद्दे

तो हुआ यूँ कि अब साहा ने ख़ुद को टीम से बाहर पाया, शायद इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने बल्ले को ऊपर उठाकर गेंद को ऑफ़ स्टंप से टकरा जाने दिया मगर जब दूसरे कुछ बल्लेबाज़ों ने भी ऐसा ही किया और उनके खाते में भी कोई बहुत ज़्यादा रन नहीं हैं, तो उनके ऊपर कोई गाज नहीं गिरी और वे टीम में बने हुए हैं.

ऐसा कम ही होता है कि भारतीय चयनकर्ता वास्तविकता को समझें. वे किसी मसले से सीधे निबटने के बजाए उस समस्या के इर्द-गिर्द ही मँडराते रहते हैं.

इसीलिए आसान राह है अतिरिक्त खिलाड़ियों को बाहर की राह दिखा देना और भारत में किसी मैच के लिए 15 खिलाड़ियों की टीम चुन लेना.

दक्षिण अफ़्रीका की टीम बिना किसी अतिरिक्त विकेट कीपर के इतनी दूर आई है मगर हमें भारत में खेलते हुए भी एक अतिरिक्त विकेट कीपर चाहिए.

रोहित शर्मा को नागपुर में टेस्ट शुरू होने से कुछ ही देर पहले चोट लग गई, उसे देखते हुए अगर ये मान भी लें कि टॉस से महज़ पंद्र मिनट पहले एक नया विकेट कीपर लाना आसान नहीं होता, तो कम से कम जिस जगह मैच हो रहा है उसका ध्यान रखते हुए तो टीम का चयन किया जा सकता है.

वृद्धिमान साहा कोलकाता से ही हैं और अगर धोनी को मैच वाली सुबह कोई परेशानी होती है तो उन्हें किसी भी समय बुलाया जा सकता है. हाँ ये बात अलग है अगर चयनकर्ता अब ये कह रहे हों कि साहा एक अच्छे विकेट कीपर नहीं हैं, जबकि कुछ ही दिनों पहले तक ऐसा नहीं था.

Image caption साहा को एक ही मैच के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया

चयनकर्ता सीमित ओवरों के लिए टीम का चयन रणजी ट्रॉफ़ी के प्रदर्शन के आधार पर करते हैं जबकि टेस्ट क्रिकेट के लिए टीम सीमित ओवरों के घरेलू टूर्नामेंट में प्रदर्शन के आधार पर चुनी जाती है.

प्रतिबद्ध विपक्षी

दक्षिण अफ़्रीका के भारत दौरे पर आने से पहले ही उनके कोच ने इस्तीफ़ा दे दिया और पूरी चयन समिति ही भंग कर दी गई मगर इस टीम ने दिखा दिया है कि वे यहाँ नंबर वन का स्थान वापस पाने आए हैं.

उनके बल्लेबाज़ों ने टेस्ट क्रिकेट को पूरे पाँच दिनों का मानते हुए प्रतिबद्धता और धैर्य दिखाया है और उनके इस रवैये ने भारतीय गेंदबाज़ों को धूल चटा दी.

इसके बाद स्टेन और मॉर्केल ने भारतीय बल्लेबाज़ों को अपनी गेंदबाज़ी की गति और स्विंग से धो डाला जबकि पार्नेल और हैरिस ने उनके धैर्य की परीक्षा ली.

उन्होंने बहुत ही सुनियोजित ढंग से काम किया और नतीजा- एक बड़ी जीत.

अब कम से कम वे सिरीज़ तो नहीं ही हार सकते और नंबर वन रैंकिंग से वे बस कुछ ही दिन दूर हैं.

भारत अब भी वापसी कर सकता है मगर उसी हालत में जबकि कुछ खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से ये दिखाएँ कि भारतीय टीम में खेलना उनके लिए कुछ ख़ास मायने रखता है और इस तरह से खेलें जैसे ये उनकी ज़िंदग़ी और मौत का सवाल है.

(प्रोफ़ेशनल मैनेजमेंट ग्रुप के सौजन्य से)

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